जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने और अलगाववादी मुहिम को आर्थिक मदद पहुंचाने के मामले में कानूनी शिकंजा और कस गया है। राष्ट्रीय राजधानी की एक विशेष अदालत ने अलगाववादी चेहरे यासीन मलिक और अन्य छह आरोपियों पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के कड़े प्रावधानों के तहत मुकदमा चलाने की हरी झंडी दे दी है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, सीमा पार बैठे पाकिस्तानी आकाओं और उनके खुफिया नेटवर्क ने हवाला चैनलों के माध्यम से भारी भरकम रकम इन लोगों तक पहुंचाई थी, जिसका इस्तेमाल घाटी में देश विरोधी गतिविधियों को हवा देने के लिए किया गया।
साक्ष्यों के आधार पर अदालत का कड़ा रुख
पटियाला हाउस स्थित विशेष अदालत के न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने मामले में पेश किए गए तमाम दस्तावेजी और डिजिटल सबूतों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत का स्पष्ट मानना है कि जांच एजेंसी द्वारा जुटाए गए साक्ष्य आरोपियों पर मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मुकदमा चलाने के लिए पूरी तरह पर्याप्त हैं। इन सबूतों से यह साफ संकेत मिलता है कि गैरकानूनी स्रोतों से आई विदेशी संपत्ति को व्यवस्थित रूप से खपाया गया था।
किन अन्य आरोपियों पर तय होंगे आरोप
इस बहुचर्चित मामले में यासीन मलिक के अतिरिक्त छह अन्य नाम शामिल हैं, जिनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी। इनमें प्रमुख रूप से कश्मीरी व्यवसायी जहूर अहमद शाह वताली, इंजीनियर रशीद के नाम से चर्चित अब्दुल रशीद शेख, अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह और मसरत आलम भट शामिल हैं। इनके साथ ही नवल किशोर कपूर तथा ट्राइसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड नामक कॉरपोरेट इकाई के खिलाफ भी आपराधिक धाराओं में आरोप औपचारिक रूप से तय किए जाएंगे।



















