एशियाई खेलों में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने के बाद आत्मविश्वास से भरी भारतीय क्रिकेट टीम अब कैरेबियाई चुनौती से निपटने के लिए तैयार हो रही है। वेस्टइंडीज के खिलाफ शुरू हो रही घरेलू टी20 सीरीज के पहले मुकाबले से पूर्व भारतीय थिंक टैंक के सामने सबसे पेचीदा सवाल अंतिम एकादश की संरचना को लेकर खड़ा हो गया है। हालिया टूर्नामेंट में जब वीवीएस लक्ष्मण अंतरिम जिम्मेदारी संभाल रहे थे, तब परिस्थितियां भिन्न थीं और बल्लेबाजी क्रम में व्यापक प्रयोग देखने को मिले थे। अब पूर्णकालिक मुख्य कोच गौतम गंभीर की देखरेख में रणनीतिक संतुलन का नया खाका तैयार किया जा रहा है, जिसमें शीर्ष क्रम का चयन सबसे बड़ी बहस बन चुका है।
शीर्ष क्रम की दावेदारी और रणनीतिक फेरबदल
निशिन सिटी में कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क की बेहद धीमी और दोहरी गति वाली पटरियों पर लक्ष्मण ने संजू सैमसन और युवा प्रतिभा वैभव सूर्यवंशी दोनों को एक साथ मैदान में उतारने का दांव आजमाया था। उस दौर में मौजूदा समय के शीर्ष क्रम के टी20 धुरंधर अभिषेक शर्मा के साथ सूर्यवंशी को पारी शुरू करने भेजा गया था, जबकि सैमसन को नंबर तीन पर उतारा गया। हालांकि, तीसरे क्रम पर सैमसन का सहज प्रदर्शन देखने को नहीं मिला था। इससे पहले जब सैमसन ने घरेलू मैदान पर अफगानिस्तान के खिलाफ पारी का आगाज किया था, तो उन्होंने लगातार दो अर्धशतक जड़कर अपनी उपयोगिता सिद्ध की थी।
लखनऊ के इकाना स्टेडियम की परिस्थितियों को देखते हुए गंभीर शीर्ष क्रम में अभिषेक शर्मा के जोड़ीदार के रूप में सैमसन की वापसी पर गंभीरता से विचार कर सकते हैं। चूंकि आठवें नंबर तक बल्लेबाजी गहराई बनाए रखने की परंपरा दोनों कोचों के दृष्टिकोण में रही है, लेकिन गंभीर एक ही मैच में सूर्यवंशी और सैमसन दोनों को शामिल करने से बच सकते हैं। लाइनअप में नीतीश कुमार रेड्डी के निचले क्रम में रहने से टीम को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है, जिससे सैमसन को उनके पसंदीदा शुरुआती स्थान पर खिलाना अधिक व्यावहारिक विकल्प बन जाता है।
मध्यक्रम का संतुलन और ऑलराउंडरों की भूमिका
भारतीय मध्यक्रम पहले से ही कई स्थापित मैच विनर्स से भरा हुआ है। कप्तान श्रेयस अय्यर, उपकप्तान तिलक वर्मा, विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन, आक्रामक ऑलराउंडर शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी और अक्षर पटेल की मौजूदगी एकादश को जबरदस्त मजबूती प्रदान करती है। इतने भारी-भरकम मध्यक्रम के कारण किसी अतिरिक्त शीर्ष क्रम के बल्लेबाज को नीचे खिसकाकर खिलाना टीम संतुलन को बिगाड़ सकता है। इसी वजह से सूर्यवंशी और सैमसन में से किसी एक को ही बाहर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ेगा।
तेज गेंदबाजी का मोर्चा और अतिरिक्त विकल्प
टीम संयोजन में कोच गंभीर के लिए दूसरी चिंता तेज गेंदबाजी आक्रमण का अनुभवहीन होना है। इस विभाग का नेतृत्व अर्शदीप सिंह के अनुभवी कंधों पर रहेगा, लेकिन उनके सहयोगी के तौर पर मयंक यादव और प्रिंस यादव जैसे युवा नाम शामिल हैं। यदि प्रबंधन पिच के मिजाज को देखते हुए बल्लेबाजी को और अधिक गहराई देना चाहता है, तो प्रिंस यादव अथवा मयंक यादव के स्थान पर नमन धीर को एकादश में जगह दी जा सकती है।
स्पिन विभाग का दारोमदार और कप्तानी इम्तिहान
धीमी गति की गेंदबाजी का मुख्य जिम्मा कुलदीप यादव और अक्षर पटेल की स्थापित जोड़ी पर रहेगा। इसके अलावा कप्तान अय्यर के पास अभिषेक शर्मा की बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी का भी विकल्प मौजूद रहेगा, जिन्होंने एशियाई खेलों के दौरान अपनी गेंदबाजी से महत्वपूर्ण सफलताएं अर्जित की थीं। यह देखना दिलचस्प होगा कि कप्तान उनका इस्तेमाल एक विशेषज्ञ गेंदबाज के रूप में किस तरह करते हैं।
द्विपक्षीय मंच पर श्रेयस अय्यर की कप्तानी क्षमता की यह एक कड़ी परीक्षा साबित होगी। हालांकि उनकी अगुआई में भारत ने जिम्बाब्वे और अफगानिस्तान जैसी टीमों पर दबदबा बनाया है, लेकिन वेस्टइंडीज इस प्रारूप में बेहद खतरनाक प्रतिद्वंद्वी है। कैरेबियाई टीम ने 2012 और 2016 में दो बार टी20 विश्व कप जीतकर अपनी साख साबित की है। घरेलू परिस्थितियों के रिकॉर्ड भारत के पक्ष में मजबूती से खड़े हैं, जहां अपने घर में खेले गए पिछले दस टी20 मैचों में से नौ में भारत ने वेस्टइंडीज को मात दी है।



















