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मुरादाबाद का ऐतिहासिक जीजी हिंदू इंटर कॉलेज: मात्र 100 रुपये फीस और सदी पुरानी लाइब्रेरीशिक्षा
23 जुल॰ 2026, 6:05 pm (2 घंटे पहले)· 1

मुरादाबाद का ऐतिहासिक जीजी हिंदू इंटर कॉलेज: मात्र 100 रुपये फीस और सदी पुरानी लाइब्रेरी

मुरादाबाद में आजादी से पहले स्थापित जीजी हिंदू इंटर कॉलेज आज भी मात्र 80 से 100 रुपये महीने की फीस में बेहतरीन शिक्षा दे रहा है। 1911 में बने इस स्कूल में सौ साल पुरानी दुर्लभ लाइब्रेरी, एनसीसी और प्रोजेक्ट आधारित पढ़ाई जैसी शानदार सुविधाएं मौजूद हैं।

आज के दौर में जब प्राइवेट स्कूलों की भारी-भरकम फीस अभिभावकों के लिए एक बड़ी परेशानी का सबब बन चुकी है, मुरादाबाद का एक ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान शिक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश कर रहा है। एक सदी से भी अधिक समय पहले स्थापित यह अनूठा स्कूल आज भी मात्र 80 से 100 रुपये की मासिक फीस पर छात्रों को बेहतरीन गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान कर रहा है। जहां एक तरफ आधुनिक स्कूल बुनियादी सुविधाओं के नाम पर हजारों रुपये वसूलते हैं, वहीं आजादी से पहले का यह इंटर कॉलेज अपने छात्रों को दुर्लभ किताबों वाली लाइब्रेरी से लेकर प्रोजेक्ट आधारित कक्षाओं तक सब कुछ उपलब्ध करा रहा है। यह संस्थान इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि शानदार शिक्षा और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए हमेशा बड़ी रकम खर्च करने की आवश्यकता नहीं होती है।

ब्रिटिश काल से जुड़ा गौरवशाली इतिहास

इस शानदार शिक्षण संस्थान की जड़ें भारत को आजादी मिलने से काफी पहले के समय से जुड़ी हुई हैं। विद्यालय के प्रिंसिपल डॉ. कुलदीप वर्णवाल ने इस संस्थान के ऐतिहासिक सफर के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि स्कूल की शुरुआत वर्ष 1911 में हुई थी। अपने शुरुआती दिनों में इसे हिंदू कोरोनेशन स्कूल के नाम से स्थापित और संचालित किया गया था। जैसे-जैसे साल बीतते गए और क्षेत्र की शैक्षिक जरूरतें बदलती गईं, संस्थान में भी कई बड़े बदलाव हुए। वर्ष 1936 में प्रशासन ने औपचारिक रूप से इसका नाम बदलकर गोकुलदास गुजराती इंटर कॉलेज कर दिया, जिसे आज आम तौर पर जीजी हिंदू इंटर कॉलेज के नाम से जाना जाता है। सौ साल से भी अधिक समय तक लगातार संचालित होने वाला यह कॉलेज शिक्षा के एक टिकाऊ मॉडल के रूप में मजबूती से खड़ा है। आज के अत्यधिक व्यावसायिक हो चुके स्कूलों के बिल्कुल विपरीत, इस कॉलेज ने समाज के हर तबके तक आसानी से शिक्षा पहुंचाने के अपने मूल उद्देश्य को पूरी तरह से बचा कर रखा है।

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एक समर्पित ट्रस्ट द्वारा सफल संचालन

इस पूरे कॉलेज का प्रशासनिक और ढांचागत संचालन एक बेहद समर्पित प्रबंध समिति द्वारा किया जाता है, जिसे हिंदू एजुकेशन सोसाइटी ट्रस्ट के नाम से जाना जाता है। इस विशेष ट्रस्ट के लगातार प्रयासों और शानदार प्रबंधन के कारण ही स्कूल ने छात्रों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को बेहद कम रखने में सफलता हासिल की है। वर्तमान समय में यहां लगभग 650 छात्र-छात्राएं एक साथ शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यहां की फीस को आज भी 80 से 100 रुपये प्रति माह के बेहद मामूली स्तर पर तय रखा गया है। यह नाममात्र का शुल्क यह सुनिश्चित करता है कि कम आय वाले और सामान्य मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चे भी बिना किसी आर्थिक दबाव के बेहतरीन शिक्षा प्राप्त कर सकें। एक सह-शिक्षा सुविधा के रूप में काम करते हुए, यह स्कूल सभी के लिए समान अवसर और समावेशी माहौल को भी पूरी तरह से बढ़ावा दे रहा है।

कक्षाओं से परे सर्वांगीण विकास पर जोर

जीजी हिंदू इंटर कॉलेज का शैक्षणिक पाठ्यक्रम इस तरह से तैयार किया गया है कि छात्रों को अपने भविष्य के लिए कई तरह के विकल्प मिल सकें। विद्यालय प्रबंधन की तरफ से कला, वाणिज्य और विज्ञान संकाय में पूरी तरह से सुसज्जित कक्षाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे छात्रों को अपने पसंदीदा करियर पथ पर आगे बढ़ने में कोई दिक्कत न हो। हालांकि, संस्थान का ध्यान केवल पारंपरिक किताबी ज्ञान तक ही सीमित नहीं है। स्कूल प्रशासन हर एक बच्चे के समग्र व्यक्तित्व विकास पर बहुत अधिक जोर देता है। इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए, छात्रों को विभिन्न आउटडोर खेल गतिविधियों, राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) में भाग लेने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जाता है। इसके अलावा, स्कूल के शिक्षक नियमित पाठ्यक्रम के साथ-साथ प्रोजेक्ट आधारित कक्षाओं को भी शामिल करते हैं। यह व्यापक दृष्टिकोण युवाओं को वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए तैयार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, ताकि उनका विकास सिर्फ बोर्ड परीक्षा पास करने तक सीमित न रह जाए।

सौ साल पुरानी दुर्लभ किताबों का खजाना

इस ऐतिहासिक कॉलेज की सबसे खास और अनूठी विशेषताओं में से एक इसकी बेहद पुरानी लाइब्रेरी है, जो साहित्यिक और अकादमिक खजाने का एक विशाल संग्रह अपने अंदर समेटे हुए है। डॉ. वर्णवाल द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह लाइब्रेरी अपने आप में लगभग 100 साल पुरानी है। इस ऐतिहासिक अभिलेखागार में वर्ष 1930, 1936 और 1942 की बेहद दुर्लभ और मूल्यवान किताबें मौजूद हैं। इन नाजुक दस्तावेजों को आज की युवा पीढ़ी के पढ़ने के लिए बहुत ही सावधानी के साथ सुरक्षित रखा गया है। यह प्रभावशाली संग्रह केवल क्षेत्रीय या स्थानीय लेखकों तक सीमित नहीं है। इसमें ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस जैसे विश्व स्तर पर प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों की पुरानी किताबें भी गर्व के साथ शामिल की गई हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि छात्र वास्तव में इस दुर्लभ ऐतिहासिक संपत्ति का पूरा लाभ उठाएं, स्कूल प्रबंधन ने छात्रों की दैनिक समय-सारिणी में लाइब्रेरी के लिए एक विशेष और अनिवार्य पीरियड शामिल करने का सक्रिय कदम उठाया है। इस निर्धारित समय के दौरान, शिक्षक खुद छात्रों के साथ लाइब्रेरी जाते हैं, और उन्हें विभिन्न विषयों को पढ़ने और अपने मानसिक क्षितिज का विस्तार करने के लिए मार्गदर्शन करते हैं। जीवन भर पढ़ने की एक गहरी आदत को व्यवस्थित रूप से विकसित करके, स्कूल यह सुनिश्चित करता है कि छात्र अपने खाली समय का सबसे रचनात्मक तरीके से उपयोग करें। इन्हीं सामूहिक प्रयासों के माध्यम से, यह संस्थान मुरादाबाद में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के एक प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।

सवाल-जवाब

मुरादाबाद के इस 100 साल पुराने स्कूल का क्या नाम है?
इस ऐतिहासिक विद्यालय का नाम जीजी हिंदू इंटर कॉलेज (गोकुलदास गुजराती इंटर कॉलेज) है, जिसकी शुरुआत 1911 में हुई थी।
जीजी हिंदू इंटर कॉलेज की मासिक फीस कितनी है?
विद्यालय की फीस बेहद कम रखी गई है, जो वर्तमान में करीब 80 से 100 रुपये प्रति माह के बीच है।
इस स्कूल का पुराना नाम क्या था?
1911 में स्थापना के समय इसका नाम हिंदू कोरोनेशन स्कूल था, जिसे 1936 में बदलकर गोकुलदास गुजराती इंटर कॉलेज कर दिया गया।
विद्यालय की लाइब्रेरी कितनी पुरानी है?
स्कूल की लाइब्रेरी लगभग 100 साल पुरानी है, जिसमें 1930 और 1942 के दशक की दुर्लभ किताबें आज भी सुरक्षित हैं।
विद्यालय का संचालन कौन करता है?
इस इंटर कॉलेज का प्रशासनिक संचालन हिंदू एजुकेशन सोसाइटी नाम की एक प्रबंध समिति ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
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