उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले का मियापुर गांव आज सरकारी शिक्षा के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व क्रांति का केंद्र बन चुका है। आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को संसाधनों की कमी, जीर्ण-शीर्ण भवनों और असुविधाओं के लिए देखा जाता था। लेकिन पीएम श्री संविलियन विद्यालय मियापुर ने इस छवि को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार की डिजिटल शिक्षा नीति के तहत आधुनिक सुविधाओं को अपनाकर इस स्कूल ने ऐसा बुनियादी ढांचा खड़ा किया है, जो बड़े-बड़े निजी शिक्षण संस्थानों को भी कड़ी टक्कर दे रहा है। आज यह विद्यालय न केवल लखीमपुर खीरी जिले में बल्कि संपूर्ण उत्तर प्रदेश राज्य में एक आदर्श मॉडल स्कूल के रूप में जाना जा रहा है।
मुख्यमंत्री द्वारा सराहना और राज्य स्तर पर मिली पहचान
विद्यालय की इस अभूतपूर्व सफलता और कायाकल्प की गूंज शासन के उच्च स्तर तक पहुंची है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब मियापुर गांव में एक जनसभा को संबोधित करने आए थे, तब उन्होंने स्वयं इस प्राथमिक विद्यालय परिसर का दौरा किया। मुख्यमंत्री ने वहां उपलब्ध कराई गई अत्याधुनिक सुविधाओं, पठन-पाठन के वातावरण और सफाई व्यवस्था का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया तथा स्कूल प्रबंधन की खुले दिल से प्रशंसा की। विद्यालय की उपलब्धि का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इसके डिजिटल परिवर्तन और सुंदर परिसर की तस्वीरों को लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और दिल्ली मेट्रो के प्रमुख स्टेशनों पर प्रदर्शनी के रूप में लगाया गया है, ताकि देश भर के लोग उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में आ रहे इस बदलाव को देख सकें।
स्मार्ट लर्निंग, डिजिटल लाइब्रेरी और अंग्रेजी माध्यम का दर्जा
विद्यार्थियों के पठन-पाठन को आधुनिक और व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से विद्यालय परिसर में डिजिटल क्लासरूम, कंप्यूटर लैब और एक सुसज्जित डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना की गई है। इसके अतिरिक्त, इस विद्यालय को आधिकारिक तौर पर अंग्रेजी माध्यम का दर्जा भी प्रदान किया गया है, जिससे ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों को कॉन्वेंट स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो रही है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक सुरजन कुमार मंडल ने जानकारी दी कि वर्तमान में इस संस्थान में कुल 251 विद्यार्थी नामांकित हैं। इन बच्चों को शिक्षित करने के लिए 6 समर्पित शिक्षकों की टीम कार्यरत है। प्रधानाध्यापक सुरजन कुमार मंडल के अनुसार, इस पूरे कायाकल्प की यात्रा में शिक्षकों के निष्ठावान प्रयास, प्रशासनिक अधिकारियों के मार्गदर्शन और स्थानीय अभिभावकों के निरंतर सहयोग का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिसके सामूहिक परिणाम स्वरूप ही इसे मॉडल स्कूल का रूप दिया जा सका।
पर्यावरण संरक्षण, समावेशी सुविधाएं और विद्यार्थियों का अनुभव
शैक्षणिक सुविधाओं के साथ-साथ परिसर के भौतिक वातावरण और बुनियादी ढांचे पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। विद्यालय परिसर को हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाए रखने के लिए अनेक फलदार और छायादार वृक्ष रोपित किए गए हैं। स्कूल की दीवारों को आकर्षक रंगों, ज्ञानवर्धक कलाकृतियों और बच्चों द्वारा बनाए गए महान राष्ट्रनायकों एवं महापुरुषों के चित्रों से सजाया गया है। स्वास्थ्य और स्वच्छता के दृष्टिकोण से स्वच्छ पेयजल हेतु आरओ का ठंडा पानी उपलब्ध कराया गया है। बालकों और बालिकाओं की सुविधा के लिए अलग-अलग शौचालयों की समुचित व्यवस्था की गई है, जबकि दिव्यांग विद्यार्थियों की सुगम आवाजाही और उपयोग के लिए विशेष अनुकूलित बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है। विद्यालय के छात्र अनुज विश्वास का कहना है कि डिजिटल माध्यम से पढ़ाई, बैठने की आरामदायक व्यवस्था, ठंडा पेयजल और खेलकूद के उचित संसाधनों के कारण उनका स्कूल आसपास के सभी संस्थानों से अलग और सर्वश्रेष्ठ है।



















