बिहार के इस किसान ने घर की चारदीवारी पर उगाए ड्रैगन फ्रूट, सुरक्षा के साथ हो रही है कमाईकैनोपी पोर्टेबल ह्यूमिडिफायर का विस्तृत मूल्यांकन, छोटे कमरों और यात्रा के लिए कैसा है यह छोटा उपकरणवीरेंद्र सहवाग ने क्यों ठुकरा दिया था शो का ऑफर, बच्चों की चेतावनी के बाद भी थामी होस्टिंग की कमाननागोया में भारत का ऐतिहासिक दिन, शूटिंग में रिकॉर्ड स्वर्ण और पोल वॉल्ट में पहला पदक जीत कुल संख्या 23 कीविराट कोहली को आया जोरदार गुस्सा, प्रैक्टिस सेशन में बैटिंग ऑर्डर बदलने के प्लान पर बिगड़ा मामलातिरुवनंतपुरम में वेस्टइंडीज के खिलाफ मैदान संभालेंगे रोहित, दो बड़े रिकॉर्ड निशाने परकर्नाटक में नंदिनी दूध के दाम में 4 से 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की तैयारी, 51 रुपये तक पहुंच सकती है कीमतप्रशासनिक फेरबदल के तहत मंदीप के. भंडारी को मिली सीबीएसई की कमान, केंद्र ने 10 शीर्ष अधिकारियों को सौंपी नई जिम्मेदारियांबिहार का वह अनोखा गांव, जहां की दीवारों पर गूंजती हैं रामधारी सिंह दिनकर की ओजस्वी कविताएंदिल्ली में भजन क्लबिंग के दौरान युवाओं के बीच नजर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
बिहार का वह अनोखा गांव, जहां की दीवारों पर गूंजती हैं रामधारी सिंह दिनकर की ओजस्वी कविताएंकल्चर
25 सित॰ 2026, 11:04 pm (2 मिनट पहले)· 0

बिहार का वह अनोखा गांव, जहां की दीवारों पर गूंजती हैं रामधारी सिंह दिनकर की ओजस्वी कविताएं

बिहार के बेगूसराय जिले में स्थित सिमरिया गांव अपनी अनूठी पहचान के लिए जाना जाता है, जहां के हजारों घरों की दीवारों पर राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविताएं उकेरी गई हैं।

बिहार के बेगूसराय जिले में स्थित सिमरिया गांव राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मस्थली होने के नाते एक खास ऐतिहासिक महत्व रखता है। इस गांव की सीमा में कदम रखते ही दीवारों पर रची-बसी राष्ट्रकवि की ओजपूर्ण पंक्तियां हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लेती हैं। यहां आने वाले लोगों को साहित्य केवल किताबों के पन्नों तक सीमित नजर नहीं आता, बल्कि यह गांव की हर गली और दीवार के जरिए सीधे आम जनजीवन का हिस्सा बन चुका है।

दीवारों पर उकेरी गई साहित्यिक विरासत

सिमरिया गांव के हजारों घरों की बाहरी दीवारों पर दिनकर की कविताओं की पंक्तियां बेहद खूबसूरती से लिखी गई हैं। स्थानीय निवासियों का यह मानना है कि यह पहल महज घरों को सजाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह साहित्य को जन-जन तक पहुँचाने का एक अनूठा प्रयास है। सड़क से गुजरने वाले आम राहगीर भी इन दीवारों पर नजर पड़ते ही ठहर जाते हैं और इन कविताओं को पढ़कर राष्ट्रकवि के विचारों से गहराई से जुड़ जाते हैं।

ये भी पढ़ें

आज की पीढ़ी और बदलता रुझान

आज के दौर में जब नई पीढ़ी के धीरे-धीरे किताबों से दूर होने की तमाम चर्चाएं होती रहती हैं, तब सिमरिया गांव एक बिल्कुल अलग और प्रेरणादायक तस्वीर पेश करता है। इस अनूठी व्यवस्था के कारण जिन लोगों को किताबें पढ़ने का अवसर नहीं मिल पाता है, वे भी दीवारों पर अंकित कविताओं के माध्यम से दिनकर के महान विचारों और उनकी साहित्यिक शैली से आसानी से परिचित हो रहे हैं।

गांव की गलियों में जीवंत होता साहित्य

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की यह जन्मस्थली आज भी उनकी अमूल्य साहित्यिक विरासत को पूरी शिद्दत के साथ संजोए हुए है। सिमरिया की तंग गलियों और घरों पर सजी उनकी रचनाएं इस बात का अहसास कराती हैं कि दिनकर का साहित्य अब केवल रचनाएं नहीं, बल्कि यहां के निवासियों के दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है। इसके अलावा, गांव की नई पीढ़ी भी इस साहित्यिक माहौल में पल-बढ़ रही है और स्थानीय लोगों के अनुसार यहां के बच्चे दिनकर की कई प्रसिद्ध रचनाओं को मौखिक रूप से याद करके आसानी से सुना देते हैं।

साहित्य प्रेमियों का प्रमुख केंद्र

अब सिमरिया सिर्फ एक साधारण गांव नहीं रह गया है, बल्कि यह देश भर के साहित्य प्रेमियों और नामचीन साहित्यकारों के लिए एक प्रमुख और खास तीर्थस्थल जैसा बन चुका है। यहां स्थित पुस्तकालय किसी बड़े खजाने से कम नहीं है और साल भर बड़े-बड़े साहित्यकारों का इस गांव में आना-जाना लगा रहता है। इसके साथ ही, राष्ट्रकवि की जयंती और पुण्यतिथि के विशेष अवसरों पर पूरा गांव उनकी कविताओं के पाठ से गूंज उठता है।

सवाल-जवाब

सिमरिया गांव किस जिले में स्थित है?
सिमरिया गांव बिहार के बेगूसराय जिले में स्थित है।
सिमरिया गांव की क्या खास पहचान है?
यह राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मस्थली है और यहां के घरों की दीवारों पर उनकी कविताएं उकेरी गई हैं।
दीवारों पर कविताएं लिखने का क्या उद्देश्य है?
इसका उद्देश्य साहित्य को किताबों तक सीमित न रखकर आम लोगों और राहगीरों तक पहुंचाना है।
क्या सिमरिया में पुस्तकालय भी मौजूद है?
हाँ, सिमरिया में एक पुस्तकालय है जो साहित्य का एक बड़ा केंद्र माना जाता है।
गांव के बच्चों पर इसका क्या प्रभाव है?
स्थानीय बच्चों ने दिनकर की कई रचनाओं को याद कर लिया है और वे उन्हें आसानी से सुना देते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp