राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को रफ्तार देने और निवेशकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया गया है। बिहार में अपनी विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने वाले उद्यमियों को अब अपने तैयार उत्पादों के लिए सरकारी स्तर पर सीधा बाजार मिलेगा। राज्य में लगने वाले कारखानों के तय मानकों वाले उत्पादों में से पच्चीस प्रतिशत हिस्सा सीधे राज्य सरकार खरीदेगी। इसके लिए सरकार अपनी मौजूदा खरीद नियमावली में आवश्यक संशोधन करने जा रही है, ताकि नई औद्योगिक इकाइयों को शुरुआती दौर में ही तैयार और सुरक्षित बाजार मिल सके।
पटना में हुआ राइजिंग बिहार इन्वेस्टर समिट-2026 का आगाज
राजधानी पटना में 'राइजिंग बिहार इन्वेस्टर समिट-2026' के उद्घाटन सत्र के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में इस पहल की घोषणा की। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए यह भरोसा दिलाया गया कि राज्य प्रशासन उद्यमियों को हर जरूरी सुविधा, प्रशासनिक सहयोग और पारदर्शी माहौल उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकारी खरीद नीति में किए जा रहे बदलावों का मुख्य मकसद स्थानीय विनिर्माण को व्यावहारिक प्रोत्साहन देना और नए निवेशकों के जोखिम को कम करना है।
पर्यटन और ईको-टूरिज्म के विस्तार पर जोर
औद्योगिक निवेश के अलावा आतिथ्य सत्कार और पर्यटन क्षेत्र में भी पूंजी निवेश की असीम संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। राजधानी पटना और ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व वाले गया सहित विभिन्न प्रमुख स्थलों पर नए होटलों, रिसॉर्ट्स और ईको-टूरिज्म से जुड़ी परियोजनाओं को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि पर्यटन क्षेत्र का विकास तेजी से स्थानीय आजीविका और रोजगार पैदा करने का सबसे सशक्त जरिया बन सकता है। औद्योगिक विस्तार के लिए निर्बाध बिजली, सुगम सड़कें, जलापूर्ति और मजबूत लॉजिस्टिक्स का ताना-बाना तेजी से तैयार किया जा रहा है।
विशाल आबादी को आर्थिक ताकत में बदलने का लक्ष्य
बिहार की लगभग 14 करोड़ की आबादी को अब कमजोरी के बजाय देश के एक विशाल और जीवंत उपभोक्ता बाजार के रूप में रेखांकित किया जा रहा है। इतनी बड़ी आबादी हर प्रकार के उपभोक्ता सामान, विनिर्माण उत्पादों और सेवाओं के लिए एक स्वाभाविक मांग पैदा करती है। सरकार का प्रमुख उद्देश्य बड़े पैमाने पर नए कारखाने और उद्यम लगवाकर स्थानीय स्तर पर आजीविका सुनिश्चित करना है, ताकि रोजी-रोटी की तलाश में बिहार के युवाओं को दूसरे राज्यों में पलायन करने के लिए विवश न होना पड़े। स्थानीय संसाधनों और श्रमशक्ति का उपयोग राज्य की तरक्की में करने की समग्र योजना पर काम जारी है।
बिजली की आपूर्ति 500 मेगावाट से बढ़कर 10,000 मेगावाट पार
औद्योगिक इकाइयों के सफल संचालन के लिए चौबीसों घंटे विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सबसे बुनियादी शर्त होती है। साल 2005 के दौरान बिहार में बिजली की कुल उपलब्धता महज 500 मेगावाट के आसपास सिमटी हुई थी, जो वर्तमान में बढ़कर 10,000 मेगावाट के स्तर को पार कर चुकी है। बिजली के क्षेत्र में इस क्रांतिकारी विस्तार के बाद अब अगला बड़ा लक्ष्य तय किया गया है। आने वाले पांच वर्षों के भीतर राज्य में बिजली की उपलब्धता को दोगुना करते हुए 20,000 मेगावाट तक पहुंचाने की योजना पर काम चल रहा है, जिससे भविष्य के भारी उद्योगों की मांग को भी आसानी से पूरा किया जा सके।
सड़क नेटवर्क 8,000 से बढ़कर 1.5 लाख किलोमीटर पहुंचा
बीते वर्षों में बिहार के भीतर आवागमन और माल ढुलाई के बुनियादी ढांचे में युगांतरकारी बदलाव दर्ज किया गया है। पहले जहां समूचे राज्य में केवल 8,000 किलोमीटर सड़कों का सीमित नेटवर्क मौजूद था, वहीं अब यह विस्तार पाकर लगभग 1.5 लाख किलोमीटर तक पहुंच चुका है। ग्रामीण इलाकों को पक्की बारहमासी सड़कों से जोड़ने के साथ-साथ कई नए राष्ट्रीय राजमार्गों और आधुनिक एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य भी तेजी से प्रगति पर है। कनेक्टिविटी को बहुआयामी बनाने के लिए जलमार्ग और रोपवे परियोजनाओं पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इसी क्रम में पटना से पवित्र गंगा नदी के ऊपर से गुजरते हुए सोनपुर स्थित बाबा हरिहरनाथ मंदिर तक एक महत्वाकांक्षी रोपवे परियोजना शुरू करने की पहल की जा रही है।
बाढ़ प्रबंधन के लिए व्यापक दीर्घकालिक योजना की जरूरत
राज्य के आर्थिक विकास के रास्ते में आने वाली सबसे बड़ी प्राकृतिक चुनौतियों में से एक नियमित बाढ़ की त्रासदी है। पड़ोसी देश नेपाल और आसपास के राज्यों से आने वाले भारी जलप्रवाह के चलते बिहार को प्रतिवर्ष गंभीर जलभराव और तबाही का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए गंगा, कोसी और गंडक जैसी प्रमुख नदियों के वैज्ञानिक जल प्रबंधन हेतु एक व्यापक और दूरगामी योजना तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है, ताकि औद्योगिक संपत्तियों और कृषि भूमि को सुरक्षित रखा जा सके।
















