कम उम्र में ही अपने तूफानी खेल से पूरी दुनिया का ध्यान खींचने वाले वैभव सूर्यवंशी अब खेल प्रेमियों के बीच खास चर्चा का विषय बन चुके हैं। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी शैली का ऐसा खुमार लोगों पर चढ़ा है कि दर्शक दलीप ट्रॉफी के मुकाबलों से अपनी नजरें नहीं हटा पा रहे हैं। भारत के पूर्व कप्तान कृष्णमाचारी श्रीकांत भी इस युवा सनसनी के खेल से बेहद प्रभावित नजर आए हैं। उन्होंने एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बातचीत के दौरान बताया कि उनके घर में भी इस खिलाड़ी का जादू चल रहा है और उनकी पत्नी विशेष तौर पर वैभव के खेल को देखने के लिए मैच देख रही हैं। श्रीकांत का मानना है कि यदि इस प्रतिभावान खिलाड़ी को सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिलता रहा, तो वह आने वाले समय में वैश्विक क्रिकेट के सबसे बड़े सितारों में से एक बन सकते हैं।
तीनों प्रारूपों में चमकने का दम
पूर्व कप्तान का यह स्पष्ट तौर पर कहना है कि इस युवा खिलाड़ी में खेल के तीनों प्रारूपों में अपनी छाप छोड़ने और लंबे समय तक अपना दबदबा कायम रखने की पूरी क्षमता मौजूद है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ऐसे होनहार खिलाड़ियों को लगातार समर्थन मिलना चाहिए ताकि उनका मनोबल ऊंचा रहे। उनका यह भी मानना है कि इस तरह के खिलाड़ी पारंपरिक लाल गेंद के खेल को दोबारा उसका पुराना रोमांच और लोकप्रियता दिला सकते हैं। इस युवा खिलाड़ी के मैदान पर उतरने के बाद से दर्शकों की रुचि इस प्रतियोगिता में काफी बढ़ गई है। आने वाले वक्त में यह खिलाड़ी वैश्विक स्तर पर अपनी टीम के लिए बेहद मूल्यवान साबित होने की पूरी काबिलियत रखता है।
सेमीफाइनल मुकाबले में खेली शानदार पारी
इस युवा खिलाड़ी ने केवल सीमित ओवरों के खेल में ही नहीं, बल्कि लाल गेंद के मुकाबले में भी अपनी असाधारण क्षमता का प्रदर्शन किया है। दलीप ट्रॉफी के इस सत्र में ईस्ट जोन की तरफ से मैदान पर उतरते हुए उन्होंने शुरुआती दौर के मैच में भले ही ज्यादा रन नहीं बनाए हों, लेकिन नॉकआउट चरण में उनका बल्ला जमकर बोला। सेंट्रल जोन के खिलाफ हुए कड़े मुकाबले की पहली पारी में उन्होंने बेहद आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए मात्र 81 गेंदों में ही 92 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेल डाली। इसके बाद मैच की आखिरी पारी में भी उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए 40 रनों का बहुमूल्य योगदान दिया और अपनी टीम को चार विकेट से जीत दिलाकर फाइनल मुकाबले तक का सफर तय करने में मुख्य भूमिका निभाई।
दलीप ट्रॉफी में रचा नया इतिहास
इस शानदार प्रदर्शन के दम पर वैभव ने इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के इतिहास में एक नया आयाम स्थापित कर दिया है। वह इस प्रतियोगिता में अर्धशतक जड़ने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने 57 साल पुराने पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए महज 15 साल और 157 दिन की उम्र में यह ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम दर्ज कराई। क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि इस खिलाड़ी की प्रतिभा पर किसी भी प्रकार का संदेह करने की कोई गुंजाइश नहीं बचती है। वह हर स्तर की प्रतिस्पर्धा में अपनी काबिलियत साबित करने में पूरी तरह सफल रहे हैं और आने वाले दिनों में हर प्रारूप में अपना सिक्का जमाने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं।
गेंदबाजों के खिलाफ बेखौफ अंदाज
पूर्व कप्तान ने इस बात का भी विशेष रूप से उल्लेख किया कि यह युवा खिलाड़ी लाल गेंद के खेल में भी तेज गेंदबाजों के सामने बिल्कुल नहीं हिचकिचाता है। वह गेंदबाजों पर पूरी तरह हावी होकर सीधे मैदान पर बड़े छक्के लगाने में माहिर है। उनके इस निडर और आक्रामक रवैये को देखकर खेल जगत के कई दिग्गज उन्हें आने वाले समय का महान खिलाड़ी मान रहे हैं। उनकी इस असाधारण बैटिंग शैली ने साबित कर दिया है कि उम्र महज एक आंकड़ा है और सही हुनर के आगे बड़े से बड़े गेंदबाज बेबस नजर आ सकते हैं।



















