राजस्थान की राजधानी जयपुर से चिकित्सा व्यवस्था की पोल खोलने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां के प्रतिष्ठित सवाई मानसिंह अस्पताल में एक मरीज को इलाज कराना उस वक्त भारी पड़ गया, जब वार्ड के भीतर उसकी सुरक्षा खतरे में पड़ गई। सोमवार शाम को अस्पताल परिसर में अचानक भगदड़ सी मच गई, क्योंकि एक महिला मरीज के ऊपर चलता हुआ पंखा आ गिरा। इस दुर्घटना में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई और उसके सिर पर गहरी चोट के कारण 12 से अधिक टांके लगाने पड़े।
चरक भवन के ईएनटी वार्ड में हुआ हादसा
यह पूरी घटना सवाई मानसिंह अस्पताल के चरक भवन में स्थित ईएनटी वार्ड के भीतर घटी। वार्ड में संतोष नाम की महिला मरीज अपना उपचार कराने के लिए मौजूद थीं। वह बिस्तर पर थीं कि तभी छत पर लगा पंखा अचानक अपनी जगह से टूटकर सीधे उनके सिर पर आ गिरा। इस अचानक हुए हादसे से पूरे वार्ड में अफरा-तफरी मच गई और वहां मौजूद तीमारदारों व अन्य लोगों में हड़कंप मच गया। चलते पंखे की चपेट में आने से महिला बुरी तरह जख्मी हो गई।
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन पर उठे सवाल
हादसे के बाद घायल महिला को तुरंत राहत देने के बजाय कथित तौर पर करीब आधे घंटे की देरी के बाद ट्रॉमा अस्पताल पहुंचाया गया। इस देरी को लेकर भी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। ट्रॉमा सेंटर में महिला का इलाज किया गया, जहां डॉक्टरों ने उसके सिर पर आए गहरे जख्मों पर 12 से ज्यादा टांके लगाए। सवाई मानसिंह अस्पताल प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी चिकित्सा संस्थान है, जहां दूर-दूर से रोजाना हजारों की संख्या में मरीज अपना इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे प्रमुख अस्पताल के वार्ड के अंदर मरीज के सिर पर पंखा गिर जाना सीधे तौर पर बड़ी प्रशासनिक और रख-रखाव की लापरवाही को उजागर करता है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
इस पूरी दुर्घटना का एक वीडियो भी सामने आया है जो इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद आम जनता और मरीजों के परिजनों के बीच भारी रोष है और अस्पताल में आने वाले मरीजों की सुरक्षा व व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। चरक भवन के ईएनटी वार्ड में हुई इस घटना ने वहां आने वाले अन्य मरीजों और उनके तीमारदारों की चिंता को और बढ़ा दिया है। एक तरफ महिला स्वस्थ होने की उम्मीद लेकर अस्पताल आई थी, लेकिन बुनियादी व्यवस्थाओं की अनदेखी के चलते उसे खुद गंभीर हादसे का शिकार होना पड़ा।



















