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सिरोही के महाराव रघुवीर सिंह देवड़ा को मिला पद्मश्री, शाही परंपरा और इतिहास को दे रहे नया आयामकल्चर
3 सित॰ 2026, 7:48 pm (55 दिन पहले)· 0

सिरोही के महाराव रघुवीर सिंह देवड़ा को मिला पद्मश्री, शाही परंपरा और इतिहास को दे रहे नया आयाम

सिरोही के महाराव रघुवीर सिंह देवड़ा शाही परंपराओं को सहेजने के साथ इतिहास के क्षेत्र में अहम योगदान दे रहे हैं। प्राचीन भारत और राजवंशों पर उनके काम के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है।

सिरोही के पूर्व राज परिवार के सदस्य महाराव रघुवीर सिंह देवड़ा अपनी गहरी ऐतिहासिक समझ के साथ शाही परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में जुटे हैं। उनका जन्म 28 जनवरी 1943 को मंडार में हुआ था। वह देश के स्वतंत्र होने तक सिरोही रियासत के अंतिम शासक रहे महाराव अभय सिंह के ज्येष्ठ पुत्र हैं। अपने पिता के निधन के बाद सात अप्रैल 1998 को उन्होंने सिरोही राजघराने के प्रमुख का दायित्व संभाला। वर्ष 1950 में सिरोही रियासत का भारतीय संघ में विलय होने के बाद से यह पद प्रशासनिक न रहकर पूरी तरह से राजपरिवार की पारंपरिक मुखिया का पद रह गया है।

इतिहास अध्ययन में स्वर्ण पदक और शोध कार्य

उनकी पहचान सिर्फ एक राजपरिवार के मुखिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इतिहास के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए भी उन्हें विशेष सम्मान प्राप्त है। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से इतिहास विषय में अपनी शिक्षा पूरी की और इस दौरान गोल्ड मेडल प्राप्त किया। छात्र जीवन से ही इतिहास के प्रति उनका विशेष लगाव रहा, जिसके चलते उन्होंने प्राचीन भारत, राजस्थान के विभिन्न राजवंशों, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक स्रोतों पर गहराई से अध्ययन किया। उनके इसी समर्पण को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2018 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया और यह प्रतिष्ठित सम्मान तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा प्रदान किया गया था।

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इतिहास को देखने का अनूठा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

पारंपरिक इतिहासकारों से उनकी सोच काफी अलग और व्यापक मानी जाती है। वह देश के इतिहास को केवल राजा-महाराजाओं की लड़ाइयों और युद्धों की गाथा तक सीमित रखने के पक्षधर नहीं हैं। इसके बजाय, वह प्राचीन भारत की वैज्ञानिक, सामाजिक और दार्शनिक उपलब्धियों को उजागर करने पर विशेष बल देते हैं। उनका मानना है कि इतिहास का अध्ययन हमेशा प्रामाणिक स्रोतों और ठोस साक्ष्यों के आधार पर किया जाना चाहिए। इतिहास के क्षेत्र में उनके इस विशिष्ट योगदान के कारण उन्हें देश भर के कई बड़े विश्वविद्यालयों के व्याख्यानों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में अपने विचार रखने के लिए आमंत्रित किया जाता है। आज भी राजस्थान और सिरोही के गौरवशाली अतीत को समझने के लिए देश-विदेश से लोग उनसे मिलने आते हैं।

विरासत का संरक्षण और राज्यपाल से मुलाकात

सिरोही और माउंट आबू की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत के बारे में उनकी गहरी जानकारी को देखते हुए वर्ष 2021 में राजस्थान के तत्कालीन राज्यपाल कलराज मिश्र ने भी उनसे मुलाकात की थी। इस बैठक के दौरान उन्होंने सिरोही रियासत के इतिहास और उससे जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की थी। सिरोही राजपरिवार की विरासत के अंतर्गत आने वाले कई प्राचीन महल, दुर्ग, मंदिर और ऐतिहासिक स्थलों को आज भी उनके प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में संरक्षित रखा जा रहा है।

सामाजिक जुड़ाव और वर्तमान जीवनशैली

अपनी 83 वर्ष की आयु पूरी कर चुके महाराव रघुवीर सिंह देवड़ा सिरोही क्षेत्र के अत्यंत सम्मानित और प्रतिष्ठित व्यक्तित्व हैं। उन्होंने राजसी विरासत को केवल सहेजने तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे इतिहास और संस्कृति के संरक्षण से भी मजबूती से जोड़ा है। देवड़ा चौहान वंश की परंपराओं, माउंट आबू की ऐतिहासिक धरोहर और राजस्थान के अतीत को लेकर उनकी गहरी रुचि उन्हें इस क्षेत्र की एक विशिष्ट हस्ती बनाती है। हालांकि रियासतें समाप्त होने के बाद राजपरिवार प्रशासनिक व्यवस्था से अलग हो चुके हैं, फिर भी रघुवीर सिंह देवड़ा और उनका पूरा परिवार आज भी आम जनता के साथ बेहद आत्मीयता से जुड़े हुए हैं और क्षेत्र के सामाजिक ताने-बाने का अहम हिस्सा बने हुए हैं।

सवाल-जवाब

महाराव रघुवीर सिंह देवड़ा का जन्म कब और कहां हुआ था?
उनका जन्म 28 जनवरी 1943 को मंडार में हुआ था।
वह किस रियासत के अंतिम शासक के पुत्र हैं?
वह सिरोही रियासत के अंतिम शासक रहे महाराव अभय सिंह के बड़े बेटे हैं।
उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से कब और किसने सम्मानित किया था?
भारत सरकार ने उन्हें 2018 में इतिहास में योगदान के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों पद्मश्री से सम्मानित किया था।
उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा किस विश्वविद्यालय से पूरी की थी?
उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से इतिहास की पढ़ाई पूरी की थी और गोल्ड मेडल हासिल किया था।
राजस्थान के किस राज्यपाल ने उनसे मुलाकात की थी?
वर्ष 2021 में राजस्थान के तत्कालीन राज्यपाल कलराज मिश्र ने उनसे मुलाकात की थी।
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