पूर्वोत्तर भारत के शैक्षणिक परिदृश्य के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि सामने आई है, जहां यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी मेघालय के तीन शोधकर्ताओं ने दुनिया के अग्रणी वैज्ञानिकों की कतार में अपनी जगह पक्की की है। 2026 स्कॉलर्ली इंडेक्स रैंकिंग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, संस्थान के तीन संकाय सदस्यों को विश्व स्तर पर शीर्ष 1,000 विद्वानों की प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया गया है। यह अंतरराष्ट्रीय पहचान पूर्वोत्तर क्षेत्र की वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमताओं और वैश्विक शैक्षणिक मानचित्र पर उसकी उभरती उपस्थिति को रेखांकित करती है।
विशिष्ट अनुसंधानों में शीर्ष स्थान हासिल करने वाले वैज्ञानिक
इस रैंकिंग में विश्वविद्यालय के मोहित एल. देब ने सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन दर्ज किया। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 129वें स्थान पर रहे, जबकि भारत के भीतर उन्हें 15वां स्थान प्राप्त हुआ। उनका मुख्य अनुसंधान कार्य इंडोल डेरिवेटिव्स के संश्लेषण पर केंद्रित है, जो आधुनिक रासायनिक विज्ञान में एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय माना जाता है।
इसी क्रम में युगल किशोर मोहंता ने विश्व स्तर पर 398वीं रैंक हासिल की और राष्ट्रीय स्तर पर वह 45वें स्थान पर रहे। उनका अध्ययन नैनोकणों के संश्लेषण और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों से जुड़ा है। यह कार्यक्षेत्र नैनोबायोटेक्नोलॉजी और उससे संबंधित वैज्ञानिक शाखाओं में तेजी से प्रगति कर रहा है, जहां नए प्रयोगों की काफी संभावनाएं देखी जा रही हैं।
संस्थान के तीसरे शोधकर्ता गुलाम मोहिउद्दीन ने लिक्विड क्रिस्टल पर किए गए अपने वैज्ञानिक कार्य के आधार पर यह स्थान पाया। उन्हें वैश्विक स्तर पर 844वां स्थान और भारत में 89वां स्थान मिला है। उनके शोध ने उन्नत भौतिकी और सामग्री विज्ञान के अध्ययन में मूल्यवान योगदान दिया है।
विश्वविद्यालय की शैक्षणिक यात्रा और संस्थागत उपलब्धियां
विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार, यह रैंकिंग विभिन्न वैज्ञानिक विधाओं में शिक्षकों के निरंतर शोध और संस्थान की बढ़ती वैश्विक साख का सीधा प्रमाण है। वर्ष 2011 में स्थापित यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी मेघालय, पूर्वोत्तर का पहला ऐसा राज्य निजी विश्वविद्यालय है जो विशेष रूप से विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर केंद्रित है।
संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता का इतिहास भी उल्लेखनीय रहा है। इसने 2021 में अपने पहले नैक मूल्यांकन चक्र में 'ए' ग्रेड हासिल किया था। इसके अलावा, भारत सरकार के नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क में भी यह देश के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल रहा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि वैश्विक शीर्ष 1,000 में तीन संकाय सदस्यों का शामिल होना एक अपेक्षाकृत युवा संस्थान के लिए असाधारण मील का पत्थर है। यह उपलब्धि अनुसंधान, नवाचार और शैक्षणिक गुणवत्ता पर निरंतर ध्यान देने के साथ-साथ समावेशी विकास, शिक्षण और सामुदायिक जुड़ाव के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है। अधिकारियों का मानना है कि यह सफलता दर्शाती है कि पूर्वोत्तर के शैक्षणिक संस्थान विश्वस्तरीय शोध का उत्पादन करने और क्षेत्र के नवाचार तंत्र को मजबूती देने में पूरी तरह सक्षम हैं।





















