केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने एक बेहद नाजुक समय पर शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार संभाल लिया है, जब देश की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली गंभीर जांच के घेरे में है। पदभार संभालते ही नए मंत्री ने प्रशासनिक स्तर पर अपनी संजीदगी और सक्रियता दिखाते हुए बिना किसी देरी के काम शुरू कर दिया। उन्होंने रविवार की छुट्टी के दिन भी मंत्रालय पहुंचकर वरिष्ठ अधिकारियों और शीर्ष नौकरशाहों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक बुलाई। इस त्वरित कदम से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर बेहद गंभीर है और बिना कोई समय गंवाए तत्काल सुधार की दिशा में कदम बढ़ाना चाहती है।
छात्र आंदोलन और संसद में हंगामे के बाद नेतृत्व परिवर्तन
शिक्षा मंत्रालय में यह महत्वपूर्ण बदलाव देश में चल रहे भारी राजनीतिक और सामाजिक तनाव के बीच हुआ है। परीक्षाओं की शुचिता और पारदर्शिता को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में पिछले 26 दिनों से छात्र संगठनों और युवाओं द्वारा उग्र प्रदर्शन किए जा रहे थे। सड़कों पर चल रहा यह गुस्सा संसद के भीतर भी दिखाई दिया, जहां विपक्षी दलों ने लगातार हंगामा किया, जिसके कारण कई बार कार्यवाही बाधित हुई और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर तीखी बहसें हुईं।
इस बढ़ते चौतरफा दबाव के कारण शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। अपने आधिकारिक इस्तीफे में प्रधान ने स्पष्ट किया कि पिछले दस दिनों में देश में जो घटनाक्रम सामने आए हैं, उनसे वे मानसिक रूप से बेहद व्यथित हैं। उन्होंने लिखा कि यह स्थिति उनके लिए किसी व्यक्तिगत मान-सम्मान या प्रतिष्ठा का विषय नहीं है, बल्कि देश के छात्रों के भविष्य का सवाल है। उनके इस्तीफे के बाद, प्रधानमंत्री की सिफारिश पर इस महत्वपूर्ण मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी अनुभवी कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को सौंप दी गई।
प्रह्लाद जोशी का लंबा सांगठनिक और विधायी सफर
प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के उन चुनिंदा वरिष्ठ नेताओं में से हैं, जिनके पास प्रशासनिक और विधायी कार्यों का व्यापक अनुभव है। वे कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार सांसद चुने जा चुके हैं, जो उनके मजबूत जनाधार को दर्शाता है। उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत कर्नाटक के जमीनी स्तर के संगठन से हुई थी, जहां उनकी नेतृत्व क्षमता को देखते हुए साल 2012 में उन्हें पार्टी की राज्य इकाई का अध्यक्ष बनाया गया था।
साल 2014 में केंद्र में सत्ता परिवर्तन के बाद, उन्होंने संसद की विभिन्न महत्वपूर्ण समितियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं, जिससे उन्हें सरकारी नीतियों और विधायी प्रक्रियाओं की गहरी समझ मिली। साल 2019 में उन्हें संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्रालय का कैबिनेट मंत्री बनाया गया, जहां उन्होंने संसद के सत्रों को सुचारू रूप से चलाने में अहम भूमिका निभाई। तीसरी बार मोदी सरकार के गठन के बाद, जोशी को उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सरल वितरण और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का महत्वपूर्ण प्रभार दिया गया। अब संकट के इस समय में उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया जाना उनके प्रति केंद्रीय नेतृत्व के गहरे भरोसे को दर्शाता है।
परीक्षाओं की शुचिता और छात्रों का विश्वास बहाल करना मुख्य लक्ष्य
शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभालते ही नए मंत्री के सामने सबसे बड़ी और तात्कालिक चुनौती देश के करोड़ों छात्रों और अभिभावकों के बीच परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को फिर से स्थापित करना है। हाल ही में NEET-UG प्रवेश परीक्षा के दौरान सामने आए पेपर लीक के आरोपों ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी, यानी NTA, की साख को भारी ठेस पहुंचाई है। इसके चलते पूरी परीक्षा प्रणाली को नया रूप देने और इसमें पूर्ण पारदर्शिता लाने का भारी दबाव सरकार पर है।
इस समस्या से निपटने के लिए सरकार पहले ही एक बेहद कड़ा कानून लागू करने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है, जिसके तहत पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। हालांकि, केवल कानूनी कार्रवाई ही काफी नहीं है, बल्कि परीक्षाओं के भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचे को भी पूरी तरह सुरक्षित करना होगा। प्रह्लाद जोशी को अब NTA के पूरे प्रशासनिक ढांचे में सुधार करना होगा ताकि भविष्य में सुरक्षा में सेंध लगाने की कोई भी गुंजाइश न बचे।
NEET-UG परीक्षा प्रारूप में संभावित बड़े बदलाव
यद्यपि सरकार या परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की ओर से अभी तक किसी बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन मंत्रालय के उच्च अधिकारियों और विशेषज्ञों के बीच कई महत्वपूर्ण सुधारों पर मंथन जारी है। जिन मुख्य प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है, वे इस प्रकार हैं
- कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) अपनाना: परीक्षा को पारंपरिक पेन-और-पेपर OMR शीट प्रारूप से हटाकर पूरी तरह से सुरक्षित कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने पर विचार हो रहा है। इससे प्रश्नपत्रों की छपाई, उनके परिवहन और भंडारण की भौतिक प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी, जो कि पेपर लीक के लिहाज से सबसे संवेदनशील चरण माने जाते हैं।
- दो चरणों में परीक्षा का आयोजन: अन्य बड़ी राष्ट्रीय परीक्षाओं की तरह NEET-UG को भी दो चरणों (प्रारंभिक और मुख्य) में आयोजित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। यह बहुस्तरीय चयन प्रक्रिया सुरक्षा का एक अतिरिक्त घेरा तैयार करेगी, जिससे किसी भी अनुचित प्रयास को रोकना आसान होगा।
- NTA का पुनर्गठन: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव करना, अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा मानकों को लागू करना और बाहरी सुरक्षा ऑडिट कराना भी इस योजना का अहम हिस्सा है ताकि डेटाबेस पूरी तरह सुरक्षित रहे।
दीर्घकालिक सुधार और मंत्रालय के अन्य बड़े एजेंडे
यद्यपि NEET-UG के संकट को सुलझाना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता है, लेकिन शिक्षा मंत्रालय के पास कई अन्य महत्वपूर्ण दीर्घकालिक लक्ष्य भी हैं। इसमें सबसे प्रमुख है देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना। अलग-अलग राज्यों की चिंताओं और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस नीति को सुचारू रूप से लागू करना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती है।
इसके साथ ही, CBSE और NCERT के स्तर पर आवश्यक सुधारों को आगे बढ़ाना, विशेष रूप से पाठ्यक्रम को आधुनिक बनाना और मूल्यांकन पद्धतियों में बदलाव करना भी नए नेतृत्व की प्राथमिकताओ में रहेगा। केंद्रीय विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में होने वाली भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता लाना और शिक्षा के लोकतंत्रीकरण के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करना भी उनके मुख्य एजेंडे का हिस्सा होगा।



















