सरकारी संस्थानों के कामकाज और कक्षाओं के अंदर मीडियाकर्मियों तथा बाहरी लोगों के प्रवेश पर पाबंदी लगाने वाले नियमों का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच गया है। राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों की ओर से जारी किए गए उन सर्कुलर्स को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, जिनमें स्कूलों के भीतर वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी और बाहरी विजिटर्स के जाने पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे। इस संबंध में वकील नरेंद्र मिश्रा की तरफ से शीर्ष अदालत में एक याचिका दाखिल की गई है, जिसमें मांग की गई है कि इन आदेशों को पूरी तरह से रद्द किया जाए।
संविधान के किन अनुच्छेदों का हवाला दिया गया
दाखिल की गई याचिका में केंद्र सरकार के साथ-साथ देश के सभी राज्यों को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि राज्य सरकारों की तरफ से उठाए गए ये कदम भारतीय संविधान के कई अहम प्रावधानों का सीधा उल्लंघन करते हैं। इनमें समानता का अधिकार यानी आर्टिकल 14, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता यानी आर्टिकल 19(1)(ए), कारोबार या पेशा चुनने की आजादी यानी आर्टिकल 19(1)(जी), जीवन का अधिकार यानी आर्टिकल 21, और शिक्षा का अधिकार यानी आर्टिकल 21-ए शामिल हैं। याचिका में कहा गया है कि इस तरह की रोक से लोकतांत्रिक व्यवस्था और पारदर्शिता पर असर पड़ता है।
किन-किन लोगों पर लगाई गई है पाबंदी
गौरतलब है कि इन विवादित सर्कुलर्स के माध्यम से सरकारी शिक्षण संस्थानों में बाहरी लोगों, पत्रकारों, यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों के प्रवेश पर शिकंजा कसा गया है। इसके अलावा स्कूलों के परिसरों में किसी भी प्रकार की फोटोग्राफी करने, वीडियो बनाने, छात्रों या शिक्षकों के इंटरव्यू लेने, ऑडियो रिकॉर्डिंग करने और लाइव-स्ट्रीमिंग करने पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है, जब तक कि इसके लिए विशेष प्रक्रिया का पालन न किया जाए।
राजस्थान सरकार के आदेश और गाइडलाइंस
बीते 16 अगस्त को राजस्थान शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के दाखिल होने को विनियमित करने के उद्देश्य से एक नई गाइडलाइन जारी की थी। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार के हस्ताक्षर से जारी इस निर्देश के मुताबिक, स्कूल परिसर के भीतर किसी भी प्रकार की फोटो खींचने, वीडियो शूट करने, बच्चों या स्टाफ से बातचीत करने या लाइव प्रसारण के लिए संस्थान के मुखिया या प्रिंसिपल से पहले मंजूरी लेना अनिवार्य किया गया था। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया था कि बिना पूर्व अनुमति के कोई भी बाहरी व्यक्ति स्कूल की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकेगा।
विजिटर रजिस्टर और कक्षाओं में प्रवेश के कड़े नियम
जारी किए गए निर्देशों के तहत स्कूलों में आने वाले हर बाहरी व्यक्ति के लिए आगंतुक रजिस्टर में अपनी पूरी जानकारी दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही यह प्रावधान भी जोड़ा गया है कि बाहरी लोगों को क्लासरूम, साइंस लैब्स, लाइब्रेरी, हॉस्टल, खेल के मैदान, वॉशरूम या अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में जाने की अनुमति तब तक नहीं होगी, जब तक कि उनके साथ स्कूल का कोई शिक्षक, प्रिंसिपल या कोई अन्य अधिकृत अधिकारी मौजूद न हो। इन सभी पाबंदियों और नियमों को अब अदालत में चुनौती दी गई है जिस पर आगे सुनवाई होगी।





















