गोरखपुर की यात्रा करने वाले शोधकर्ताओं और पर्यटकों के बीच इस ऐतिहासिक नगर की समृद्ध धार्मिक जड़ों को गहराई से जानने की हमेशा एक विशेष उत्सुकता रहती है। शहर की सांस्कृतिक पहचान मुख्य रूप से नाथ संप्रदाय से अटूट रूप से जुड़ी हुई मानी जाती है। जो पाठक अथवा जिज्ञासु व्यक्ति भारतीय ज्ञान मीमांसा, प्राचीन दर्शन और विभिन्न आध्यात्मिक परंपराओं को प्रामाणिक पुस्तकों के सहारे विस्तार से समझना चाहते हैं, उनके लिए गोरखपुर विश्वविद्यालय का केंद्रीय पुस्तकालय एक उत्कृष्ट अध्ययन स्थल बनकर उभरा है।
इस शैक्षणिक संस्थान में संजोई गई अध्ययन सामग्री केवल विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की समग्र सांस्कृतिक यात्रा को प्रस्तुत करती है। विभिन्न दार्शनिक प्रणालियों के अध्येताओं के लिए यह स्थान विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, क्योंकि यहां समाज और विचार के निर्माण से जुड़ी कई धाराएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं।
दुर्लभ दार्शनिक धाराओं और आध्यात्मिक परंपराओं का संकलन
पुस्तकालय के संकलन में ज्ञान की विभिन्न शाखाओं से जुड़ी मूल्यवान कृतियों को करीने से सहेजा गया है। यहां नाथ पंथ की ऐतिहासिक विकास यात्रा के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा, बौद्ध दर्शन और जैन धर्म से संबंधित बेहद उपयोगी एवं महत्वपूर्ण कृतियां पढ़ने को मिलती हैं। इन ग्रंथों के माध्यम से आने वाले अध्येताओं को मात्र धार्मिक कर्मकांडों या मान्यताओं का ज्ञान ही नहीं मिलता, अपितु भारतीय समाज, सामाजिक संरचना, वैचारिक दर्शन और ऐतिहासिक परिवर्तनों की सूक्ष्म समझ भी हासिल होती है।
विशेष रूप से जो लोग गोरखपुर के अतीत, नाथ परंपरा के दार्शनिक आधार और इस संप्रदाय के क्रमिक उत्थान को तथ्यात्मक रूप से देखना चाहते हैं, उनके लिए यह संग्रह अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। अलग-अलग संप्रदायों की तुलनात्मक समझ विकसित करने के लिए भी यह संदर्भ सामग्री शोधार्थियों को नई दृष्टि प्रदान करती है।
सामान्य नागरिकों और पाठकों के लिए खुला अध्ययन केंद्र
इस पुस्तकालय की एक सबसे उल्लेखनीय और जनोपयोगी विशेषता यह है कि इसका उपयोग सिर्फ विश्वविद्यालय में पंजीकृत छात्र-छात्राओं तक ही सीमित नहीं रखा गया है। शहर के आम नागरिक, स्वाध्यायी पाठक और स्वतंत्र शोधार्थी भी यहां आकर अध्ययन की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। पठन-पाठन की सुविधा के लिए यह पुस्तकालय प्रत्येक दिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक नियमित रूप से खुला रहता है। इस तय समय सारिणी के दौरान कोई भी व्यक्ति यहां पहुंचकर अपनी पसंद के विषयों की किताबों को देख और पढ़ सकता है।
पुस्तकालय से जुड़े डॉ. कुशल मिश्रा ने बताया कि आगामी दिनों में इस स्थान पर पुस्तकों के संग्रह को और अधिक विस्तार देने की विस्तृत योजना पर काम चल रहा है। इस कदम का स्पष्ट उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आने वाले समय में पाठकों और शोधार्थियों को विभिन्न विषयों पर ज्यादा से ज्यादा प्रामाणिक अध्ययन सामग्री सहजता से मिल सके।
शोधार्थियों के लिए शैक्षिक माहौल और अध्ययन के नए अवसर
विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के भीतर शोध की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने और अकादमिक समझ को निखारने के लिए कई तरह के विशेष कार्यक्रम भी निरंतर आयोजित किए जाते हैं। अनेक संकायों में विभिन्न सामाजिक व दार्शनिक विषयों पर गहन शोध कार्य चल रहे हैं, जिससे विश्वविद्यालय का समग्र बौद्धिक परिवेश निरंतर सुदृढ़ हो रहा है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय का यह पुस्तकालय सामान्य किताबों के किसी संग्रह मात्र से कहीं आगे निकलकर, गोरखपुर की स्थानीय धरोहर, भारतीय ज्ञान की मूल परंपरा और गहन धर्म-दर्शन को एक साथ समझने का एक सशक्त केंद्र बन चुका है। अतीत की संस्कृति, धर्म और इतिहास में रुचि रखने वाले प्रत्येक जिज्ञासु पाठक के लिए यहां उपलब्ध ज्ञान का विशाल संसार एक नए वैचारिक अनुभव का मार्ग प्रशस्त करता है।



















