देशभर में फैले संगठित साइबर अपराधियों के तंत्र को ध्वस्त करने के लिए एक व्यापक अखिल भारतीय कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। 28 और 29 अक्टूबर को चलाए गए ऑपरेशन साइहॉक 6.0 के तहत पुलिस टीमों ने कुल 944 व्यक्तियों को हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया, जबकि 788 अन्य लोगों को कानूनी रूप से बाउंड डाउन किया गया। इस व्यापक जांच अभियान के दौरान 2,081 लोगों को कानूनी नोटिस भी थमाए गए। दो दिवसीय इस विशेष अभियान के तहत कुल 1,032 आपराधिक मामलों में सीधी कानूनी कार्रवाई दर्ज की गई, जिससे देशभर में दर्ज 4,002 साइबर शिकायतों को सुलझाने में बड़ी कामयाबी मिली। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इन सभी शिकायतों में कुल मिलाकर लगभग 479.14 करोड़ रुपये की वित्तीय ठगी शामिल थी।
राष्ट्रीय स्तर पर दबिश और जांच का दायरा
इस बड़े अभियान का समन्वय दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ (इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस) यूनिट के विशेष सेल द्वारा किया गया, जिसमें राजधानी के सभी 15 जिलों की पुलिस टीमें और क्राइम ब्रांच पूरी तरह शामिल थीं। आईएफएसओ यूनिट के जॉइंट कमिश्नर चिन्मय बिस्वाल के अनुसार, दिल्ली भर में 4,979 संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ और तकनीकी पड़ताल की गई। पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगालने के लिए 283 समर्पित पुलिस टीमों का गठन किया गया, जिन्हें 17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी के लिए रवाना किया गया था।
पुलिस रणनीति में इस बार बुनियादी बदलाव किया गया था। कार्रवाई केवल अंतिम स्तर पर कॉल करने वाले ठगों तक सीमित नहीं रखी गई, बल्कि धोखाधड़ी को संभव बनाने वाले संपूर्ण सहायक पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रहार किया गया। इस चक्र में अवैध धन मंगवाने के लिए फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले सिंडिकेट, कागजी कंपनियों के जरिए चालू खाते खुलवाने वाले बिचौलिए, सिस्टम में सेंध लगाने वाले बैंक कर्मचारी, अवैध रूप से सिम कार्ड एक्टिवेट करने वाले टेलीकॉम एजेंट और फर्जी कॉल सेंटर संचालित करने वाले मास्टरमाइंड शामिल थे।
नकदी, आभूषण और क्रिप्टो में रकम का रूपांतरण
जांच में खुलासा हुआ कि धोखाधड़ी से जुटाई गई रकम को सुरक्षित निकालने के लिए एक बेहद संगठित गिरोह काम कर रहा था। ठगी का धन जैसे ही खातों में आता, उसे तुरंत एटीएम निकासी के जरिए नकदी में बदला जाता या फिर उसे सोने के आभूषणों और यूएसडीटी (टेथर) जैसी क्रिप्टोकरेंसी में स्थानांतरित कर दिया जाता था। साइबर अपराधी आम नागरिकों या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के नाम पर बैंक खाते और सिम कार्ड हासिल करते थे, जिनका दुरुपयोग बाद में पीड़ितों को ठगने में किया जाता था।
छापेमारी के दौरान पुलिस टीमों ने भौतिक और डिजिटल साक्ष्यों का बड़ा जखीरा बरामद किया। जब्त की गई सामग्री में 1,037 मोबाइल हैंडसेट, 1,301 सिम कार्ड, 106 लैपटॉप और कंप्यूटर सिस्टम, 397 सक्रिय एटीएम कार्ड, 244 से अधिक बैंक वेलकम किट और पासबुक तथा 325 आधार कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा 6 अत्याधुनिक सिम बॉक्स उपकरण, 11 चार पहिया गाड़ियां, 10 दोपहिया वाहन और 37.67 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद की गई। इसके साथ ही कई ग्राम सोना और यूएसडीटी डिजिटल मुद्रा भी जब्त की गई है।
राज्यों में छापे और संगठित गिरोहों का पर्दाफाश
अपराधियों की धरपकड़ के लिए पुलिस टीमों ने झारखंड, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, गुजरात, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, कर्नाटक और तमिलनाडु में सघन तलाशी अभियान चलाए। इस दौरान कई राज्यों में फैले विभिन्न प्रकार के धोखाधड़ी मॉडलों का भंडाफोड़ हुआ। झारखंड के धनबाद में कुख्यात जामताड़ा नेटवर्क से जुड़े क्रेडिट कार्ड फ्रॉड गिरोह को पकड़ा गया। वहीं छत्तीसगढ़ के दुर्ग और भिलाई क्षेत्रों में वैवाहिक विज्ञापनों और शादी के झूठे वादों के सहारे ठगी करने वाले गिरोह पर शिकंजा कसा गया।
उत्तर प्रदेश के कानपुर और ग्रेटर नोएडा में उन गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई की गई जो ठगी के पैसों के लेन-देन के लिए म्यूल बैंक खाते सप्लाई करते थे। मुंबई, लखनऊ, राजस्थान और पंजाब से भी ऐसे कई वित्तीय दलालों को पकड़ा गया जो साइबर ठगों को भारी कमीशन के बदले बैंक खातों का बंदोबस्त कराते थे। जांच में पाया गया कि ये गिरोह फर्जी कंपनियां कागजों पर पंजीकृत कराते थे और बैंकों में चालू खाते खुलवाकर उन्हें सक्रिय साइबर सिंडिकेट को किराए या कमीशन पर सौंप देते थे।
बैंककर्मियों की मिलीभगत और ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट
इस जांच में संस्थागत खामियों और मिलीभगत पर भी कड़ा रुख अपनाया गया। उत्तर-पश्चिम जिले में बैंक अधिकारियों की संलिप्तता की गहन पड़ताल की गई, जिसके बाद ऐसे बैंक कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया जो नियमों को ताक पर रखकर ठगी के लिए बैंक खाते खुलवाने में अपराधियों की सक्रिय मदद कर रहे थे। दक्षिण जिले में एक अधिकृत सर्विस एजेंसी के कर्मचारियों पर ग्राहकों के गोपनीय डेटा का दुरुपयोग करने के आरोप में शिकंजा कसा गया। उधर आउटर-नॉर्थ जिले में फर्जी दस्तावेजों के जरिए दूसरों के नाम पर सिम कार्ड जारी करने वाले नेटवर्क को पकड़ा गया।
पुलिस कार्रवाई के दायरे में कई प्रकार के साइबर अपराध शामिल रहे। इनमें फर्जी केवाईसी वेरिफिकेशन कॉल, जाली बैंकिंग और वित्तीय मोबाइल ऐप्लिकेशन, फिशिंग मैसेज, फर्जी ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल और आकर्षक रिटर्न के नाम पर फर्जी निवेश योजनाएं शामिल थीं। इसके साथ ही फर्जी शादी के रिश्ते बनाकर ठगने वाले तथा असुरक्षित ऑनलाइन लोन ऐप के माध्यम से पीड़ितों की निजी तस्वीरें हासिल कर उन्हें ब्लैकमेल करने वाले जबरन वसूली गिरोहों को भी ध्वस्त किया गया।
चलती गाड़ियों से संचालित कॉल सेंटर और सिम बॉक्स
राष्ट्रीय राजधानी के भीतर अवैध रूप से संचालित फर्जी कॉल सेंटरों पर भी कड़ा प्रहार किया गया। द्वारका, दक्षिण-पश्चिम और पूर्वी जिलों में ऐसे कई केंद्रों का भंडाफोड़ हुआ, जो सामान्य नागरिकों और छोटे व्यवसायियों को कॉल कर निशाना बना रहे थे। पूर्वी जिले में पुलिस को चकमा देने की एक अनोखी तरकीब सामने आई, जहां एक फर्जी कॉल सेंटर को चलती हुई चार पहिया गाड़ी के भीतर से चलाया जा रहा था ताकि स्थिर लोकेशन ट्रेस होने से बचा जा सके और पुलिस की नजरों से दूर रहा जा सके।
इसके अलावा आईएफएसओ यूनिट ने कई सिम बॉक्स जब्त किए, जिनका उपयोग इंटरनेट कॉलिंग को स्थानीय जीएसएम कॉल में बदलकर एक साथ हजारों फर्जी कॉल्स करने के लिए किया जाता था। जांच एजेंसियों ने टेलीग्राम चैनलों पर भी नकेल कसी, जिनका उपयोग क्रिप्टोकरेंसी के अवैध लेन-देन, विदेशी ई-सिम की बिक्री और सक्रिय बैंक खातों की खुली नीलामी के लिए किया जा रहा था। साथ ही सोशल मीडिया पर प्रसारित फर्जी निवेश लिंक को भी ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
डेटा विश्लेषण और साइबर समन्वय पोर्टल
इस विशाल राष्ट्रव्यापी अभियान की सफलता के पीछे आधुनिक डेटा एनालिटिक्स और अंतर-एजेंसी समन्वय की अहम भूमिका रही। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के साथ-साथ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी), समन्वय पोर्टल और प्रतिबिंब पोर्टल से प्राप्त डेटा का गहन विश्लेषण किया गया। इन प्लेटफॉर्म्स की मदद से उन मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और संदिग्ध डिजिटल पहचानों को मैप किया गया जो देशभर में दर्ज अनगिनत प्राथमिकियों से जुड़े हुए थे। इसके बाद सटीक सूचनाओं के आधार पर पुलिस टीमों ने लक्षित स्थानों पर दबिश दी।
इस अभियान की एक बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें दिल्ली से बाहर के अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज 3,275 शिकायतों को भी सीधे तौर पर शामिल करके निस्तारित किया गया। जून 2026 में संचालित पिछले संस्करण यानी ऑपरेशन साइहॉक 5.0 की तुलना में इस बार दर्ज की गई नई एफआईआर में लगभग 24 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जबकि सुलझाई गई साइबर ठगी की शिकायतों की संख्या में 46 प्रतिशत से अधिक का उछाल दर्ज किया गया।
ऑपरेशन साइहॉक के अब तक संपन्न हुए सभी 6 चरणों को मिलाकर 3,300 से अधिक अपराधियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि आधुनिक साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए सिर्फ कॉल करने वाले मोहरों को पकड़ना पर्याप्त नहीं है। इस संगठित अपराध को हमेशा के लिए समाप्त करने के लिए बैंक खाते, फर्जी सिम कार्ड, अवैध कॉल सेंटर और धन को सफेद करने वाले मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की पूरी श्रृंखला को जड़ से काटना अनिवार्य है। वर्तमान में पुलिस दल बरामद संपत्तियों का विस्तृत वित्तीय ऑडिट कर रहे हैं, ताकि विदेशी धरती से नेटवर्क चला रहे आकाओं की पहचान की जा सके और पीड़ित नागरिकों की गाढ़ी कमाई वापस दिलाई जा सके।



















