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घर बनवाते समय मोरंग की छनाई से निकले कंकड़-पत्थर न फेंकें, इन कामों में बढ़ा देंगे मजबूती और बचाएंगे पैसाDIY
15 जून 2026, 9:33 am (45 दिन पहले)· 1

घर बनवाते समय मोरंग की छनाई से निकले कंकड़-पत्थर न फेंकें, इन कामों में बढ़ा देंगे मजबूती और बचाएंगे पैसा

मकान बनवाते वक्त मोरंग छानने पर निकलने वाले छोटे कंकड़ और पत्थर अक्सर कूड़े में चले जाते हैं, जबकि इन्हें गिट्टी की जगह इस्तेमाल कर फर्श और छज्जे को मजबूत बनाया जा सकता है और निर्माण की लागत भी घटाई जा सकती है।

पक्का मकान खड़ा करते समय मोरंग एक ऐसी सामग्री है जिसके बिना काम अधूरा रहता है। दीवारों की चुनाई से लेकर प्लास्टर, फर्श और छत डालने तक — हर चरण में इसकी जरूरत पड़ती है। मगर इसी मोरंग को छानते वक्त जो छोटे-छोटे कंकड़ और पत्थर अलग निकल आते हैं, उन्हें ज्यादातर लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं। हकीकत यह है कि यही फेंका जाने वाला हिस्सा घर के कई कामों में गिट्टी का काम कर सकता है, जिससे ढांचा मजबूत भी बनता है और जेब पर बोझ भी कम पड़ता है।

आखिर मोरंग छानी क्यों जाती है

प्लास्टर के दौरान दीवारों की चुनाई के लिए मोरंग को अक्सर लोहे के झरने से छाना जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि दीवार और फर्श पर प्लास्टर करते समय सतह पर चिकनाहट की कोई कमी न रहे। इसी छनाई की प्रक्रिया में मोरंग अलग हो जाती है और उसमें मौजूद छोटे-बड़े पत्थर तथा कंकड़ अपने आप अलग निकल आते हैं। यही कंकड़ बाद में कई जगह काम आते हैं और इन्हें संभालकर रखने से अतिरिक्त गिट्टी खरीदने की जरूरत घट जाती है, जिससे सीधे-सीधे पैसे की बचत होती है।

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फर्श डलवाते समय कैसे करें इस्तेमाल

जब घर या किसी दूसरी जगह फर्श डलवाई जा रही हो, तो उसमें मोरंग की चालन यानी छनाई से निकले इन कंकड़ों को मिलाया जा सकता है। गिट्टी, मोरंग और मोरंग की चालन वाले छोटे कंकर जब आपस में मिलते हैं तो सीमेंट को और ज्यादा पकड़ देते हैं, जिससे फर्श कहीं अधिक टिकाऊ बनती है। इस तरह जो चालन कूड़े में जाती, उसका भी सही उपयोग हो जाता है।

अनुपात का रखें खास ध्यान

एक्सपर्ट योगेश कुमार TrendKia से बातचीत में बताते हैं कि फर्श में मोरंग की चालन से निकले कंकड़ों और पत्थरों का इस्तेमाल करते समय अनुपात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक अगर मसाले में 3 तसला गिट्टी डाली जा रही है, तो उसमें 2 तसला गिट्टी और 1 तसला मोरंग की चालन मिलानी चाहिए। वे आगाह करते हैं कि मोरंग की चालन ज्यादा मात्रा में नहीं मिलानी चाहिए, वरना मसाला कमजोर पड़ सकता है।

छज्जा बनाने में भी आती है काम

राजगीर इंद्रमणि कोरी बताते हैं कि मोरंग की चालन से निकले छोटे कंकरों का प्रयोग छज्जा बनाने में किया जा सकता है। उनके अनुसार जब छत पर लेंटर डाला जा रहा हो, तब गिट्टी के साथ-साथ मोरंग की चालन भी मसाले में मिलाई जा सकती है। इससे छज्जा और अधिक मजबूत बनकर तैयार होता है। यानी थोड़ी सी समझदारी से वही चीज, जिसे कचरा मान लिया जाता है, घर की मजबूती में अहम भूमिका निभा देती है।

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