उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में जीवनरक्षक दवाओं में मिलावट और फर्जीवाड़े से जुड़ा एक बेहद गंभीर प्रकरण उजागर हुआ है। कुत्ते या किसी अन्य संक्रमित जानवर के काटने पर लगाई जाने वाली एंटी रैबीज वैक्सीन के कथित नकली कारोबार की जांच के बाद स्थानीय पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। औषधि प्रशासन विभाग की सघन जांच पड़ताल के उपरांत कलक्टरगंज थाना पुलिस ने बिरहाना रोड और एक्सप्रेस रोड की दो प्रतिष्ठित मानी जाने वाली दवा फर्मों से संबद्ध तीन कारोबारियों के खिलाफ जालसाजी, जीवन के लिए घातक नकली दवाओं का क्रय-विक्रय और फर्जी कागजात तैयार करने के गंभीर आरोपों में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। जांच एजेंसियों के हाथ लगे साक्ष्यों से यह खुलासा हुआ है कि इस कथित नकली वैक्सीन की खेप केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश के आगरा, हरदोई और उन्नाव जनपदों तक भेजी जा चुकी थी।
दिल्ली में पकड़ी गई खेप ने खोला गिरोह का रास्ता
इस पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश तब संभव हुआ जब राजधानी दिल्ली के ड्रग कंट्रोल विभाग ने भागीरथ पैलेस स्थित वीएस फार्मास्यूटिकल्स नामक प्रतिष्ठान पर औचक कार्रवाई की। इस छापेमारी के दौरान टीम ने 'अभयरब' ब्रांड की कथित नकली एंटी रैबीज वैक्सीन की 481 शीशियां यानी वॉयल बरामद कीं। जब बरामद खेप के बैच नंबर, चालान और खरीद स्रोतों की तकनीकी छानबीन की गई, तो इसकी सप्लाई के तार कानपुर के बिरहाना रोड स्थित न्यू आरजे एजेंसीज से जुड़े पाए गए। दिल्ली से मिली इस पुख्ता खुफिया जानकारी के तत्काल बाद कानपुर के ड्रग विभाग ने सक्रियता दिखाते हुए 23 सितंबर को बिरहाना रोड स्थित आरजे एजेंसीज के ठिकाने पर छापा मारा। हालांकि जांच दल के पहुंचने से पहले ही दुकान बंद कर संचालक मौके से नदारद हो चुके थे, जिसके चलते अधिकारियों ने दुकान को मौके पर ही सील कर दिया। इसके बाद 25 सितंबर को सील खोलकर पुनः तलाशी अभियान चलाया गया, किंतु दुकान के भीतर से वैक्सीन का कोई भौतिक भंडार नहीं मिल सका।
दस्तावेजों की पड़ताल से खुली अंतरराज्यीय सप्लाई चेन
दुकान के भीतर भौतिक रूप से वैक्सीन का स्टॉक न मिलने के बावजूद ड्रग विभाग के निरीक्षकों ने हार नहीं मानी और फर्म के खरीद-बिक्री संबंधी बही-खातों, लेजर तथा बिलिंग अभिलेखों की गहनता से जांच शुरू की। इन दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान यह चौंकाने वाला सच उजागर हुआ कि कथित अभयरब एंटी रैबीज वैक्सीन की आपूर्ति दिल्ली की थोक मंडी के अतिरिक्त आगरा, हरदोई और उन्नाव के विभिन्न मेडिकल स्टोरों को भी धड़ल्ले से की गई थी। कागजों की कड़ियों को आगे जोड़ने पर पता चला कि आरजे एजेंसीज ने इस विवादास्पद वैक्सीन की खरीद कानपुर के ही एक्सप्रेस रोड स्थित एलिक्सिर क्योर शॉप से की थी। इस सुराग के आधार पर ड्रग विभाग की टीम ने एक्सप्रेस रोड स्थित उक्त दुकान पर भी तत्काल छापा मारा, लेकिन यह प्रतिष्ठान भी पहले से ही बंद पाया गया। 25 सितंबर को दोबारा की गई जांच के दौरान यहां भी वैक्सीन की कोई शीशी हाथ नहीं लगी, जिससे यह अंदेशा गहरा गया कि कार्रवाई की भनक लगते ही स्टॉक ठिकाने लगा दिया गया था।
फर्जी इनवॉइस और अभिलेखों के जरिए चल रहा था खेल
ड्रग विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, दोनों फर्मों के वित्तीय और व्यावसायिक रिकॉर्ड के परीक्षण में ऐसे कई दस्तावेज हाथ लगे हैं, जो कथित नकली वैक्सीन की खरीद और बिक्री के व्यवस्थित नेटवर्क को पूरी तरह बेनकाब करते हैं। जांच अधिकारी अब फर्मों द्वारा जारी किए गए जाली बिलों, फर्जी चालानों और बोगस परिवहन दस्तावेजों को इस मामले का सबसे अहम साक्ष्य मानकर विस्तृत विवेचना कर रहे हैं। यद्यपि छापेमारी के दौरान भौतिक रूप से वैक्सीन बरामद नहीं की जा सकी, लेकिन कानून के तहत कागजी साक्ष्यों, जीएसटी विवरणों और सप्लाई रिकॉर्ड्स को ठोस आधार बनाते हुए पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई।
दंपति समेत तीन मुख्य संचालकों पर शिकंजा
औषधि निरीक्षक देवयानी दुबे की ओर से दी गई लिखित तहरीर के आधार पर कलक्टरगंज पुलिस ने तीन नामजद अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। नामजद आरोपियों में बिरहाना रोड स्थित आरजे एजेंसीज के संचालक दंपति बलजीत कौर और राजिन्दर सिंह शामिल हैं, जबकि तीसरा आरोपी एक्सप्रेस रोड-कैनाल पटरी, हरबंशमोहाल स्थित एलिक्सिर क्योर शॉप का संचालक तरनदीप सिंह है। डीसीपी ईस्ट सत्यजीत गुप्ता ने प्रकरण की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी, मानव जीवन के लिए संकटापन्न मिलावटी औषधियों के विक्रय और फर्जी दस्तावेज तैयार करने से जुड़ी विभिन्न सुसंगत धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि विवेचना तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है और साक्ष्य संकलन के आधार पर जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।
कुत्तों के हमलों के बीच थोक बाजार में बढ़ी मांग का उठाया फायदा
औषधि विभाग के अधिकारियों द्वारा जुटाए गए बाजार आंकड़ों से यह भी तथ्य प्रकाश में आया है कि कानपुर के बिरहाना रोड स्थित थोक दवा बाजार में हर महीने तकरीबन 5 से 6 हजार एंटी रैबीज इंजेक्शन की सामान्य खपत होती है। पिछले कुछ महीनों में आवारा और आक्रामक कुत्तों के काटने की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि देखी गई है, जिसके चलते अस्पतालों और खुदरा दुकानों में इस टीके की मांग में भारी उछाल आया था। जांच एजेंसियां इस गंभीर पहलू की भी बारीकी से पड़ताल कर रही हैं कि क्या दवा माफिया ने बाजार में मांग और आपूर्ति के अंतर अथवा संभावित कृत्रिम कमी का अनुचित लाभ उठाने के लिए यह नकली नेटवर्क सक्रिय किया था। इसके साथ ही इस बात की भी सटीक गणना की जा रही है कि नकली टीके की कितनी कुल खेप बाजार में खपाई गई और यह किन-किन सुदूर ग्रामीण व शहरी प्राथमिक केंद्रों तक पहुंची।
बिरहाना रोड के दवा कारोबार पर पहले भी लग चुके हैं दाग
कानपुर के दवा बाजार में नकली या संदिग्ध औषधियों के अवैध धंधे का यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि पूर्व में भी ड्रग विभाग यहां कई बड़ी कार्रवाइयां कर चुका है। बीते वर्ष अक्टूबर माह में इसी बिरहाना रोड की एक अन्य दवा फर्म पर मारे गए छापे के दौरान करीब पांच लाख रुपये मूल्य की संदिग्ध नकली दवाएं जब्त की गई थीं। उस समय की गई फोरेंसिक जांच में यह सामने आया था कि गिरोह दवाओं पर हूबहू असली जैसी एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और अधिकतम खुदरा मूल्य अंकित कर बाजार में उतार रहा था। केवल इतना ही नहीं, नशीले कफ सिरप के तौर पर इस्तेमाल होने वाले प्रतिबंधित कोडीन सिरप की अवैध तस्करी के मामले में भी कानपुर से देश के विभिन्न राज्यों तक फैले विशाल नेटवर्क की जांच हुई थी। अब इंसानी जान बचाने वाली एंटी रैबीज जैसी अति संवेदनशील वैक्सीन में इस तरह के गोरखधंधे के उजागर होने से दवा व्यापार की समग्र निगरानी व्यवस्था, ऑडिट तंत्र और ड्रग इंस्पेक्टरों की फील्ड चेकिंग पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।





















