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प्रवासी मैथिल परिवारों के लिए मधुबनी के कलाकारों की पहल, शादी और मुंडन के लिए शुरू किया स्पेशल सांस्कृतिक मैनेजमेंट पैकेजकल्चर
20 अग॰ 2026, 6:42 pm (69 दिन पहले)· 2

प्रवासी मैथिल परिवारों के लिए मधुबनी के कलाकारों की पहल, शादी और मुंडन के लिए शुरू किया स्पेशल सांस्कृतिक मैनेजमेंट पैकेज

बिहार के बाहर रहने वाले मैथिल परिवारों के लिए मधुबनी के रमेश मंडल और उनकी टीम ने पारंपरिक मांगलिक कार्यों का खास पैकेज तैयार किया है, जिसके जरिए देश के किसी भी शहर में मिथिला की समृद्ध परंपराएं पूरी तरह निभाई जा रही हैं।

रोजगार और बेहतर अवसरों की तलाश में बिहार छोड़कर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता तथा अहमदाबाद जैसे बड़े महानगरों में बसे मैथिल परिवारों के लिए अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ना आसान हो गया है। अक्सर देखा जाता है कि बड़े शहरों की व्यस्त जीवनशैली में रह रही नई पीढ़ी को मिथिला के पारंपरिक लोकगीतों, अल्पना (अरिपन) और विशेष पूजा पद्धतियों की पूरी जानकारी नहीं होती। इसी समस्या का व्यावहारिक समाधान तलाशते हुए मधुबनी और दरभंगा के स्थानीय कलाकारों ने मैथिली व्यावहारिक मैनेजमेंट का एक अनूठा मॉडल विकसित किया है। इसके जरिए दूर-दराज के राज्यों में रहने वाले परिवार भी अपने घरों में होने वाले शुभ कार्यों को पूरी परंपरा और विधि-विधान के साथ संपन्न करवा पा रहे हैं।

डिजिटल माध्यमों से देश भर में सेवाएं प्रदान कर रही टीम

इस अभिनव पहल की शुरुआत मधुबनी के निवासी रमेश मंडल और उनकी टीम ने लगभग 5 से 6 वर्ष पहले की थी। यह टीम आधुनिक संचार तकनीकों का उपयोग करके देश के किसी भी हिस्से में अपनी सेवाएं उपलब्ध कराती है। मैथिल परिवार ऑनलाइन बुकिंग, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और सीधे फोन कॉल के माध्यम से अपनी तिथियों के अनुसार सेवाओं को बुक कर सकते हैं। बुकिंग कन्फर्म होने के बाद टीम निर्धारित तिथि पर संबंधित शहर या राज्य में पहुंचकर कार्यक्रम की कमान संभाल लेती है।

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एक ही पैकेज में रस्मों से लेकर संगीत और सौंदर्य तक की व्यवस्था

इस कल्चरल मैनेजमेंट सुविधा के तहत 5 से 6 विशेषज्ञ कलाकारों की एक समर्पित टीम आयोजकों के घर या वेन्यू पर पहुंचती है। यह टीम मैथिल विवाह, मुंडन संस्कार, जनेऊ तथा अन्य सभी धार्मिक उत्सवों की पूरी तैयारी संभालती है। रस्मों के अंतर्गत यह टीम पारंपरिक कोहबर लिखने, मटका मंडप तैयार करने और सुंदर अरिपन बनाने का कार्य करती है। इसके अलावा सांस्कृतिक वातावरण तैयार करने के लिए मैथिली समदाउन और पारंपरिक विवाह गीत गाए जाते हैं। साथ ही दुल्हन के लिए विशेष मैथिली थीम मेकअप और मेहंदी रचाने की सुविधा भी इसी पैकेज का हिस्सा है।

विभिन्न राज्यों और बिहार के लिए निर्धारित शुल्क दरें

बिहार से बाहर रहने वाले परिवारों के लिए 2 से 4 दिनों की अवधि वाला यह पैकेज 21,000 रुपये से शुरू होकर 51,000 रुपये तक की श्रेणी में उपलब्ध कराया जाता है। बिहार से बाहर सेवाएं लेने पर आयोजक को टीम का यात्रा खर्च अलग से वहन करना होता है। दूसरी ओर, यदि कोई परिवार बिहार के भीतर ही जैसे दरभंगा, मधुबनी या पटना में यह सेवा लेना चाहता है, तो उनके लिए शुरुआती पैकेज लगभग 15,000 रुपये में उपलब्ध रहता है। अपनी मातृभूमि से सैकड़ों किलोमीटर दूर रह रहे लोगों के लिए यह सुविधा केवल एक व्यावसायिक सेवा नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी, बोली और समृद्ध धरोहर को जीवंत रखने का सशक्त माध्यम बन चुकी है।

सवाल-जवाब

मैथिली व्यावहारिक मैनेजमेंट की शुरुआत किसने और कहां से की?
इस सेवा की शुरुआत मधुबनी के रमेश मंडल और उनकी टीम ने लगभग 5 से 6 वर्ष पहले की थी।
इस पैकेज में कौन-कौन सी सुविधाएं शामिल हैं?
पैकेज में 5 से 6 लोगों की टीम आती है जो कोहबर लेखन, मटका-मंडप, अरिपन, समदाउन गीत, मैथिली थीम मेकअप और मेहंदी की सुविधा संभालती है।
बिहार से बाहर रहने वाले परिवारों के लिए पैकेज का क्या शुल्क है?
बिहार से बाहर 2 से 4 दिनों के पैकेज का शुल्क 21,000 रुपये से 51,000 रुपये तक है, और आयोजक को यात्रा खर्च अलग से देना होता है।
बिहार के भीतर इस सेवा का शुरुआती शुल्क कितना है?
दरभंगा, मधुबनी या पटना जैसे शहरों में बिहार के भीतर इस सेवा का शुरुआती पैकेज लगभग 15,000 रुपये में मिल जाता है।
इस सांस्कृतिक पैकेज की बुकिंग कैसे की जा सकती है?
इसे ऑनलाइन बुकिंग, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स या सीधे फोन कॉल के माध्यम से बुक किया जा सकता है।
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