सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं के प्रति अनुचित या अमर्यादित टिप्पणियां करने वालों के लिए राजधानी दिल्ली की एक अदालत का फैसला बेहद कड़ा संदेश लेकर आया है. पश्चिमी दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में एक महिला के चरित्र पर सवाल खड़ी करने वाली फब्ती कसना एक व्यक्ति को भारी पड़ गया. अदालत ने आरोपी की इस हरकत को महिला की गरिमा और लज्जा को ठेस पहुंचाने वाला अपराध मानते हुए उसे दोषी करार दिया और जेल की सजा सुनाई. न्यायिक व्यवस्था ने साफ कर दिया कि जुबान से बिना सोचे-समझे बोले गए ऐसे शब्दों को केवल अनजानी बातचीत कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
सड़क पर रोती बच्ची को चुप कराते वक्त हुई थी घटना
यह पूरा मामला 23 मार्च 2021 का है. पश्चिम विहार की रहने वाली प्रियंका गुप्ता उस दिन अपनी तीन साल की मासूम बेटी के साथ भारतीय रिजर्व बैंक एन्क्लेव के गेट के पास मौजूद थीं. उस दौरान छोटी बच्ची लगातार रो रही थी और मां उसे संभालने व चुप कराने की पूरी कोशिश कर रही थीं. बच्ची को शांत करने के लिए प्रियंका ने उससे कहा कि देखो पापा आ गए, अब रोना बंद करो और चुप हो जाओ. ठीक उसी समय गेट के पास कपड़े प्रेस करने का ठेला लगाने वाला गिरधारी लाल वहां मौजूद था. उसने महिला की बात सुनते ही अचानक से तंज कसते हुए कहा, कौन से वाले पापा आ गए.
परिजनों के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुई थी प्राथमिकी
अचानक हुई इस अपमानजनक टिप्पणी पर उस समय प्रियंका ने सीधे तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. कुछ ही पलों में बच्ची के पिता अपनी गाड़ी लेकर वहां पहुंचे और दोनों को कार में बैठाकर घर ले गए. घर पहुंचने के बाद महिला ने पूरी आपबीती अपने ससुर को विस्तार से बताई. मामले की गंभीरता और महिला के सम्मान को देखते हुए ससुर ने तुरंत नजदीकी पुलिस थाने में इस घटना की जानकारी दी. पुलिस ने शिकायत के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरधारी लाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी.
अदालत में आरोपी के बहानों को जज ने किया खारिज
न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान जज मोक्षा बेन्स ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं. पूछताछ के दौरान गिरधारी लाल ने अपने बचाव में तर्क दिया कि उसका कोई गलत इरादा नहीं था और उसने बिना किसी बुरी नीयत के बस ऐसे ही यह बात कह दी थी. हालांकि अदालत ने आरोपी की इस दलील को पूरी तरह से खोखला बताते हुए सिरे से ठुकरा दिया. न्यायाधीश ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि ऐसा कोई आधार या स्थिति मौजूद नहीं थी जिससे इस बात को एक मासूम या सामान्य सवाल माना जा सके. किसी महिला से यह कहना कि कौन से वाले पापा आ गए, सीधे तौर पर यह इशारा करता है कि उसके कई पुरुष मित्र हैं या बच्चे के असली पिता को लेकर संदेह पैदा किया जा रहा है. अदालत ने स्पष्ट किया कि यह महिला के चरित्र पर लांछन लगाने जैसा गंभीर कृत्य है.



















