रात को सोने से पहले किचन की सिंक साफ रखना, स्टोव को सूखा छोड़ना और एक कोने में तेजपत्ता रख देना, कॉकरोच को रातोंरात किचन से बाहर निकालने के लिए काफी हो सकता है, वो भी बिना किसी केमिकल स्प्रे के। दरअसल हर घर में किचन को साफ-सुथरा रखना पहली प्राथमिकता होती है, फिर भी कई बार वहां कॉकरोच निकल आते हैं। ये सिर्फ गंदगी नहीं फैलाते, बल्कि खाने-पीने की चीजों को दूषित कर कई तरह के संक्रमण की वजह भी बन सकते हैं। इनसे छुटकारा पाने के लिए ज्यादातर लोग महंगे केमिकल स्प्रे और गोलियां खरीद लाते हैं, जबकि घर में मौजूद कुछ सामान्य चीजें भी इस समस्या को काफी हद तक सुलझा सकती हैं।
रात की सफाई है सबसे बड़ा हथियार
कॉकरोच भगाने का सबसे जरूरी उपाय है, सोने से पहले किचन को अच्छी तरह साफ करना। सिंक, गैस स्टोव और स्लैब पर बचा हुआ खाना या पानी की एक बूंद भी न छोड़ें, क्योंकि यही चीजें कॉकरोच को सबसे ज्यादा खींचती हैं। जिस घर में रोज नियमित सफाई होती है और किचन सूखा रहता है, वहां कॉकरोच पनपने की गुंजाइश खुद-ब-खुद कम हो जाती है।
तेजपत्ता और लौंग की तेज खुशबू से भागते हैं कॉकरोच
किचन के कोनों में, सिंक के आसपास और जिन जगहों पर कॉकरोच ज्यादा दिखते हैं, वहां तेजपत्ता या लौंग रखा जा सकता है। इनकी तीखी खुशबू कॉकरोच को बिल्कुल पसंद नहीं आती, इसलिए वे धीरे-धीरे उन जगहों से दूर रहने लगते हैं। खास बात यह है कि यह तरीका पूरी तरह प्राकृतिक है, इसमें किसी भी केमिकल की जरूरत नहीं पड़ती। यही वजह है कि इसे घरों में अपनाने के लिए एक आसान और सुरक्षित उपाय माना जाता है।
कूड़ेदान और नमी पर रखें पूरी नजर
रात को सोने से पहले कूड़ेदान खाली करना और उस पर हमेशा ढक्कन लगाकर रखना भी उतना ही जरूरी है। साथ ही सारे बर्तन धोकर रखें और किचन का फर्श गीला न छोड़ें। असल में कॉकरोच नमी वाली जगहों पर तेजी से पनपते हैं, इसलिए किचन को साफ के साथ-साथ सूखा रखना ही उनकी संख्या घटाने का सबसे कारगर तरीका माना जाता है। इन आदतों को अगर रोज दोहराया जाए, तो कॉकरोच की समस्या धीरे-धीरे काबू में आ जाती है।
कब जरूरत पड़ेगी एक्सपर्ट की मदद
अगर रोजाना यह आसान आदतें अपनाई जाएं, तो किचन में कॉकरोच की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। नियमित सफाई, सूखा माहौल और प्राकृतिक उपाय अपनाने से कॉकरोच के पनपने की संभावना घट जाती है। हालांकि अगर कॉकरोच की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ जाए और घरेलू नुस्खों से कोई खास असर न दिखे, तो विशेषज्ञ की सलाह लेना या सुरक्षित तरीके से पेस्ट कंट्रोल करवाना ही बेहतर विकल्प बचता है।




















