वाइट हाउस वार्ता: यूक्रेन में पैट्रियट मिसाइल उत्पादन लाइसेंस के लिए वॉशिंगटन पहुंचे जेलेंस्की, ट्रंप से करेंगे अहम बैठकचीन में 90 साल की महिला 20 वर्ष तक जिंदा हैंड ग्रेनेड से तोड़ती रही अखरोट, मजदूर ने देख पुलिस को दी सूचनाअसिस्टेंट डायरेक्टर की बिन इजाजत वैनिटी में एंट्री पर काजल अग्रवाल ने बयां की अपनी आपबीतीकर्क राशि में गुरु का गोचर: 31 अक्टूबर तक मेष, कर्क, कन्या और वृश्चिक राशि वालों की चमकेगी किस्मतजातिगत आरक्षण पर वायरल फर्जी बयान से नाराज हुईं शिल्पा शेट्टी, सोशल मीडिया पर जताई सख्त आपत्तिबेलेघाटा से तृणमूल कांग्रेस नेता राजू नस्कर पुलिस कस्टडी में, रंगदारी और धमकी के आरोपों पर बड़ा एक्शनत्वचा को चमकदार और टाइट बनाने के लिए घर पर तैयार करें चावल के मांड की नेचुरल कोलेजन क्रीम, जानें आसान तरीकाशादियों की विदाई में आज भी छाया रहता है 1989 का क्लासिक ट्रैक, 37 सालों से कायम है पद्मिनी कोल्हापुरे और मिथुन चक्रवर्ती के इस इमोशनल गाने की जगहलोकसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर चर्चा, शशि थरूर ने रखी अपनी बातरसोई की चुभती बीप का इलाज: स्टारलिंग के जोएल कोरेलिट्ज़ और कोलिन कूगन ने C++ कोड से सुधारी माइक्रोवेव की आवाज़
966 ईस्वी से 1857 की क्रांति तक: अमेठी की कोहरा रियासत की वो कहानी जो आज भी पत्थरों पर दर्ज हैकल्चर
24 जून 2026, 10:54 pm (34 दिन पहले)· 3

966 ईस्वी से 1857 की क्रांति तक: अमेठी की कोहरा रियासत की वो कहानी जो आज भी पत्थरों पर दर्ज है

अमेठी की कोहरा रियासत सिर्फ राजपाठ की दास्तान नहीं, बल्कि शौर्य, त्याग और आजादी की लड़ाई का जीवंत दस्तावेज है, जिसकी जड़ें मध्य प्रदेश के नरवरगढ़ तक जाती हैं।

अमेठी की धरती ने देश को कई अनमोल नाम और गौरवगाथाएं दी हैं, और इन्हीं में से एक है कोहरा रियासत। इसका इतिहास महज एक राजघराने के उठने और राज करने की कहानी भर नहीं है। यह भारतीय संस्कृति की नींव, वीरता, बलिदान और विदेशी हुकूमत के खिलाफ धधकी आजादी की आग का एक ऐसा दस्तावेज है जो आज भी जिंदा है। सन 1636 में गंगा दशहरा के पावन पर्व पर इस रियासत की स्थापना हुई थी, और इसका इतिहास जितना पुराना है, उतना ही रोचक और नई पीढ़ी के भीतर देशभक्ति जगाने वाला भी।

नरवरगढ़ से अमेठी तक: कहां से शुरू हुईं जड़ें

कोहरा रियासत की जड़ें मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक नरवरगढ़ से जुड़ती हैं। नरवरगढ़ के राजकुमार सोढ़ देव (966 से 1006) ने 966 ईस्वी में अमेठी राज्य की नींव रखी थी। इसी राजवंश की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अमेठी के राजा विक्रम साह (1599 से 1636) के छोटे बेटे राजकुमार हिम्मत साह ने ज्येष्ठ मास के गंगा दशहरा के शुभ अवसर पर सन 1636 ईस्वी में कोहरा रियासत की स्थापना की। उनका यह योगदान आज भी पत्थरों पर ऐतिहासिक धरोहर के रूप में दर्ज है।

ये भी पढ़ें

चतुर्भुज धाम और कोहरा किले की नींव

बाबू हिम्मत साह ने इस इलाके में सबसे पहले भगवान विष्णु का एक भव्य मंदिर बनवाया, जो आज भी "चतुर्भुज धाम" के नाम से जाना जाता है। इसी मंदिर की स्थापना के बाद उन्होंने कोहरा किले का निर्माण कराया, जहां उनका राज्याभिषेक हुआ और वे कोहरा के पहले शासक बने। इस मंदिर की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि आगे चलकर यहीं पर रियासत के सभी तालुकदार आजादी की लड़ाई की रणनीति तय करते थे।

1857 की क्रांति और बाबू भूप सिंह का शौर्य

ब्रिटिश हुकूमत के दौर में कोहरा रियासत आजादी के मतवालों का एक बड़ा केंद्र बन गई। सन 1857 के पहले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में कोहरा के तत्कालीन शासक बाबू भूप सिंह क्रांति के महानायक बनकर सामने आए। उन्होंने अवध के स्वतंत्रता संग्राम में अग्रिम भूमिका निभाई और लखनऊ रेजीडेंसी के ऐतिहासिक घेराव में अपनी सेना के साथ शामिल हुए। सुल्तानपुर जिले के चांदा और कादूनाला के युद्धों में बाबू भूप सिंह ने अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए।

अंग्रेजों का दमन और किले का विध्वंस

बाबू भूप सिंह के इस अदम्य साहस से बौखलाकर ब्रिटिश सरकार ने रियासत पर कई तरह के अत्याचार किए। भारी-भरकम कर थोपे गए और दमनकारी नीतियों के जरिए इलाके की जनता का आर्थिक शोषण और दमन करने की कोशिश हुई। अंग्रेजी सैनिकों की एक टुकड़ी कोहरा भेजी गई, जिसने भारी मात्रा में हथियार जब्त किए और कोहरा के ऐतिहासिक किले को ध्वस्त करने का क्रूर आदेश दे दिया। आज भी उस भव्य किले के अवशेष बांसों के झुरमुटों के बीच अपने गौरवशाली अतीत की गवाही देते हैं। बाद में बाबू भूप सिंह के वंशजों ने एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसके बाद कोहरा रियासत को ब्रिटिश नियंत्रण से मुक्ति मिली और उसके अधिकार वापस मिल गए।

रियासत के शासक और आज की बागडोर

इस रियासत पर कई रसूखदार तालुकदारों ने राज किया। इन्हीं में से एक थे बाबू उमानाथ सिंह। बाबू शिव बहादुर सिंह के बाद उनके भाई बाबू उमानाथ सिंह (1993 से 2017) कोहरा के अगले प्रमुख बने। वे अवध विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर और 'उत्तर प्रदेश इतिहास कांग्रेस' के संस्थापक सदस्य रहे। उन्होंने शिक्षा और इतिहास संकलन के क्षेत्र में अहम योगदान दिया और रियासत की देखरेख की।

बाबू हिम्मत साह की इसी गौरवशाली वंश परंपरा में 1857 की क्रांति के नायक बाबू भूप सिंह का जन्म हुआ था। समय के साथ कई शासकों ने कोहरा स्टेट की कमान संभाली, जिनमें कुंवर हिम्मत सिंह, बाबू भूप सिंह, बाबू शिव दयाल सिंह, बाबू देवी दयाल सिंह, बाबू महावीर सिंह, बाबू बेनी बहादुर सिंह, बाबू प्रताप बहादुर सिंह, बाबू शिव बहादुर सिंह, बाबू उमानाथ सिंह और बाबू संजय सिंह जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। वर्तमान में इस रियासत की बागडोर बाबू राघवेंद्र प्रताप सिंह (अभय सिंह) संभाल रहे हैं। कोहरा का राजभवन आज भी अपने इतिहास को पत्थरों पर गौरवशाली रूप में दर्ज किए हुए है और इस अमर परंपरा को जिंदा रखे हुए है।

सवाल-जवाब

कोहरा रियासत की स्थापना कब और किसने की?
अमेठी के राजा विक्रम साह के छोटे बेटे राजकुमार हिम्मत साह ने सन 1636 ईस्वी में गंगा दशहरा के पावन अवसर पर कोहरा रियासत की स्थापना की थी।
1857 की क्रांति में कोहरा का क्या योगदान था?
कोहरा के तत्कालीन शासक बाबू भूप सिंह ने अवध के स्वतंत्रता संग्राम में अग्रिम भूमिका निभाई, लखनऊ रेजीडेंसी के घेराव में हिस्सा लिया और सुल्तानपुर के चांदा व कादूनाला के युद्धों में अंग्रेजों को हराया।
कोहरा रियासत की जड़ें कहां से जुड़ती हैं?
इसकी जड़ें मध्य प्रदेश के नरवरगढ़ से जुड़ती हैं, जहां के राजकुमार सोढ़ देव ने 966 ईस्वी में अमेठी राज्य की नींव रखी थी।
चतुर्भुज धाम क्या है?
यह भगवान विष्णु का वह भव्य मंदिर है जिसे बाबू हिम्मत साह ने सबसे पहले बनवाया था, और यहीं रियासत के तालुकदार आजादी की लड़ाई की रणनीति तय करते थे।
अंग्रेजों ने कोहरा किले के साथ क्या किया?
अंग्रेजी सैनिकों की एक टुकड़ी ने भारी मात्रा में हथियार जब्त किए और किले को ध्वस्त करने का आदेश दिया; आज भी इसके अवशेष बांसों के झुरमुटों के बीच मौजूद हैं।
वर्तमान में कोहरा रियासत की बागडोर किसके पास है?
इस समय रियासत के संरक्षक बाबू राघवेंद्र प्रताप सिंह (अभय सिंह) हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR