दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे धरना प्रदर्शन स्थल के आसपास मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करने के सरकारी आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट शुक्रवार को सुनवाई करने के लिए राजी हो गया है। याचिकाकर्ता के वकील ने मामले की संवेदनशीलता और तात्कालिकता को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष इसकी त्वरित मेंशनिंग की थी और आज ही तत्काल सुनवाई की मांग की थी। न्यायालय ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले को शुक्रवार की कार्यसूची में शामिल कर लिया है ताकि इस विवादास्पद प्रतिबंध पर तत्काल विचार किया जा सके।
मध्य दिल्ली में मोबाइल इंटरनेट निलंबन को दी गई चुनौती
याचिका में केंद्र सरकार के उस फैसले को सीधे तौर पर चुनौती दी गई है जिसके तहत टेलीकॉम कंपनियों को मध्य दिल्ली के कुछ विशिष्ट हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्देश दिया गया था। इसके साथ ही प्रदर्शन स्थलों के आसपास प्रशासन द्वारा लगाए गए अन्य तरह के कड़े प्रतिबंधों और बैरिकेडिंग को भी इस याचिका के माध्यम से अदालत में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि युवाओं के चल रहे देशव्यापी प्रदर्शनों के बीच इस तरह से इंटरनेट बंद करने का आदेश पूरी तरह से अनुचित है और इससे आम लोगों के साथ-साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अधिकार भी प्रभावित हो रहे हैं।
सीजेपी और सरकार के बीच कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में होगी बातचीत
इस कानूनी लड़ाई के समानांतर, जंतर-मंतर पर जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए शुक्रवार दोपहर साढ़े 12 बजे एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। यह बातचीत कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सीजेपी (CJP) और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच आयोजित की जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि इस द्विपक्षीय चर्चा के माध्यम से विरोध प्रदर्शन को लेकर कोई सकारात्मक समाधान निकाला जा सकता है। इससे पहले बीते 24 घंटों के भीतर सरकार की ओर से सीजेपी (CJP) को बातचीत के लिए चार बार आधिकारिक प्रस्ताव भेजे गए थे। शुरुआती प्रस्तावों में सरकार ने जेपी नड्डा के आवास या उनके कार्यालय पर आकर चर्चा करने की बात कही थी। लेकिन सीजेपी (CJP) ने इसे ठुकराते हुए स्पष्ट किया कि यदि सरकार सच में बातचीत करना चाहती है, तो उसके प्रतिनिधि स्वयं जंतर-मंतर आएं या फिर किसी पूरी तरह से न्यूट्रल जगह पर वार्ता आयोजित की जाए। केंद्र सरकार ने इस शर्त को स्वीकार कर लिया और बैठक के लिए कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के रूप में एक निष्पक्ष स्थल तय किया गया।
पेपर लीक के खिलाफ कड़ा कानून बनाने की तैयारी में मोदी कैबिनेट
उल्लेखनीय है कि देश में हाल ही में हुए पेपर लीक के मामलों को लेकर जंतर-मंतर से लेकर संसद तक सरकार पर भारी राजनीतिक और सामाजिक दबाव देखा जा रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'एग्जाम रिफॉर्म और ट्रांसफॉर्म' एक्शन प्लान पूरी तरह से तैयार हो चुका है। आज होने वाली कैबिनेट की बैठक में पेपर लीक से जुड़े इस अत्यंत सख्त विधेयक पर मुहर लगने की पूरी संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के तमाम छात्रों को यह दृढ़ भरोसा दिलाया है कि उनकी सरकार पेपर लीक जैसी अनियमितताओं को रोकने के लिए एक बेहद मजबूत और फुलप्रूफ कानून लेकर आ रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश में छात्रों को दिया भरोसा
बीती रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए देश के युवाओं को आश्वस्त किया कि नए प्रस्तावित कानून के तहत पेपर लीक से जुड़े अपराधों के लिए बेहद सख्त सजा के प्रावधान किए जा रहे हैं। उन्होंने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए अगले हफ्ते संसद में एक विशेष विधेयक पेश किया जाएगा। सरकार की प्राथमिकता इस विधेयक को जल्द से जल्द संसद के दोनों सदनों से पारित कराने की होगी। इसके अलावा, जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने वाले युवाओं के प्रति भी केंद्र सरकार का रुख काफी नरम दिखाई दे रहा है। सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई या पुलिस केस दर्ज न करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।



















