अजमेर स्थित पुष्कर का मेला केवल धार्मिक रीति-रिवाजों और आस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह राजस्थान की समृद्ध विरासत, कला और परंपराओं को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का एक अहम माध्यम भी बन चुका है। मेले में हर वर्ष आने वाले अनगिनत देशी-विदेशी सैलानियों के स्वागत के लिए नए और आकर्षक सांस्कृतिक पहलू जोड़े जाते हैं। इसी कड़ी में आगामी आयोजन के दौरान रेत की आकृतियों के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति और गौरवशाली इतिहास की झलक पेश की जाएगी। सैंड आर्टिस्ट अजय रावत इस विशेष प्रस्तुति के लिए पिछले एक साल से योजना और बुनियादी काम में लगे हुए हैं।
रेत पर जीवंत होंगे ऐतिहासिक नायक और लोक देवता
इस बार के मेले में मुख्य आकर्षण भगवान देवनारायण जी की एक बेहद विशाल रेत की कलाकृति होगी। इसके साथ ही राजस्थान के वीर योद्धाओं और पूज्य लोक नायकों की गाथाओं को भी रेत के माध्यम से उकेरा जाएगा। इनमें पाबूजी राठौड़, महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान जैसे पराक्रमी महापुरुषों की कलाकृतियां शामिल की जा रही हैं। इस पूरी पहल का मुख्य मकसद एक ही जगह पर राजस्थान के सांस्कृतिक ताने-बाने, ऐतिहासिक महत्व और धरोहर को एक साथ प्रस्तुत करना है, ताकि बाहर से आने वाले पर्यटक प्रदेश के मूल स्वरूप को करीब से समझ सकें।
समापन के तुरंत बाद शुरू होती है नए आयोजन की रूपरेखा
अपनी कला यात्रा को लेकर सैंड आर्टिस्ट अजय रावत का कहना है कि जब एक पुष्कर मेला समाप्त होता है, उसी समय से वे अगले साल के आयोजन की रूपरेखा बनाने में लग जाते हैं। पूरे वर्ष उनका यही प्रयास रहता है कि अगली बार अपनी रचनाओं को और अधिक निखारकर दर्शकों के सामने लाया जाए। उनका मुख्य ध्येय अधिक से अधिक कला प्रेमियों तक पहुंचना और उन्हें रेत शिल्प के जरिए राजस्थान की मिट्टी की खुशबू से परिचित कराना है। इसी रचनात्मक सोच के चलते वे हर बार कुछ अनूठा और अलग करने की योजना पर काम करते हैं।
साल भर की गहरी योजना के बाद तैयार होगा रेत उत्सव
रावत के अनुसार आगामी सैंड आर्ट उत्सव अपने पुराने सभी आयोजनों की तुलना में काफी अलग स्तर पर आयोजित किया जाएगा। हालांकि वर्तमान समय में आयोजन स्थल पर कोई बड़ा ढांचा या प्रत्यक्ष काम दिखाई नहीं दे रहा है, क्योंकि सारा ध्यान अभी डिजाइन की बारीकियों, तकनीकी नियोजन और बुनियादी रूपरेखा को अंतिम रूप देने पर केंद्रित है। पिछले पूरे एक साल से चल रही इस कागजी और व्यावहारिक तैयारी के आधार पर ही रेत पर इन विशाल आकृतियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
विशाल कृतियों के पिछले अनुभव से मिलेगा संबल
भगवान देवनारायण जी की विशाल रेत आकृति को इस पूरे महोत्सव का केंद्र बिंदु बनाया जाएगा। इससे पहले के मेले में तेजाजी महाराज की एक बहुत बड़ी सैंड आर्ट बनाई गई थी। उस दौरान मिले अनुभव और बड़े आकार की कलाकृति गढ़ने की चुनौतियों ने रावत को काफी आत्मविश्वास दिया। उसी पिछले अनुभव और तकनीकी महारत का पूरा उपयोग करते हुए इस बार भगवान देवनारायण जी की उससे भी ज्यादा भव्य और विस्तृत कृति रेत पर उभारी जाएगी।























