गुजरात में विपक्षी दल कांग्रेस के विधायक जिग्नेश मेवाणी की कानूनी परेशानियां अचानक बढ़ गई हैं। गांधीनगर जिले के पेथापुर पुलिस थाने में उनके खिलाफ कई गंभीर धाराओं के तहत एक आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पुलिस स्टेशन के भीतर समर्थकों संग पहुंचकर सरकारी काम में रुकावट डाली और तनाव फैलाने वाली बयानबाजी की।
पेथापुर पुलिस थाने की घटना और दर्ज आरोप
प्राथमिकी के अनुसार, पूरा घटनाक्रम 9 अक्टूबर का है जब गांधीनगर इलाके में चुनाव प्रचार का दौर चल रहा था। उसी दौरान पेथापुर पुलिस स्टेशन के भीतर अधिकारी कांग्रेस पार्टी के एक प्रत्याशी के खिलाफ प्राप्त हुई अर्जी के सिलसिले में उनका आधिकारिक बयान दर्ज कर रहे थे। उसी वक्त जिग्नेश मेवाणी अपने कई समर्थकों के हुजूम के साथ थाने परिसर में दाखिल हुए।
मुकदमे में कहा गया है कि उन्होंने वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के शासकीय कामकाज में सीधा व्यवधान उत्पन्न किया। इतना ही नहीं, उन पर थाने के भीतर आपत्तिजनक शब्दावली का इस्तेमाल करने और बिना किसी तथ्यात्मक आधार के बेहद उत्तेजक व भड़काऊ टिप्पणियां करने का भी आरोप है। पुलिस शिकायत के मुताबिक, उनके इन बयानों का मकसद सामाजिक सौहार्द को चोट पहुंचाना और वैमनस्य को हवा देना था।
सोशल मीडिया पर बयानों को बढ़ाने और कानूनी धाराओं का विवरण
दर्ज शिकायत में यह बात भी रेखांकित की गई है कि जिग्नेश मेवाणी ने केवल थाने में भड़काऊ बातें ही नहीं कहीं, बल्कि समाज को गुमराह करने के इरादे से इन वक्तव्यों को अपने विभिन्न सोशल मीडिया हैंडल्स के जरिए बड़े पैमाने पर प्रसारित और साझा भी किया। पिछले काफी समय से वे अपने विवादित बयानों को लेकर लगातार चर्चाओं में रहे हैं, लेकिन इस तरह का यह पहला मौका है जब उन पर सीधे तौर पर कोई ठोस कानूनी कार्रवाई अमल में लाई गई है।
पेथापुर पुलिस ने इस पूरे मामले में कानून की कई कड़ी धाराएं जोड़ी हैं
- धारा 189(2): गैर-कानूनी रूप से भीड़ एकत्र करने के लिए निर्धारित सजा से जुड़ी धारा।
- धारा 190: किसी समान उद्देश्य को पूरा करने के लिए सामूहिक दायित्व तय करने वाला प्रावधान।
- धारा 191(2): उपद्रव या दंगा भड़काने के अपराध में सजा का प्रावधान।
- धारा 221: ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारी के काम में जान-बूझकर बाधा डालना।
- धारा 351(2): किसी को आपराधिक धमकी देने के जुर्म में दंड की व्यवस्था।
- धारा 352: शांति भंग करने की नीयत से जान-बूझकर किसी का अपमान करना।
- धारा 353(1)(b): आम जनता के मन में भय या घबराहट पैदा करने के उद्देश्य से झूठी अफवाहें व आधारहीन बयान फैलाना।
- धारा 353(1)(c): किसी एक वर्ग या समुदाय को दूसरे समुदाय के खिलाफ अपराध करने के लिए उकसाने की नीयत से झूठी सूचनाएं प्रसारित करना।
- धारा 353(2): अलग-अलग धार्मिक, भाषाई, नस्लीय, क्षेत्रीय या जातीय समूहों के बीच दुश्मनी, नफरत या दुर्भावना को बढ़ावा देने पर दंड का प्रावधान।
गुजरात कांग्रेस के अन्य विधायकों से जुड़े हालिया विवाद
गुजरात में विपक्षी पार्टी के विधायकों से जुड़े विवादों की कड़ी में यह घटना अकेली नहीं है। इससे पहले कांग्रेस के एक अन्य विधायक इमरान खेड़ावाला भी विवादों के घेरे में आए थे, जब वंदे मातरम के कथित अपमान को लेकर उनकी मुश्किलें बढ़ गई थीं। उस मामले में गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी ने विधानसभा की विशेषाधिकार समिति को प्रकरण की बेहद सख्त और विस्तृत जांच करने के औपचारिक निर्देश जारी किए थे।
























