राजस्थान के बाड़मेर जिले से गरीबों के हिस्से के राशन में बड़े पैमाने पर धांधली करने का मामला प्रकाश में आया है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत संचालित इस प्रक्रिया में कई लोग अपात्र होने के बावजूद सरकारी मदद का अनुचित लाभ उठा रहे थे। प्रशासन की ओर से की गई गहन जांच के दौरान ऐसे चार सौ अड़तीस परिवारों की पहचान की गई है, जिन्होंने अपनी श्रेणी में अनुचित बदलाव करवाकर अंत्योदय योजना के तहत मिलने वाले खाद्यान्न का लाभ ले लिया। यह योजना समाज के अत्यंत गरीब और जरूरतमंद तबके के लिए बनाई गई है, लेकिन कुछ सक्षम लोगों ने इसमें सेंध लगा दी है।
जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
जिला रसद विभाग ने जब अंत्योदय कार्ड धारकों के रिकॉर्ड की विस्तृत समीक्षा शुरू की, तो इस पूरे फर्जीवाड़े की परतें उधड़ गईं। विभाग का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को चिन्हित करना था जो नियमों के विरुद्ध जाकर सरकारी राशन ले रहे थे। जब जांच के अंतिम आंकड़े सामने आए, तो अधिकारियों के भी होश उड़ गए। पूरे जिले में चार सौ अड़तीस परिवार ऐसे मिले जिन्होंने अपनी श्रेणी में फेरबदल करवाकर अंत्योदय श्रेणी के तहत मिलने वाला गेहूं प्राप्त किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रसद विभाग ने तत्काल प्रभाव से सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा फागलिया और सेड़वा में
रसद विभाग द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार, इस अनियमितता का सबसे बड़ा केंद्र फागलिया ब्लॉक सामने आया है, जहां सबसे अधिक एक सौ तेरह परिवारों ने गरीबों के कोटे का राशन उठाया है। इसके अलावा सेड़वा ब्लॉक में सतहत्तर और चौहटन में बहत्तर परिवार इस जांच के दायरे में आ चुके हैं। अन्य क्षेत्रों की बात करें तो आडेल में बावन, बाड़मेर शहर में बाईस, बाड़मेर ग्रामीण में बारह, बायतु में पंद्रह, धोरीमन्ना में छह, गडरारोड़ में पंद्रह, रामसर में अठारह और शिव ब्लॉक में सत्रह परिवारों द्वारा अंत्योदय योजना के माध्यम से गलत तरीके से गेहूं लेने के मामले दर्ज किए गए हैं।
सात दिन का अल्टीमेटम और कानूनी कार्रवाई
इस बड़े पैमाने पर हुए खेल का पर्दाफाश होने के बाद जिला प्रशासन और रसद विभाग पूरी तरह से सतर्क हो चुके हैं। बाड़मेर के जिला रसद अधिकारी अश्विनी गुर्जर ने बताया कि चिन्हित किए गए सभी चार सौ अड़तीस परिवारों को आधिकारिक तौर पर नोटिस भेज दिए गए हैं। इन सभी को अगले सात दिनों के भीतर अपने वैध और सही दस्तावेज पेश करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। यदि तय समयसीमा के भीतर ये परिवार अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने में असफल रहते हैं या जांच के दौरान कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो इनके खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज की जाएगी।
बकाया गेहूं की कीमत बत्तीस रुपये प्रति किलो की दर से होगी वसूली
अपात्र लोगों के खिलाफ केवल कानूनी कार्रवाई तक ही मामला सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनसे अब तक हड़पे गए कुल गेहूं की बाजार कीमत भी वसूली जाएगी। जिला रसद अधिकारी अश्विनी गुर्जर ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने धोखाधड़ी करके खाद्यान्न प्राप्त किया है, उनसे बत्तीस रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से रिकवरी की जाएगी। गरीबों के हक पर डाका डालने वालों के खिलाफ प्रशासन के इस कड़े रुख से पूरे जिले में हड़कंप मच गया है। सरकार ने यह साफ कर दिया है कि सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग करने वालों को किसी भी दशा में माफ नहीं किया जाएगा।
गरीबों का निवाला छीनना गंभीर अपराध
सरकारी जनकल्याणकारी योजनाएं उन लोगों के उत्थान के लिए तैयार की जाती हैं जो आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर स्थिति में जीवनयापन कर रहे हैं। अंत्योदय योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे परिवारों को भुखमरी के संकट से बाहर निकालना है जो दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने में भी असमर्थ रहते हैं। ऐसी स्थिति में सक्षम या अपात्र लोगों द्वारा इन योजनाओं का लाभ उठाना कानूनी रूप से अपराध होने के साथ-साथ एक बड़ा नैतिक गुनाह भी है। रसद विभाग की यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब गरीबों का हक मारने वालों पर शिकंजा कसना शुरू हो चुका है।


















