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छीनी और हथौड़ी से गढ़ते आस्था के रूप: हैदराबाद की पारंपरिक काष्ठकला में छिपे कड़े जोखिम और भाईचारे की मिसालकल्चर
19 अग॰ 2026, 1:12 pm (70 दिन पहले)· 3

छीनी और हथौड़ी से गढ़ते आस्था के रूप: हैदराबाद की पारंपरिक काष्ठकला में छिपे कड़े जोखिम और भाईचारे की मिसाल

हैदराबाद के पुराने बाज़ारों में पीढ़ियों से चली आ रही लकड़ी की नक्काशी न केवल धार्मिक आस्था और कला का अनूठा प्रतीक है, बल्कि स्वास्थ्य जोखिमों के बावजूद सर्वधर्म सद्भाव को बनाए रखने की एक जीवंत मिसाल भी है.

पुराने हैदराबाद के ऐतिहासिक बाज़ारों और संकरी गलियों से गुज़रते हुए छीनी और हथौड़ी की गूंज लगातार सुनाई देती है. यह महज़ किसी कारखाने का शोर नहीं है, बल्कि इस शहर की सदियों पुरानी सांस्कृतिक चेतना और साझी विरासत की आवाज़ है. जंगलों से लाए गए लकड़ी के भारी लट्ठों को जब कुशल कारीगर अपने औजारों से तराशते हैं, तो वे साधारण काष्ठ को कलाकृति और धार्मिक आस्था के भव्य प्रतीक में बदल देते हैं. यहां काष्ठशिल्प केवल कमाई का साधन नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से सहेजा गया एक समृद्ध पारंपरिक हुनर है, जिसमें अप्रतिम धैर्य और कारीगरी की आवश्यकता होती है.

कठिन और चरणबद्ध प्रक्रिया से उभरती है बारीक नक्काशी

लकड़ी की नक्काशी देखने में जितनी आकर्षक और सुंदर लगती है, इसकी निर्माण प्रक्रिया उतनी ही जटिल और श्रमसाध्य होती है. जंगलों और सरकारी डिपो से लाई गई मजबूत इमारती लकड़ी को सबसे पहले कारखानों में लाकर अच्छी तरह साफ किया जाता है. इसके बाद कारीगर आवश्यकता के अनुसार लकड़ी को सटीक नाप देकर उसका प्राथमिक ढांचा तैयार करते हैं.

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मूल ढांचा तैयार होने के बाद हस्तशिल्प का सबसे चुनौतीपूर्ण और बारीक चरण शुरू होता है, जहां कारीगर घंटों एक ही जगह बैठकर हाथ से उकेराई करते हैं. लकड़ी की सतह पर बारीक बेल-बूटे, भगवान गणेश जी की आकृतियां, मंगल प्रतीक स्वास्तिक और पारंपरिक नक्काशीदार खंभे बहुत ही बारीकी से उकेरे जाते हैं. कटाई और नक्काशी पूरी होने के बाद, सतह को चिकना करने के लिए घिसाई की जाती है और अंतिम चरण में पॉलिश लगाकर लकड़ी को चमकदार रूप दिया जाता है.

स्वास्थ्य के प्रति भारी जोखिम और दैनिक चुनौतियां

इस अद्भुत काष्ठ कलाकृति की चमक और सुंदरता के पीछे दस्तकारों का कड़ा शारीरिक परिश्रम और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम छिपा होता है. लकड़ी की कटाई, छिलाई और घिसाई के दौरान महीन लकड़ी का बुरादा हवा में उड़ता रहता है, जो लगातार कारीगरों की आंखों, कानों और श्वसन प्रणाली में प्रवेश करता है. इससे उन्हें सांस संबंधी बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहता है.

इसके अलावा, तेज धारदार मशीनों, छिनियों और औजारों पर लगातार काम करने के कारण उंगलियों में चोट लगना और कट जाना बेहद आम बात है. कई बार असावधानी की स्थिति में गंभीर दुर्घटनाओं की आशंका भी रहती है. इन तमाम शारीरिक कष्टों, सुरक्षा खतरों और चुनौतियों के बावजूद ये दस्तकार अपने पुश्तैनी काम को पूरी निष्ठा और लगन के साथ जारी रखे हुए हैं.

सर्वधर्म सद्भाव और साझी संस्कृति की बेमिसाल मिसाल

हैदराबाद के इस पारंपरिक काष्ठशिल्प की सबसे विशिष्ट पहचान इसका सामाजिक और धार्मिक सद्भाव है. इस हुनर में धर्म की दीवारें पूरी तरह ढह जाती हैं. यहां के मुस्लिम दस्तकार पूरे भक्ति भाव, सम्मान और पवित्रता के साथ हिंदू श्रद्धालुओं के लिए नक्काशीदार पूजा मंदिर तैयार करते हैं.

इसी तरह, तेलंगाना के वारंगल जैसे प्रमुख शहरों में स्थित विशाल चर्चों के लिए 10 फीट ऊंचे भव्य नक्काशीदार लकड़ी के दरवाज़े और पादरियों के लिए विशेष फर्नीचर बनाने का काम भी यही कारीगर बखूबी अंजाम देते हैं. इस प्रकार, हैदराबाद का यह काष्ठशिल्प सिर्फ लकड़ी का सामान बनाने का व्यवसाय नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के भाईचारे, धार्मिक सौहार्द और अटूट मेहनत की एक जीवंत मिसाल प्रस्तुत करता है.

सवाल-जवाब

हैदराबाद के काष्ठशिल्प में कौन-कौन सी आकृतियां उकेरी जाती हैं?
कारीगर लकड़ी पर बारीक बेल-बूटे, भगवान गणेश जी की प्रतिमाएं, स्वास्तिक चिन्ह और नक्काशीदार खंभे उकेरते हैं.
हैदराबाद की काष्ठकला में कौन सा सामाजिक संदेश छिपा है?
यह शिल्प सर्वधर्म सद्भाव की मिसाल है, जहां मुस्लिम कारीगर हिंदू परिवारों के लिए मंदिर और वारंगल के चर्चों के लिए दरवाजे बनाते हैं.
नक्काशी का काम करते समय कारीगरों को किन स्वास्थ्य खतरों का सामना करना पड़ता है?
लकड़ी का महीन बुरादा आंखों, कानों और फेफड़ों में जाता है, और धारदार औजारों से चोट लगने का जोखिम रहता है.
वारंगल के चर्चों के लिए कारीगर क्या तैयार करते हैं?
कारीगर तेलंगाना के वारंगल स्थित बड़े चर्चों के लिए 10 फीट ऊंचे नक्काशीदार दरवाजे और पादरियों के लिए फर्नीचर तैयार करते हैं.
लकड़ी की नक्काशी का अंतिम चरण क्या होता है?
नक्काशी और कारपेंटरी के बाद लकड़ी की सतह को घिसकर चिकना किया जाता है और उस पर पॉलिश लगाकर चमक दी जाती है.
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