न्यूयॉर्क में रहने वाले पत्रकार उमांस्की अचानक उस समय चकित रह गए जब उनके मोबाइल फोन और इनबॉक्स पर पुराने परिचितों के संदेशों की बाढ़ आ गई। करीब 15 साल पहले कभी मिले लोग उनसे पूछ रहे थे कि क्या वाकई उन्होंने 2 मई को शाम 7 बजे एक स्पेशल प्राइवेट डिनर पार्टी आयोजित की है। उस समय वह ऑफिस के काम के दबाव और समय सीमा के तनाव में उलझे हुए थे। असल में उमांस्की ने किसी भी तरह का ऐसा निमंत्रण नहीं भेजा था और न ही उनका भविष्य में किसी पार्टी की मेजबानी करने का कोई इरादा था। उनका खाता पेपरलेस पोस्ट के नाम से चल रहे एक नए साइबर गिरोह का शिकार बन चुका था।
फिशिंग के जाल के बीच से निकली दोस्ती की नई शुरुआत
उमांस्की एक ऐसे ईमेल घोटाले के शुरुआती शिकार बने थे, जो धीरे-धीरे बहुत बड़े पैमाने पर फैल रहा था। हालांकि इस पूरी धोखाधड़ी का एक ऐसा विचित्र और सकारात्मक पहलू सामने आया, जिसकी कल्पना उन्होंने बिल्कुल नहीं की थी। धोखेबाजों ने उनके नाम पर जो नकली निमंत्रण कार्ड भेजे थे, उसने उनकी सुस्त पड़ी सोशल लाइफ में एक नई ऊर्जा भर दी। सालों से चुपचाप बैठे दोस्त केवल इस बात की पुष्टि करने के लिए उनसे संपर्क करने लगे कि क्या यह ईमेल असली है। इस साधारण से सवाल ने दशकों पुराने संवाद के बंद दरवाजों को फिर से खोल दिया।
जाली इनविटेशन प्लेटफॉर्म का उपयोग कर डेटा चुराने की साजिश
इस तरह के मामलों में आई भारी वृद्धि के बाद मई के महीने में फेडरल ट्रेड कमीशन ने उपभोक्ताओं के लिए एक आधिकारिक चेतावनी जारी की थी। इस सतर्कता नोटिस में कहा गया कि साइबर अपराधी लोगों को ऐसे अप्रत्याशित संदेश भेज रहे हैं जो हूबहू इवाइट या पेपरलेस पोस्ट जैसे विख्यात प्लेटफॉर्म से भेजे गए प्रतीत होते हैं। धोखेबाज लोगों को झांसा देने के लिए दो मुख्य हथकंडे अपनाते हैं। कुछ संदेशों में कार्यक्रम का विवरण देखने के लिए प्राप्तकर्ता से उसके ईमेल का यूजरनेम और पासवर्ड दर्ज करने की मांग की जाती है। वहीं कुछ अन्य फर्जी पत्रों में व्यक्ति को अपना फोन नंबर दर्ज करने और आरएसवीपी पुष्टि के लिए एक खास कोड साझा करने का निर्देश दिया जाता है।
सोशल मीडिया पर अपील और साइबर ठगी का तकनीकी ढांचा
उमांस्की इस बात को लेकर बेहद हैरान थे कि सुरक्षा सावधानियों के बावजूद यह सेंधमारी कैसे हो गई। उन्होंने अपने खाते को सुरक्षित रखने के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सहित सभी जरूरी उपाय किए हुए थे। स्थिति बिगड़ती देख उन्होंने फेसबुक, लिंक्डइन और अपने अन्य सोशल नेटवर्क्स पर एक जरूरी पोस्ट डालकर सबको सचेत किया। उन्होंने साफ लिखा कि वे किसी भी पार्टी का आयोजन नहीं कर रहे हैं और सबसे अहम बात यह है कि कोई भी व्यक्ति उनके घर न पहुंचे।
पिछले दो दशकों के दौरान फिशिंग स्कैम व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं और बड़ी कंपनियों दोनों के लिए सबसे गंभीर सुरक्षा चुनौतियों में से एक बनकर उभरे हैं। मौजूदा दौर के ईमेल घोटाले बेहद परिष्कृत हो चुके हैं, जिनमें मानवीय भावनाओं का फायदा उठाने वाली सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है। ठग अपने शिकार के मन में जल्दबाजी या डर की भावना पैदा करते हैं। इससे भी आगे बढ़कर वे दो लोगों के निजी संबंधों का फायदा उठाकर उन्हें फंसाते हैं, जिसे तकनीकी भाषा में स्पीयर फिशिंग कहा जाता है। आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI उपकरणों की मदद से इन धोखों की पहचान करना और भी मुश्किल हो गया है।
दशकों पुरानी दूरियां मिटीं और नए सिरे से जुड़े रिश्ते
उमांस्की के मामले में इस धोखाधड़ी का नतीजा एकदम अप्रत्याशित साबित हुआ। फर्जी इनवाइट ने पुराने साथियों को यह पूछने का मौका दे दिया कि संदेश सच है या झूठ, और इसी बहाने वर्षों से दबे पड़े रिश्ते फिर से हरे हो गए। उमांस्की ने इस घटना पर हैरत जताते हुए माना कि यह अनुभव उनके लिए एक सकारात्मक बदलाव साबित हुआ। पिछले कुछ महीनों में वे लंच और टेक्स्ट संदेशों के जरिए अपने कई पुराने दोस्तों और पूर्व सहकर्मियों से दोबारा जुड़ चुके हैं। हाल ही में उन्होंने मैक्सिको सिटी में रहने वाले अपने एक पूर्व सहयोगी के साथ ज़ूम पर पूरा एक घंटा बिताया, जिनसे उनकी बातचीत एक दशक से अधिक समय से पूरी तरह बंद थी। बातचीत में उन्होंने करीब दस मिनट किसी विचार पर चर्चा की और बाकी 50 मिनट केवल अपनी-अपनी जिंदगी के हाल-चाल साझा करने में बिताए।
लोग पुराने दोस्तों से संपर्क साधने में क्यों झिझकते हैं?
कम्युनिकेशंस साइकोलॉजी नामक वैज्ञानिक जर्नल में 2024 में प्रकाशित एक शोध पत्र में सामाजिक अलगाव और संकोच का अध्ययन किया गया था। अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के 2,400 वयस्कों पर किए गए इस सर्वेक्षण से पता चला कि कई बार लोग पुराने दोस्तों से संपर्क करने में झिझकते हैं। उन्हें लगता है कि सामने वाला व्यक्ति उनकी बात सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं रखेगा या फिर बिना किसी खास वजह के बात शुरू करना अजीब लगेगा। इस शोध में रेखांकित किया गया कि उत्तरी अमेरिका में काम और उत्पादकता को दी जाने वाली अत्यधिक प्राथमिकता के चलते लोगों ने अपनी सामाजिक जिंदगी को सीमित कर लिया है ताकि वे काम की बढ़ती मांगों को पूरा कर सकें। इसके अलावा माता-पिता बनना या किसी नए शहर में बसने जैसे जीवन के बड़े बदलाव भी लोगों को दोस्तों से दूर कर देते हैं।
ऐसे संकोची माहौल में एक संदिग्ध पार्टी निमंत्रण बातचीत शुरू करने का एक बहुत आसान और सुरक्षित बहाना बन जाता है। यह आमंत्रण हर इंसान के मन में बसी उस गहरी चाहत को छूता है, जिसे हम अपनापन और किसी समूह का हिस्सा बनने की इच्छा कहते हैं।
साइमन फ्रेजर यूनिवर्सिटी के अध्ययन के अहम आंकड़े
साइमन फ्रेजर यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की प्रोफेसर लारा अकनिन ने छूटे हुए संपर्कों से दोबारा जुड़ने की झिझक पर गहरा अध्ययन किया है। उनके शोध के अनुसार, केवल 30 प्रतिशत लोग ही वास्तव में अपने किसी पुराने दोस्त का हालचाल लेते हैं, भले ही उन्हें एक बेहद आसान, उपयुक्त और जोखिम रहित संपर्क सूत्र चुनने में पूरी सहायता दी जाए।
ईमेल से जुड़े इन घोटालों के संदर्भ में लारा अकनिन स्पष्ट करती हैं कि लोग किसी पुराने परिचित से इसलिए संपर्क करने को तैयार हो जाते हैं क्योंकि यह स्कैम उन्हें बात शुरू करने का एक वास्तविक बहाना या सामाजिक सुरक्षा आवरण प्रदान करता है। लोग इस बात की पूरी उम्मीद करते हैं कि पार्टी का बुलावा फर्जी निकले, फिर भी वे इस बात के लिए मन ही मन आभारी होते हैं कि इसके बहाने उन्हें दोबारा बातचीत का जरिया मिल गया।
अकेलापन, घटते सामाजिक दायरे और अपराध का वित्तीय पैमाना
आजकल अधिकांश लोगों के जीवन में बेहद करीबी दोस्तों की संख्या बहुत सीमित रह गई है और आधुनिक समय में यह दायरा और भी सिकुड़ता जा रहा है। वर्तमान में लगभग आधी आबादी यानी 44 प्रतिशत लोगों के पास पांच या उससे भी कम परिचित बचे हैं। उमांस्की का कहना है कि जब साइबर अपराधी इंसानों की इस गहरी भावनात्मक जरूरत का गलत फायदा उठाते हैं, तो वे अनजाने में उस खालीपन को भरने का काम भी कर रहे होते हैं।
इस ट्रेंड का असर सिर्फ उमांस्की तक सीमित नहीं रहा। अलास्का के एक स्थानीय अखबार रैंगल सेंटिनल में लैरी पर्सिली ने लिखा कि उन्हें 30 साल से अधिक पुराने एक दोस्त का संदेश मिला। इसी तरह एक अन्य व्यक्ति ने पुष्टि की कि फर्जी पार्टी इनवाइट मिलने के बाद वे अपने उस पूर्व साथी के दोबारा संपर्क में आ गए जिससे सालों से कोई बात नहीं हुई थी।
हालांकि इन अनपेक्षित मुलाकातों के बीच इस कड़वे सच को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि यह एक बहुत बड़ा अपराध है। हर फर्जी निमंत्रण का अंत किसी खुशनुमा ब्रंच या ज़ूम कॉल पर नहीं होता। संघीय जांच एजेंसी एफबीआई के अनुमान के मुताबिक, साल 2025 में धोखेबाजों ने AI की मदद लेकर केवल अमेरिकी नागरिकों से ही 21 अरब डॉलर की भारी भरकम रकम ठग ली। कई लोग इस झांसे को भांपकर सीधे डिलीट कर देते हैं, लेकिन फर्जी इनवाइट्स के जरिए होने वाली यह नई डिजिटल ठगी आधुनिक समाज के अकेलेपन और सुरक्षा दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।


















