भारतीय क्रिकेट में युवा सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल की सफलता की कहानी अक्सर संघर्ष और प्रतिभा की मिसाल के तौर पर पेश की जाती है। हालांकि, उनके शुरुआती दिनों को संवारने में अहम भूमिका निभाने वाले बचपन के कोच ज्वाला सिंह की हालिया टिप्पणियों ने एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। एक पॉडकास्ट के दौरान ज्वाला सिंह ने अपने छात्र के रवैये, कामयाबी के श्रेय और भविष्य में टीम इंडिया के नेतृत्व के विकल्पों पर बेहद खुलकर अपनी बात रखी।
सफलता के श्रेय पर ज्वाला सिंह का नजरिया
जब बातचीत के दौरान ज्वाला सिंह से सीधा सवाल पूछा गया कि यशस्वी जायसवाल अपनी बड़ी कामयाबियों का श्रेय उन्हें क्यों नहीं देते या सार्वजनिक मंचों पर उनका नाम क्यों नहीं लेते, तो कोच ने बिना किसी लाग-लपेट के स्थिति साफ की। ज्वाला सिंह ने जोर देकर कहा कि उन्हें किसी से भी क्रेडिट या औपचारिक मान्यता की दरकार नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक गुरु के तौर पर उन्होंने क्या योगदान दिया है, यह बात वह खुद अच्छी तरह जानते हैं। किसी के बोलने या न बोलने से उनकी मेहनत और योगदान का सच नहीं बदल जाता।
विराट कोहली और राजकुमार शर्मा की तुलना
चर्चा के दौरान जब भारतीय क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली और उनके द्रोणाचार्य राजकुमार शर्मा के अटूट रिश्ते का हवाला दिया गया, तो ज्वाला सिंह ने एक दिलचस्प तुलना पेश की। आमतौर पर विराट कोहली अपनी हर छोटी-बड़ी उपलब्धि और करियर के अहम पड़ाव पर अपने कोच राजकुमार शर्मा के प्रति सार्वजनिक तौर पर गहरा आभार और आदर व्यक्त करते नजर आते हैं।
इस उदाहरण पर प्रतिक्रिया देते हुए ज्वाला सिंह ने कहा कि इस मामले में राजकुमार शर्मा बेहद भाग्यशाली रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपने शिष्य से लगातार ऐसा आदर और सम्मान मिला। उन्होंने कहा, “मैं किस्मत में बिलीव नहीं करता, लेकिन इस मामले में वो वाकई लकी हैं।” इस तुलना ने यह साफ संकेत दिया कि भारतीय क्रिकेट में हर प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपने शुरुआती मार्गदर्शकों के प्रति एक जैसा व्यवहार या आदर नहीं दिखाता।
यशस्वी जायसवाल के रवैये और फैसलों पर सलाह
बातचीत सिर्फ पुराने क्रेडिट तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें यशस्वी जायसवाल के फैसलों और बदलते मूड को लेकर भी चर्चा हुई। पॉडकास्ट में एंकर ने उन दौरों का जिक्र किया जब कभी उनके गोवा जाने की बातें सामने आईं तो कभी राजस्थान रॉयल्स की फ्रेंचाइजी छोड़ने की चर्चाएं चलीं। इन तमाम घटनाओं पर ज्वाला सिंह ने अपने पूर्व शिष्य को व्यावहारिक सीख दी।
ज्वाला सिंह ने कहा कि लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में टिके रहने के लिए केवल प्रतिभा ही काफी नहीं होती, बल्कि एक संतुलित व्यवहार भी जरूरी है। उन्होंने यशस्वी को अपने स्वभाव में बदलाव लाने की सलाह देते हुए कहा, “हर बार ऐसा एटीट्यूड नहीं चलता।” उनके कहने का सीधा अर्थ यह था कि अगर किसी खिलाड़ी को एक लंबा और स्थिर करियर बनाना है, तो मैदान के अंदर और बाहर दोनों जगह अपने आचरण में गंभीरता और निरंतरता लानी होगी।
रोहित शर्मा की जगह और वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा
भविष्य की योजनाओं और उत्तराधिकार के सवाल पर जब यह पूछा गया कि क्या यशस्वी जायसवाल आने वाले दिनों में रोहित शर्मा की जगह संभाल सकते हैं, तो ज्वाला सिंह का जवाब बेहद सीधा था। उन्होंने माना कि जब रोहित शर्मा संन्यास लेंगे, तब यशस्वी निश्चित तौर पर उनकी जगह लेने में सक्षम होंगे और उस स्थान के प्रबल दावेदार बनेंगे।
इसी बातचीत में ज्वाला सिंह ने उभरते हुए युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी का भी खास तौर पर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यशस्वी ने अपने खेल से बहुत कुछ हासिल किया है, लेकिन वैभव सूर्यवंशी इतनी कम उम्र में जिस स्तर का क्रिकेट खेल रहे हैं, वह वाकई अद्भुत है। ज्वाला के मुताबिक, इस उम्र में ऐसा क्रिकेट आमतौर पर बेहद असाधारण क्षमता वाले और तगड़े खिलाड़ी ही खेल पाते हैं। इस तरह उन्होंने एक तरफ जहां यशस्वी की काबिलियत और उनकी उपलब्धियों की सराहना की, वहीं दूसरी तरफ उन्हें अपनी सोच दुरुस्त करने की नसीहत भी दी।















