उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में अब नई पीढ़ी यानी जेन अल्फा ने अपनी बुनियादी जरूरतों और अधिकारों के लिए प्रशासनिक स्तर पर आवाज उठानी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में सोमवार को सैकड़ों की संख्या में छोटे बच्चों ने ग्रामीण महिलाओं और स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर जिला कलेक्ट्रेट का रुख किया। प्रदर्शनकारियों का मुख्य मुद्दा उनके गांवों में सड़कों की बेहद खस्ताहाल स्थिति थी, जिसके कारण न केवल बच्चों का स्कूल जाना दूभर हो गया है, बल्कि पूरे इलाके का दैनिक जनजीवन भी गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। जिलाधिकारी को एक औपचारिक शिकायती पत्र सौंपकर जल्द से जल्द पक्की सड़कों के निर्माण की मांग की गई, जिसके बाद मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने भी त्वरित कदम उठाने का भरोसा दिलाया।
कच्ची पगडंडियों और दलदल से होकर गुजरने को मजबूर हैं मासूम
कलेक्ट्रेट पहुंचे बच्चों ने अधिकारियों को बताया कि कागजों पर तो सड़कों के दुरुस्त होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर हकीकत बेहद दर्दनाक है। महोबा के इलाहीपुरा ग्योड़ी गांव की बात करें तो यह खन्ना मुख्य मार्ग से लगभग 500 मीटर की दूरी पर भीतर बसा हुआ है। इस आबादी तक पहुंचने के लिए आज भी कोई पक्की सड़क नहीं बनी है और लोगों को केवल एक संकरी कच्ची पगडंडी का सहारा लेना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह पूरा रास्ता भारी कीचड़ और जलभराव से भर जाता है, जिससे स्कूली बच्चों का रोजाना इस मार्ग से आना-जाना किसी संघर्ष से कम नहीं होता। इसके अलावा गांव की बीमार महिलाओं, बुजुर्गों और प्रसूता महिलाओं को आपात स्थिति में मुख्य सड़क तक पहुंचाना भी परिवार वालों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।
बरसात में घुटनों तक कीचड़ और एंबुलेंस का न पहुंच पाना बनी बड़ी समस्या
जिले के ही ग्राम दिसरापुर बिलवई में हजरत इब्राहिम शहीद दरगाह से रेलवे ट्रैक तक जाने वाले रास्ते की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार इस क्षेत्र में न तो पक्की सड़क है और न ही कोई खड़ंजा बिछाया गया है। बारिश होने के बाद यह मार्ग घुटनों तक गहरे कीचड़, मलबे और दलदल में तब्दील हो जाता है। बच्चों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि इस फिसलन भरे रास्ते पर आए दिन बच्चे गिरकर चोटिल हो जाते हैं, जिससे उनके कपड़े, जूते और स्कूल बैग खराब हो जाते हैं। इन सब परेशानियों के कारण कई अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से भी कतराने लगे हैं, जिसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि रास्ते की बदहाली इतनी अधिक है कि मेडिकल इमरजेंसी के समय 102 और 108 एंबुलेंस जैसी जरूरी गाड़ियां भी गांव तक नहीं पहुंच पातीं। गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को चारपाई पर लिटाकर इस दलदली रास्ते को पार कराने की मजबूरियां आज भी बनी हुई हैं।
जिलाधिकारी से गुहार और बीएसए राहुल मिश्रा का जमीनी कदम
कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर रहे बच्चों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की कि दोनों गांवों की सड़कों का तुरंत स्थलीय निरीक्षण कराया जाए और पक्की सड़क का निर्माण जल्द से जल्द शुरू किया जाए। बच्चों का साफ कहना था कि सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के अभाव में उनकी शिक्षा और दैनिक गतिविधियां बुरी तरह बाधित हो रही हैं। इस पूरी स्थिति का संज्ञान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल मिश्रा ने तुरंत लिया। उन्होंने बच्चों की शिकायत को गंभीरता से परखते हुए खुद उनके साथ गांव चलकर सड़क की वास्तविक स्थिति देखने का फैसला किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि सड़क खराब होने की इस समस्या को प्राथमिकता के आधार पर ठीक कराया जाएगा और इसके बाद वे बच्चों को साथ लेकर मौके की ओर रवाना हो गए।



















