योग्यता और कौशल के लिए किसी उम्र सीमा की आवश्यकता नहीं होती है, और यह बात अमित मजीठिया के जीवन पर बिल्कुल सटीक बैठती है। जिस कच्ची उम्र में बच्चों का ध्यान खेलकूद और स्कूल की गतिविधियों में रहता है, उस समय अमित ने अपनी किस्मत खुद लिखने का फैसला किया था। उन्होंने बहुत कम उम्र में पढ़ाई से नाता तोड़कर व्यावसायिक दुनिया में कदम रखा और अपनी कड़ी मेहनत के बल पर एक विशाल साम्राज्य खड़ा किया। आज उनका बिजनेस ग्रुप हजारों करोड़ रुपये का हो चुका है और वह सफलता की नई इबारत लिख रहे हैं। इसके साथ ही अब उन्होंने परोपकार के क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाया है और जरूरतमंदों की मदद करने में जुट गए हैं।
बचपन में ही रखा व्यवसाय की दुनिया में कदम
अमित मजीठिया की शुरुआती जिंदगी काफी संघर्ष और बड़े बदलावों से भरी रही है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा 9वीं कक्षा के बाद ही बीच में छोड़ दी थी और मात्र 13 वर्ष की आयु में अपना खुद का काम शुरू कर दिया था। उस कम उम्र में व्यावसायिक जोखिम उठाते हुए उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत बनानी शुरू की। वक्त के साथ उन्होंने डिजिटल मीडिया, मनोरंजन जगत, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर और आधुनिक टेक्नोलॉजी जैसे तमाम क्षेत्रों में अपने कारोबार का तेजी से विस्तार किया। आज उनके पूरे बिजनेस समूह की कुल अनुमानित वैल्यूएशन 2,000 करोड़ रुपये से भी अधिक आंकी जाती है।
विभिन्न सेक्टरों में कारोबार और सोशल मीडिया पर पहचान
अमित कई प्रमुख उद्यमों के संस्थापक और संचालक हैं जिनमें मुख्य रूप से ताशन क्लब चेन शामिल है, जो मनोरंजन और आतिथ्य सत्कार का एक अनूठा मिश्रण पेश करती है। इसके अतिरिक्त ताशन बोल्ली स्टूडियो के माध्यम से वह संगीत और मनोरंजन उद्योग में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। डिजिटल सामग्री के प्रसार के लिए उन्होंने CBTFmytube.com नामक एक वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म से भी खुद को जोड़ा है। सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले इंस्टाग्राम पर उनके 3.1 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। क्रिकेट और डिजिटल मनोरंजन की दुनिया में उनकी गहरी पैठ मानी जाती है।
असम के बाढ़ पीड़ितों के लिए बड़ा परोपकारी कदम
अपने व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के साथ-साथ अमित ने सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में उन्होंने CBTF Foundation के जरिए असम के बाढ़ से तबाह हुए परिवारों के पुनर्वास का जिम्मा उठाया है। राज्य के आपदा प्रभावित इलाकों में लोगों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने और उन्हें दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए वह लगातार प्रयास कर रहे हैं। क्रिकेट विश्लेषक के रूप में भी अपनी पहचान रखने वाले अमित ने इस बार पूरी तरह से मानवीय सहायता पर अपना ध्यान केंद्रित किया है।
सिर्फ मकान नहीं, गृहस्थी का जरूरी सामान भी दे रहे हैं
असम के बाढ़ प्रभावित गांवों के लिए अमित ने करीब 20 सहयोगियों के साथ मिलकर 1.66 करोड़ रुपये की बड़ी राशि जुटाई है। इस फंड की मदद से वह वहां 124 परिवारों को फिर से बसाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने एक पूरे बाढ़ प्रभावित गांव को गोद लिया है और महज 90 दिनों के भीतर वहां 124 मकान तैयार करने का बीड़ा उठाया है। सिर्फ छत देना ही उनका मकसद नहीं है, बल्कि इन घरों में रहने वाले परिवारों को बेड, गद्दे, चूल्हे, सीलिंग फैन, एलईडी लाइट, डाइनिंग टेबल, कुर्सियां, क्रॉकरी, प्रेशर कुकर और वाटर प्यूरीफायर जैसी हर जरूरी घरेलू वस्तु उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा छात्र-छात्राओं की पढ़ाई में रुकावट न आए, इसलिए उन्हें साइकिल, स्कूल बैग और अन्य शैक्षणिक सामग्री भी बांटी जाएगी। उनका मानना है कि यदि आपके पास पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं, तो समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता करने में पीछे नहीं हटना चाहिए।



















