बिहार की राजधानी पटना के गर्दनीबाग इलाके में पिछले 21 दिनों से क्रमिक अनशन पर बैठे ऑल पीएचडी होल्डर्स एंड रिसर्च एसोसिएशन के छात्रों ने आखिरकार अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी है। यह फैसला बिहार के राज्यपाल के साथ हुई करीब 2 घंटे की लंबी और सकारात्मक बातचीत के बाद लिया गया। इस उच्चस्तरीय बैठक में छात्रों की तमाम प्रमुख मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए आगामी 15 दिनों के भीतर एक विशेष समिति गठित करने पर सहमति बन गई है। इस समिति का गठन राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री के साथ विचार-विमर्श के बाद किया जाएगा, जिसमें राज्य के वरिष्ठ शिक्षाविदों और प्रशासनिक क्षेत्रों का लंबा अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा।
लंबे समय से गर्दनीबाग में अपनी मांगों को लेकर डटे ऑल पीएचडी होल्डर्स एंड रिसर्च एसोसिएशन के 6 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल के समक्ष अपनी बात रखी। इस दो घंटे चली मैराथन बैठक के बाद अनशनकारी छात्रों ने अपना धरना और अनशन वापस लेने का औपचारिक आश्वासन दिया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में शिक्षक प्रतिनिधि और विधान पार्षद जीवन कुमार, अतिथि सहायक प्राध्यापक डॉ. कुंदन सिंह, डॉ. उमेश कुमार, अतिथि सहायक प्राध्यापक डॉ. विभा रानी के साथ-साथ शोध छात्र आशीष कुमार और मोनू कुमार राय शामिल रहे।
सहायक प्राध्यापक परिनियम पर लगी रोक
बैठक में बनी सहमति के आधार पर सहायक प्राध्यापक भर्ती परिनियम, 2026 में आवश्यक संशोधन किए जाने तक इस परिनियम के अंतर्गत होने वाली किसी भी प्रकार की नियमित या संविदा आधारित बहाली की प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। जब तक नियमों में संशोधन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक यह पुराना परिनियम प्रभावी नहीं रहेगा। इसके साथ ही, छात्रों की मांगों के विभिन्न पहलुओं का गहराई से परीक्षण करने के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई जा रही है, जो तय समयसीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
समिति के विचारणीय बिंदु और चयन प्रक्रिया में बदलाव
गठित होने वाली यह समिति सहायक प्राध्यापक भर्ती से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार करेगी। इनमें सहायक प्राध्यापक पद के लिए अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष निर्धारित करने का प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा, बहाली के लिए लिखित परीक्षा आयोजित करने पर भी चर्चा हुई, जिसमें परीक्षा वस्तुनिष्ठ प्रकृति की होनी चाहिए। लिखित परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों के प्राप्तांकों और API यानी एकेडमिक परफॉर्मेंस इंडेक्स के अंकों को जोड़कर एक समेकित मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी। इसी मेरिट लिस्ट के आधार पर तय संख्या में अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा, जिसमें टीचिंग डेमो भी अनिवार्य रूप से शामिल रहेगा।
API गणना और अतिथि शिक्षकों से जुड़े अहम फैसले
API की गणना को लेकर भी छात्रों की कई मांगों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया गया है। तय हुआ है कि API स्कोर तैयार करते समय मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं के प्राप्तांकों को शामिल नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही, नेट और JRF के लिए अधिमानता अंक अधिकतम 11 तक रखे जा सकते हैं, जबकि पीएचडी के लिए मिलने वाला अधिमानता अंक 30 से कम नहीं किया जाना चाहिए। शोध प्रकाशनों और कार्य अनुभव को भी API स्कोर का हिस्सा बनाया जाएगा, लेकिन इसके नियमों को पूरी तरह स्पष्ट और परिभाषित किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार के संशय या दुरुपयोग की गुंजाइश न बचे।
अतिथि सहायक प्राध्यापकों के हितों को ध्यान में रखते हुए समिति इस बात पर भी विचार करेगी कि उन्हें वर्तमान में नियुक्त संविदा सहायक प्राध्यापकों की तर्ज पर न्यूनतम वेतनमान और उस पर महंगाई भत्ता दिया जाए। साथ ही, सभी विश्वविद्यालयों में अतिथि शिक्षकों के नवीकरण की प्रक्रिया को एक समान बनाया जाएगा। उनके शैक्षणिक दस्तावेजों, शोध पत्रों और अनुभवों की पूरी जांच के बाद उन्हें 65 वर्ष की आयु तक कार्य करने का अवसर देने पर भी विचार चल रहा है। अनशनकारियों के इस सुझाव पर भी गौर किया गया कि अधिकतम आयु सीमा को एक बार में अचानक कम करने की बजाय क्रमिक रूप से घटाया जाए और इस बीच हर साल रिक्तियों के आधार पर नियमित रूप से नियुक्तियां की जाएं।



















