राजौरी में सुरक्षा बलों को मिली बड़ी कामयाबी, भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामदमिथिलांचल में मरुआ की खेती से बदलेगी किसानों की तकदीर, जानिए कैसे बन रहा है मुनाफे का सौदायूपी चुनाव: क्या 40% विधायकों के कटेंगे टिकट? पंकज चौधरी ने बताई अंदर की बातजापान यूथ समिट में छाए जहानाबाद के शरजील अहमद काकवी, शिक्षा के प्रोजेक्ट को मिले तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मानदीपावली पर चांदी के सिक्के खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान, नकली धातु से बचने के आसान उपायऐपल ने भारत में लॉन्च किया नया मैकबुक प्रो, पहली बार मिला ओएलईडी डिस्प्ले और दमदार एम6 चिपपश्चिम बंगाल की राजनीति में गरमागरम बहस, शुभेंदु अधिकारी की ममता बनर्जी को घर बैठने की दो टूक सलाहकानपुर में दिल दहला देने वाली घटना, जिला स्तरीय वॉलीबॉल चैंपियन 9वीं की छात्रा का फंदे पर मिला शवकांशीराम और बाबासाहेब के संघर्षों का हवाला देकर आकाश आनंद से मायावती ने क्या कहा था?फिलीपींस के सेबू में बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वैश्विक मंच पर बढ़ी भारत की ताकत और साख
मधुबनी की अनोखी 'बाटी' परंपरा: मटन किलो में नहीं, बकरे के हिस्से में बिकता हैकल्चर
19 जून 2026, 7:50 pm (131 दिन पहले)· 2

मधुबनी की अनोखी 'बाटी' परंपरा: मटन किलो में नहीं, बकरे के हिस्से में बिकता है

मधुबनी के ग्रामीण इलाकों में मटन खरीदने की एक अनूठी परंपरा है, जहां लोग किलो की जगह 'बाटी' लगाकर सामूहिक रूप से बकरा खरीदते हैं और फिर उसके हिस्से को आपस में बांट लेते हैं।

मधुबनी: बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र, खासकर मधुबनी के ग्रामीण इलाकों में मटन खरीदने का एक अनोखा तरीका प्रचलन में है, जो अन्य जगहों से बिल्कुल अलग है। यहां के लोग आमतौर पर बाजार से एक या दो किलो मटन खरीदने के बजाय, कई परिवार मिलकर एक पूरा बकरा (छागर) खरीदते हैं। इस बकरे को पकाने के बाद, बिना वजन किए सभी के हिस्से का मांस आपस में बराबर बांट लिया जाता है। स्थानीय भाषा में इस प्रथा को 'बाटी लगाना' या 'कुरी लगाना' कहा जाता है।

साथ मिलकर मटन का आनंद

मिथिला के इन ग्रामीण क्षेत्रों में जब किसी परिवार को मटन खाने का मन होता है, तो वे अक्सर अपने आसपास के चार-पांच परिवारों से संपर्क करते हैं। सभी मिलकर पैसे जुटाते हैं और एक पूरा बकरा खरीद लेते हैं। बकरे की कटाई के समय, प्रत्येक परिवार के लिए निर्धारित मटन का हिस्सा बराबर-बराबर बांट दिया जाता है। इसी कारण, जिस दिन एक घर में मटन बनता है, उसी दिन आसपास के कई घरों में भी उसकी खुशबू फैल जाती है, जिससे सामूहिक भोज का माहौल बनता है।

ये भी पढ़ें

शुद्धता और ताजगी का भरोसा

स्थानीय निवासियों का मानना है कि बाजार से किलो के भाव खरीदे गए मटन में मिलावट या पुराने मांस होने की आशंका बनी रहती है। इसके विपरीत, जब पूरा बकरा सामने तैयार किया जाता है, तो लोगों को मांस की गुणवत्ता और ताजगी पर पूर्ण विश्वास होता है। यही वजह है कि आज भी इन ग्रामीण इलाकों में 'बाटी' लगाकर मटन खरीदने की यह परंपरा जीवित है, जो गुणवत्ता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

ताजगी, सरलता और आर्थिक बचत

अक्सर यह शिकायतें सुनने को मिलती हैं कि बाजार से खरीदा गया मटन पकने में काफी समय लेता है और उसे नरम बनाने के लिए अतिरिक्त घरेलू नुस्खे अपनाने पड़ते हैं। लेकिन, 'बाटी' प्रथा से प्राप्त ताजा मटन आसानी से कड़ाही में ही पक जाता है, जिसके लिए प्रेशर कुकर या किसी विशेष विधि की आवश्यकता नहीं पड़ती। यह इसकी एक प्रमुख विशेषता है। इस परंपरा का एक महत्वपूर्ण आर्थिक पहलू भी है। बकरे को सामूहिक रूप से खरीदने से प्रति परिवार खर्च काफी कम हो जाता है, और सभी को ताजा व शुद्ध मटन का स्वाद चखने को मिलता है। यही कारण है कि आधुनिक युग में भी मिथिला के कई गांवों में यह अनूठी परंपरा आज भी जीवित है।

सवाल-जवाब

मधुबनी में मटन खरीदने की इस अनोखी परंपरा का क्या नाम है?
इस परंपरा को स्थानीय भाषा में 'बाटी लगाना' या 'कुरी लगाना' कहा जाता है।
यह परंपरा क्यों प्रचलित है?
इसका मुख्य कारण यह है कि लोग बाजार से खरीदे गए मटन की शुद्धता और ताजगी पर संदेह करते हैं, और सामूहिक खरीद से खर्च भी कम आता है।
इस तरीके से मटन खरीदने के क्या फायदे हैं?
ताजा मटन जल्दी पकता है, जिसकी गुणवत्ता पर पूरा भरोसा रहता है, और प्रति परिवार खर्च भी कम आता है।
क्या यह परंपरा आज भी जीवित है?
हाँ, आधुनिक दौर के बावजूद मिथिलांचल के कई गांवों में यह अनोखी परंपरा आज भी कायम है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp