तेजी से बदलते मौसम में जब कभी तेज धूप निकलती है और कभी अचानक बारिश होने लगती है, तो घरों में एयर कंडीशनर का इस्तेमाल काफी बढ़ जाता है। नोएडा में 34 डिग्री सेल्सियस की तेज धूप के कुछ ही देर बाद बारिश की संभावना बनने जैसे मिजाज में एसी पर भारी दबाव पड़ता है। तेज गर्मी लगते ही लोग अक्सर अपने एसी को सीधे 18 डिग्री सेल्सियस पर सेट कर देते हैं, जिससे मशीन पर अत्यधिक लोड आता है। जब बाहर 40 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा की लू चल रही हो, तब एसी को 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच चलाना सबसे मुफीद होता है। इस संतुलन से कंप्रेसर पर गैर-जरूरी लोड नहीं पड़ता और बिजली का बिल भी नियंत्रण में रहता है। इसके साथ ही बेहद कम तापमान पर रहने के बाद अचानक बाहर निकलने पर शरीर को हीट शॉक लगने का खतरा रहता है, जिससे स्वास्थ्य बिगड़ सकता है।
भीषण गर्मी और लू में सही कूलिंग तकनीक
जब बाहर गर्म हवाएं चल रही हों, तो शुरुआत में पंखे की रफ्तार यानी फैन स्पीड को हाई पर सेट करना चाहिए। तेज हवा पूरे कमरे के कोने-कोने में ठंडक को जल्दी फैला देती है। एक बार जब कमरा आरामदायक तापमान पर पहुंच जाए, तब फैन स्पीड को मीडियम पर कर देना बेहतर रहता है। लू के दिनों में केवल कूल मोड का इस्तेमाल करना चाहिए। इस दौरान ड्राई मोड चलाने से बचना चाहिए, क्योंकि लू के मौसम में प्राकृतिक हवा पहले से बहुत शुष्क होती है। यदि ऐसे में ड्राई मोड चलाया जाए तो कमरे की हवा जरूरत से ज्यादा सूख जाती है, जिसका सीधा असर त्वचा और गले पर पड़ता है।
कमरे के भीतर ठंडक को देर तक बनाए रखने के लिए खिड़कियों और दरवाजों को पूरी मजबूती से बंद रखना आवश्यक है। जिन दिशाओं से कमरे में सीधी धूप आती है, वहां मोटे पर्दे लगाने से सूरज की तपिश अंदर नहीं पहुंचती। अगर आप दफ्तर या बाहर से घर लौट रहे हों, तो स्मार्ट टाइमर का उपयोग कर सकते हैं। घर पहुंचने से लगभग 20 से 30 मिनट पहले एसी ऑन होने का शेड्यूल तय करने से घर आते ही ठंडक मिलती है। इस व्यवस्था से जल्दबाजी में एसी को न्यूनतम तापमान पर चलाने की मजबूरी नहीं रहती।
बारिश और उमस के दौरान ड्राई मोड की उपयोगिता
बारिश शुरू होते ही बाहरी तापमान गिरकर 25 से 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास आ जाता है, लेकिन वातावरण में नमी बहुत बढ़ जाती है। ऐसी उमस भरी परिस्थितियों में ड्राई मोड सबसे असरदार साबित होता है। अधिकांश रिमोट कंट्रोल पर इस फीचर को पानी की बूंद के निशान से दर्शाया जाता है। बारिश के मौसम में एसी को 28 डिग्री सेल्सियस पर सेट करना चाहिए या फिर उसे सीधे ड्राई मोड पर चलाना चाहिए। यह प्रक्रिया कमरे की चिपचिपाहट को सोख लेती है और तापमान को बहुत ज्यादा गिराए बिना शरीर को सुकून देती है। इस मोड के चलने से बिजली की खपत भी काफी कम रहती है।
बरसात के दिनों में अक्सर बिजली की आवाजाही लगी रहती है और वोल्टेज में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इस तरह के उतार-चढ़ाव से उपकरण को सुरक्षित रखने के लिए एक उच्च गुणवत्ता वाला वोल्टेज स्टेबलाइजर लगवाना चाहिए। यदि बिजली अचानक चली जाए और तुरंत लौट आए, तो मशीन को फौरन चालू नहीं करना चाहिए। कंप्रेसर के भीतर दबाव को स्थिर होने के लिए कम से कम 5 मिनट का इंतजार करना जरूरी है। इसके अलावा बारिश शुरू होते ही कमरे की खिड़कियां तुरंत बंद कर देनी चाहिए, ताकि बाहरी नमी भीतर न आए और कंप्रेसर को अतिरिक्त मशक्कत न करनी पड़े।
बिजली की बचत और उपकरण की देखभाल
मौसम चाहे लू का हो या बारिश का, 24 डिग्री सेल्सियस पर एसी चलाना सबसे किफायती माना जाता है। शोध के अनुसार तापमान को हर 1 डिग्री सेल्सियस बढ़ाने पर करीब 6 प्रतिशत तक बिजली की बचत की जा सकती है। रात के समय स्लीप मोड का चयन करना चाहिए, जो पूरी रात धीरे-धीरे तापमान को बढ़ाता रहता है। इससे सुबह के समय ठंडक से परेशानी नहीं होती और बिजली की खपत भी घटती है। इसके अतिरिक्त, एयर फिल्टर को हर दो सप्ताह में साफ करना जरूरी है, क्योंकि गंदा फिल्टर होने पर एसी 15 से 20 फीसदी तक अधिक बिजली खींच सकता है।
मौसम बदलने पर अपनी दैनिक उपयोग की आदतों में भी बदलाव करना चाहिए। यदि तेज लू के बाद अचानक बारिश शुरू हो जाए, तो पहले एसी को बंद कर दें और 10 मिनट रुकने के बाद उसे ड्राई मोड पर चालू करें। जब बारिश बंद हो जाए और दोबारा लू चलने लगे, तो वापस कूल मोड पर चले जाएं। आउटडोर यूनिट पर सीधी धूप न पड़ने देने के लिए वहां छाया का प्रबंध करने से कूलिंग क्षमता बेहतर रहती है। बदलते मौसम में गैस रिसाव की समस्या भी सामने आ सकती है, ऐसे में कूलिंग कम महसूस होने पर तुरंत किसी पेशेवर तकनीशियन से जांच करानी चाहिए। आउटडोर यूनिट के आसपास बारिश का पानी जमा न होने दें और लू के समय 8 घंटे से ज्यादा लगातार चलाने पर मशीन को 1 घंटे का आराम देना उसकी उम्र बढ़ाता है।



















