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हैदराबाद के अभिलेखागार में सहेजी गईं ताड़पत्रों की अनमोल पांडुलिपियां, आंध्र महाभारतम् की मूल प्रति भी मौजूदकल्चर
18 अक्तू॰ 2026, 12:17 pm (10 दिन पहले)· 1

हैदराबाद के अभिलेखागार में सहेजी गईं ताड़पत्रों की अनमोल पांडुलिपियां, आंध्र महाभारतम् की मूल प्रति भी मौजूद

हैदराबाद के संग्रहालय में लगभग 5,000 प्राचीन ताड़पत्र पांडुलिपियां सुरक्षित रखी गई हैं, जिनमें आंध्र महाभारतम् की मूल प्रति और कई ऐतिहासिक ग्रंथ शामिल हैं।

वर्तमान डिजिटल युग के बीच भारत की प्राचीन वैचारिक और साहित्यिक विरासत आज भी हैदराबाद के संग्रहालय में सुरक्षित रूप से संरक्षित है। ताड़ के पत्तों पर उकेरे गए ये ऐतिहासिक ग्रंथ पूर्वजों के उच्च ज्ञान, कला और उनकी उन्नत संरक्षण तकनीकों की बेहतरीन मिसाल पेश करते हैं।

लगभग 5,000 दुर्लभ पांडुलिपियों का संग्रह

पुरातत्व विभाग के अभिलेखागार और संग्रहालय में करीब 5,000 प्राचीन ताड़पत्र पांडुलिपियां बेहद सुरक्षित स्थिति में रखी हुई हैं। इस अमूल्य संग्रह का सबसे बड़ा आकर्षण आंध्र महाभारतम् की मूल ताड़पत्र प्रति है। इतिहासकार सूर्याकोंडी के मुताबिक, इस महान ग्रंथ के सृजन की शुरुआत 11वीं शताब्दी में चालुक्य शासक राजराज नरेंद्र के संरक्षण में हुई थी। तेलुगु साहित्य के तीन प्रसिद्ध रचनाकारों नन्नय्य, तिक्कना और एर्रना को संयुक्त रूप से कवित्रयम् कहा जाता है, जिन्होंने संस्कृत भाषा के महाभारत को तेलुगु में रूपांतरित किया था।

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प्राचीन भारतीय संरक्षण की अनूठी तकनीक

इन महान रचनाकारों की कोई तस्वीर आज भले ही बची न हो, लेकिन उनके द्वारा ताड़ के पत्तों पर लिखे गए शब्द आज भी अमिट साक्ष्य के रूप में मौजूद हैं। इन पन्नों की लंबी उम्र के पीछे प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक प्रक्रिया काम करती थी। लिखने से पहले ताड़ के पत्तों को पानी में डुबोया जाता था और फिर उबाला जाता था। इसके बाद इन्हें नमी, कीड़ों और फफूंद से बचाने के लिए खास आयुर्वेदिक लेप और जड़ी-बूटियां लगाई जाती थीं। यही वजह है कि सदियों का लंबा सफर तय करने के बाद भी ये पत्ते और नुकीली धातु की कलम से उकेरे गए सूक्ष्म अक्षर सुरक्षित बचे हैं।

साहित्य, आयुर्वेद और खगोल विज्ञान का खजाना

इस संग्रह में केवल महाभारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय साहित्य की कई अन्य महान कृतियां भी शामिल हैं। इनमें भक्त कवि पोतना की रचित श्रीमद्भागवत, कवयित्री मोल्ला की मोल्ला रामायण और महाकवि श्रीनाथ की लोकप्रिय रचना शृंगार नैषधम शामिल हैं। इसके अलावा प्राचीन चिकित्सा शास्त्र, खगोल विज्ञान, ज्योतिष और संत अन्नमाचार्य के दुर्लभ संकीर्तन भी इन ग्रंथों में दर्ज हैं। इन पांडुलिपियों की शास्त्रीय भाषा बेहद जटिल है, जिसे समझने और डिकोड करने के लिए भाषाविदों और विद्वानों की सहायता ली जा रही है।

सवाल-जवाब

हैदराबाद के संग्रहालय में कितनी प्राचीन ताड़पत्र पांडुलिपियां सुरक्षित हैं?
पुरातत्व विभाग के संग्रहालय और अभिलेखागार में लगभग 5,000 प्राचीन ताड़पत्र पांडुलिपियां सुरक्षित रखी गई हैं।
आंध्र महाभारतम् की मूल ताड़पत्र प्रति की रचना किसके संरक्षण में शुरू हुई थी?
इस महाकाव्य की रचना 11वीं सदी के चालुक्य राजा राजराज नरेंद्र के संरक्षण में शुरू हुई थी।
कवित्रयम् किसे कहा जाता है?
तेलुगु साहित्य के तीन सर्वश्रेष्ठ कवियों नन्नय्य, तिक्कना और एर्रना को सम्मिलित रूप से कवित्रयम् कहा जाता है।
ताड़ के पत्तों को खराब होने से बचाने के लिए क्या उपाय किए जाते थे?
लिखने से पहले पत्तों को पानी में भिगोकर उबाला जाता था और कीड़ों तथा सीलन से बचाने के लिए आयुर्वेदिक तेलों और जड़ी-बूटियों के लेप लगाए जाते थे।
इस संग्रह में महाभारत के अलावा किन अन्य प्रमुख कृतियों का उल्लेख है?
इस संग्रह में श्रीमद्भागवत, मोल्ला रामायण, शृंगार नैषधम और संत अन्नमाचार्य के संकीर्तन शामिल हैं।
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