मिजोरम में सिल्क उद्योग को नई ऊंचाइयां देने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने रेशम उत्पादन विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राज्य में एक प्रमुख सिल्क उत्पादक राज्य के रूप में उभरने की पूरी क्षमता मौजूद है। इस सेक्टर की संभावनाओं को पूरी तरह से भुनाने के लिए राज्य सरकार भविष्य में बड़े पैमाने पर कदम उठाने जा रही है।
विकसित मिजोरम 2047 का लक्ष्य
मुख्यमंत्री कार्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में सोमवार को आयोजित इस बैठक के दौरान लालदुहोमा ने स्पष्ट किया कि रेशम उत्पादन को मजबूत करना राज्य के विकसित मिजोरम 2047 के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम है। वर्तमान में हजारों की संख्या में स्थानीय किसान इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और अपनी आजीविका चला रहे हैं।
किसानों और अधिकारियों की समस्याएं
मुख्यमंत्री ने विभाग को रेशम उत्पादन के विकास के लिए एक ठोस परियोजना तैयार करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही मैदानी स्तर पर अधिकारियों और किसानों के सामने आने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए विशेष उपाय तलाशने को कहा गया है। उन्होंने जिला स्तर के अधिकारियों से खुलकर अपनी जरूरतें और चुनौतियां सामने रखने को कहा, ताकि सामूहिक चर्चा के जरिए कार्यक्रमों की प्रभावशीलता को और बढ़ाया जा सके।
उत्पादन आंकड़े और खरीद मूल्य
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार मिजोरम में कुल 7,040 रेशम किसान हैं। राज्य ने इस साल सितंबर तक 53.826 मीट्रिक टन कोकून का उत्पादन किया है। किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए सरकार ने कोकून का खरीद मूल्य 300 रुपये से बढ़ाकर 350 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया है।
बुनियादी ढांचे और उपकरणों की मांग
समीक्षा बैठक के दौरान रेशम की कीट पालन से जुड़े किसानों द्वारा उत्पादित कोकून को सुरक्षित रखने के लिए रेफ्रिजरेटर की आवश्यकता पर विशेष चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस उपकरण की खरीद के लिए योजना विभाग को एक प्रस्ताव भेजा जाए ताकि वित्तीय सहायता मिल सके।
मैनपावर की कमी और भर्ती नियम
बैठक में विभाग के भीतर कर्मचारियों की भारी कमी का मुद्दा भी उठाया गया। लालदुहोमा ने आवश्यक कर्मियों, विशेषकर रियरर्स की जल्द भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए भर्ती नियमों में जरूरी संशोधन करने का सुझाव दिया। साथ ही अन्य महत्वपूर्ण पदों के लिए भी प्रस्ताव जल्द से जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
केंद्रीय और राज्य स्तर की परियोजनाएं
इस समय मिजोरम में कई केंद्रीय क्षेत्र की योजनाएं सफलतापूर्वक चलाई जा रही हैं। एरी कोकून एंड यार्न प्रोडक्शन क्लस्टर डेवलपमेंट कार्यक्रम के तहत आइजोल, लुंलेई और साइतुअल जिलों के 120 किसानों को कवर किया जा रहा है। इसके अलावा इंटीग्रेटेड मुगा सेरिकल्चर डेवलपमेंट इन मिजोरम कार्यक्रम आइजोल और साइतुअल के 70 परिवारों को लाभान्वित कर रहा है। आइजोल और साइतुअल में कॉम्प्रिहेंसिव मलवरी वैल्यू चेन एन्हांसमेंट प्रोजेक्ट भी लागू है, जिससे 60 किसानों को फायदा मिल रहा है।
हैंडहोल्डिंग पहल और विशेष उपलब्धियां
राज्य की हैंडहोल्डिंग पहल के अंतर्गत दो चरणों में 59 लाभार्थियों को मुख्यमंत्री स्पेशल पैकेज का लाभ मिला है, जबकि 10 लोगों को ऋण उपलब्ध कराया गया है। इनमें से लगभग 70 प्रतिशत लाभार्थी अब कोकून उत्पादन के चरण तक पहुंच चुके हैं। तौइपुई नॉर्थ-II की रहने वाली ह्रंगन्गैहकिमी को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए मुख्यमंत्री पुरस्कार 2026 से नवाजा गया है। इसके अलावा हनाथियाल जिले के तुइपुई डी की लालछंदामी को केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा 20 सितंबर को उसके 77वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान बेस्ट अचीवर अवार्ड – एरी अडॉप्टेड सीड रियरर से सम्मानित किया गया।
विभाग की प्रतिबद्धता और आगे की राह
रेशम मंत्री लालथंसंगा ने मुख्यमंत्री द्वारा समीक्षा बैठक बुलाए जाने पर उनका आभार व्यक्त किया और कहा कि विभाग इस क्षेत्र को विकसित करने के लिए नए सिरे से प्रयास कर रहा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि अधिकारी और किसान दोनों ही मिजोरम में रेशम उत्पादन का दायरा बढ़ाने के लिए पूरी तरह से प्रेरित हैं।



















