मूलांक 5 राशिफल 16 सितंबर 2026: जल्दबाजी में वादों से बचें, हो सकता है नुकसानमूलांक 7 राशिफल 16 सितंबर 2026: रिश्तों में संवाद की कमी और कार्यस्थल पर डेडलाइन का दबावयूनिफॉर्म सिविल कोड पर 2029 का बड़ा दांव, अमित शाह के ऐलान से कैसे घिर गए अखिलेश और असदुद्दीन ओवैसीराजस्थान के बाड़मेर में राशन कार्ड में बड़ा फर्जीवाड़ा, 438 परिवारों ने हड़पा गरीबों का हकओपनएआई का नया मॉडल जीपीटी-6 सोल चर्चा में, रोजमर्रा के कामों के लिए हो सकता है तैयारपितृ पक्ष 2026: जानिए भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होने वाले 16 दिनों के श्राद्ध के जरूरी नियम और तर्पण की सही विधिसर्दियों में भी गेंदे के पौधे से पाना चाहते हैं भरपूर फूल, तो अपनाएं यह आसान गार्डनिंग टिप्सबिज़नेस आइडिया: नौकरी या बड़ी दुकान की नहीं है जरूरत, सिर्फ दो-चार पशुओं से शुरू करें ग्रामीण डेयरी का कामसीमा पाहुजा संभालेंगी दिशा सालियान मौत मामले की कमान, सीबीआई ने दर्ज की एफआईआरजीबीपी/जेपीवाई 209 के ऊपर उबरा, ओवरसोल्ड दबाव कम होने से 213.22 का प्रतिरोध अहम
पितृ पक्ष 2026: जानिए भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होने वाले 16 दिनों के श्राद्ध के जरूरी नियम और तर्पण की सही विधिउत्तराखंड
16 सित॰ 2026, 7:02 am (30 मिनट पहले)· 0

पितृ पक्ष 2026: जानिए भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होने वाले 16 दिनों के श्राद्ध के जरूरी नियम और तर्पण की सही विधि

हिन्दू धर्म में पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए समर्पित पितृ पक्ष की शुरुआत भाद्रपद पूर्णिमा से होती है। इस 16 दिवसीय पवित्र अवधि में पिंडदान, तर्पण और ब्राह्मण भोजन कराने के साथ गाय, कुत्ते और कौए के लिए भोजन का अंश निकालने का विशेष विधान है।

सनातन परंपरा में पूर्वजों के प्रति आभार प्रकट करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की अवधि को बेहद खास माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो लोग इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं, उनकी आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण जैसे अनुष्ठान करने से घर-परिवार में खुशहाली बनी रहती है और किसी भी तरह के पितृ दोष से राहत मिलती है। यह पूरा दौर कुल 16 दिनों तक चलता है और इसकी शुरुआत पूर्णिमा तिथि से होने का नियम तय किया गया है। धार्मिक ग्रंथों में ऐसा उल्लेख मिलता है कि इन विशेष दिनों में पूर्वज अपनी लोक से उतरकर पृथ्वी पर आते हैं और परिजनों द्वारा किए जाने वाले श्रद्धा कर्म को स्वीकार कर उन्हें सुरक्षित जीवन का आशीर्वाद देते हैं।

भाद्रपद पूर्णिमा से होती है शुरुआत

शुरुआती तिथियों और इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए पंडित श्रीधर शास्त्री ने लोकल 18 को बताया कि अक्सर लोगों के मन में यह गलतफहमी रहती है कि इन अनुष्ठानों का आरंभ आश्विन महीने से होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुल 16 दिनों की यह अवधि वास्तव में भाद्रपद की पूर्णिमा तिथि से ही प्रारंभ हो जाती है। आश्विन कृष्ण पक्ष की पहली तिथि यानी प्रतिपदा से लेकर सर्वपितृ अमावस्या तक कुल 15 दिन श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। पंचांग के गणित के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा के दिन उन्हीं पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है जिनका निधन किसी भी महीने की पूर्णिमा तिथि को हुआ हो। इसके अलावा शास्त्रों में यह नियम भी बताया गया है कि पूर्णिमा के दिन ननिहाल पक्ष यानी नाना-नानी के पितरों के निमित्त भी तर्पण और श्रद्धा कर्म किए जा सकते हैं।

ये भी पढ़ें

जीव-जंतुओं के लिए भोजन का अंश

अनुष्ठानों और नियमों के बारे में आगे बताते हुए ज्योतिषी ने कहा कि पूर्वजों को तृप्त करने के लिए बलि कर्म का बहुत अधिक महत्व माना गया है। जब भी घर में भोजन तैयार किया जाता है, तो सबसे पहले गाय, कुत्ते और कौए के लिए एक निश्चित हिस्सा अलग निकाला जाता है जिसे ग्रास कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इन जीवों के माध्यम से ही अर्पित किया गया भोजन सीधे पूर्वजों तक पहुंच जाता है।

श्राद्ध भोज में खीर की अनिवार्यता

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पूर्वजों के लिए बनने वाले भोजन में दूध, घी और मुख्य रूप से चावल की खीर का होना बहुत जरूरी माना गया है। सात्विक और सफेद रंग की मिठाइयां पूर्वजों को सबसे ज्यादा पसंद आती हैं। पूरी विधि-विधान के साथ ब्राह्मणों को भोजन कराना, इसके अलावा कुशा और काले तिलों के साथ दी जाने वाली तिलांजलि घर के सभी पितृ दोषों को शांत करती है। पूर्णिमा से शुरू होकर अमावस्या पर समाप्त होने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान से पूर्वज प्रसन्न होकर अपने परिजनों को सुख, समृद्धि और लंबी उम्र का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

सवाल-जवाब

पितृ पक्ष की शुरुआत कब से होती है?
पितृ पक्ष की विधिवत शुरुआत भाद्रपद पूर्णिमा से होती है और यह सर्वपितृ अमावस्या तक कुल 16 दिनों तक चलता है।
भाद्रपद पूर्णिमा का श्राद्ध किसके लिए किया जाता है?
यह श्राद्ध केवल उन्हीं पूर्वजों के लिए किया जाता है जिनका निधन किसी भी महीने की पूर्णिमा तिथि को हुआ हो।
श्राद्ध के भोजन में सबसे महत्वपूर्ण क्या माना गया है?
श्राद्ध के भोजन में दूध, घी और विशेष रूप से चावल की खीर का होना अनिवार्य माना गया है।
किन जीवों के लिए सबसे पहले भोजन निकाला जाता है?
भोजन तैयार होने पर सबसे पहले गाय, कुत्ता और कौए के लिए अंश निकाला जाता है जिसे ग्रास कहा जाता है।
पूर्णिमा तिथि पर किसका श्राद्ध किया जा सकता है?
इस तिथि पर नाना-नानी यानी मातृकुल के पितरों का भी श्राद्ध और तर्पण श्रद्धा के साथ किया जा सकता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR