सर्दियों के मौसम में घर की बालकनी, छत, आंगन या गार्डन की खूबसूरती बढ़ाने के लिए गेंदे के फूलों का कोई मुकाबला नहीं है। पीले और नारंगी रंग के ये खूबसूरत फूल न केवल पूजा-पाठ और त्योहारों के दौरान बहुत काम आते हैं, बल्कि घर की सजावट में भी चार चांद लगा देते हैं। हालांकि मानसून और अन्य मौसमों में इनकी देखभाल थोड़ी चुनौतीपूर्ण हो सकती है, लेकिन थोड़ी सी सावधानी बरतकर गेंदे के पौधे से लंबे समय तक बेहतरीन फ्लावरिंग हासिल की जा सकती है।
गमले का चुनाव और सही समय
पलामू के किसान तारकेश्वर सिंह चेरो के अनुसार, गेंदे के पौधे की शानदार ग्रोथ के लिए सबसे पहले सही मौसम और सही आकार के गमले का चयन करना अत्यंत आवश्यक है। सामान्य तौर पर अक्टूबर से नवंबर और फरवरी से मार्च का समय गेंदे की बुवाई के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है, हालांकि स्थानीय जलवायु परिस्थितियों के अनुसार इसमें थोड़ा फेरबदल भी हो सकता है। सामान्य पौधों के लिए आठ से दस इंच का गमला पूरी तरह पर्याप्त रहता है, जबकि बड़े आकार के पौधों के वास्ते बारह से चौदह इंच के गमले का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि गमले की तली में पानी की निकासी के लिए उचित छेद अवश्य बने हों ताकि जलभराव न हो सके।
बीज से पौधे तैयार करने की प्रक्रिया
घर पर ही बीज के जरिए गेंदे का नया पौधा तैयार करना बेहद आसान और सरल प्रक्रिया है। इसके लिए हल्की और भुरभुरी मिट्टी का उपयोग किया जाना चाहिए जिसमें बीज बोने के बाद उसके ऊपर मिट्टी की बहुत ही पतली परत बिछाई जाती है। इसके पश्चात पानी का हल्का छिड़काव या स्प्रे किया जाता है। आमतौर पर चार से दस दिनों के भीतर बीजों से अंकुर फूट बाहर आते हैं। जब यह नया पौधा लगभग चार से छह इंच की ऊंचाई तक बढ़ जाता है, तब इसे निकालकर बड़े गमले में आसानी से रोपित किया जा सकता है।
सर्दियों में धूप और पानी का प्रबंधन
जब सर्दियां शुरू होती हैं तो कई बार गेंदे के पौधों में फूलों का उत्पादन कम होने लगता है और ग्रोथ धीमी पड़ जाती है। इस समस्या से निपटने के लिए सबसे पहले पौधे को ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहां उसे प्रचुर मात्रा में धूप मिल सके। प्रतिदिन लगभग छह से आठ घंटे की धूप मिलने से पौधों में फूलों की संख्या में तेजी से इजाफा होता है। पानी देते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि जब गमले की मिट्टी की ऊपरी परत पूरी तरह सूख जाए, तभी उसमें पानी डालें। आवश्यकता से अधिक पानी देने पर पौधे की जड़ें सड़ सकती हैं और उन्हें भारी नुकसान पहुंच सकता है।
डेड हेडिंग और पोषण का महत्व
पौधों में ज्यादा से ज्यादा फूल खिलाने के लिए एक और बेहद असरदार तरीका यह है कि पौधे पर मौजूद मुरझाए और सूखे फूलों को समय-समय पर तोड़कर हटाते रहें। बागवानी की भाषा में इस प्रक्रिया को डेड हेडिंग कहा जाता है, जिसके जरिए पौधे की ऊर्जा बर्बाद होने से बचती है और वह ऊर्जा नई कलियों तथा शाखाओं के विकास में पूरी तरह लगती है। इसके साथ ही हर पंद्रह से बीस दिन के अंतराल पर पौधे को वर्मी कंपोस्ट या अन्य जैविक खाद दी जानी चाहिए। फूलों के बेहतरीन विकास और उत्पादन के लिए पोटाश से युक्त खाद भी बेहद उपयोगी साबित होती है।
नियमित गुड़ाई और देखभाल की चार अहम बातें
इन तमाम उपायों के अलावा यह भी जरूरी है कि समय-समय पर गमले की मिट्टी की हल्की गुड़ाई की जाती रहे और पौधे पर जमी सूखी पत्तियों को साफ किया जाए। संतुलित मात्रा में पानी देना, पौधे को पर्याप्त धूप मिलना, मिट्टी में जल निकासी की उत्तम व्यवस्था होना और नियमित रूप से सही खाद का इस्तेमाल करना, ये वे चार बुनियादी बातें हैं जिन पर यदि ठीक से ध्यान दिया जाए तो कड़ाके की ठंड और सर्दियों के मौसम में भी गेंदे का पौधा बंपर फ्लावरिंग दे सकता है और आपका पूरा गमला पीले व नारंगी फूलों से जगमगा उठेगा।



















