बॉलीवुड में अपनी खास पहचान बनाने वाली अभिनेत्री गुल पनाग ने एक दशक के लंबे अंतराल के बाद अपना प्राइवेट पायलट लाइसेंस फिर से रिन्यू करा लिया है। अभिनय के अलावा अपने विविध शौक और हुनर के लिए पहचानी जाने वाली अभिनेत्री के लिए यह पल बेहद भावुक कर देने वाला रहा। विमान उड़ाने का अधिकार दोबारा हासिल करने के बाद उन्होंने अपनी पुरानी यादों को ताजा किया और बताया कि एक समय ऐसा भी था जब आसपास के लोगों ने उनकी इस क्षमता पर सवाल खड़े किए थे।
संदेह करने वालों के बीच पूरा किया था सपना
सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए गुल पनाग ने बताया कि ठीक दस साल पहले जब उन्हें पहली दफा प्राइवेट फ्लाइंग लाइसेंस मिला था, तब उनके उत्साह और खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। यह मुकाम उनकी जिंदगी के सबसे बड़े सपनों में शामिल था, जिसे हासिल करने के लिए उन्होंने लंबा इंतजार किया था। उस दौर में राह आसान नहीं थी, क्योंकि कई लोगों ने उनसे साफ लफ्जों में कह दिया था कि वह इसे कभी पूरा नहीं कर पाएंगी। लोगों की ऐसी नकारात्मक बातों और संदेहों के बीच उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं खींचे और खुद को साबित करके दिखाया।
पायलट बनने की राह में आईं कई व्यावहारिक चुनौतियां
विमानन क्षेत्र में कदम रखने के अपने सफर पर बात करते हुए अभिनेत्री ने कहा कि कॉकपिट में बैठने की प्रक्रिया दूर से जितनी सहज नजर आती है, हकीकत में यह उतनी ही कठिन और पेचीदा होती है। फ्लाइंग स्कूल में दाखिला लेकर शुरुआती प्रशिक्षण लेना तो महज पहला कदम होता है। इसके बाद असली चुनौती अनिवार्य उड़ान घंटे दर्ज करने, मुश्किल लिखित व व्यावहारिक परीक्षाएं पास करने, कागजी कार्रवाई मुकम्मल करने और सख्त मेडिकल मानकों पर खरा उतरने की होती है।
गुल पनाग ने इस बात पर जोर दिया कि एक सक्रिय एक्टिंग करियर के साथ-साथ यह सब संभालना बेहद थका देने वाला था। जब विमान उड़ाना आपका मुख्य पेशा न हो, तो शूटिंग शेड्यूल के बीच ट्रेनिंग जारी रखना और मेडिकल सर्टिफिकेट अपडेट रखना कई गुना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। अलग-अलग देखने पर ये सभी काम सामान्य लग सकते हैं, लेकिन जब कोई पेशेवर अभिनेता इन्हें अपनी दैनिक व्यस्तताओं के साथ पूरा करता है, तो पूरी प्रक्रिया बेहद जटिल हो जाती है। तमाम व्यस्तताओं और कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी मंजिल हासिल की।
लाइसेंस हासिल करने और उसे बनाए रखने का फर्क
पहली बार योग्यता हासिल करने के बाद की संतुष्टि का जिक्र करते हुए उन्होंने समझाया कि दस साल बाद रिन्यूअल की प्रक्रिया से गुजरते हुए उन्हें एक अहम बात समझ में आई। किसी योग्यता को एक बार हासिल कर लेना अलग बात है, लेकिन सालों तक उसे सक्रिय और वैध बनाए रखना बिल्कुल दूसरी चुनौती है। अपने इर्द-गिर्द के उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वह ऐसे ढेरों लोगों से वाकिफ हैं जिन्होंने बड़े शौक से फ्लाइंग ट्रेनिंग शुरू की, लेकिन बीच में ही छोड़ दी। कुछ लोग जरूरी उड़ान घंटे पूरे कर लेते हैं मगर परीक्षाएं पास नहीं कर पाते। वहीं कई लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने लाइसेंस हासिल तो किया, लेकिन समय पर रिन्यू न कराने की वजह से उनका परमिट एक्सपायर हो गया।
पारिवारिक जिम्मेदारियां, काम का दबाव, सेहत से जुड़ी शर्तें और नियमित रूप से विमान न उड़ा पाना ऐसे प्रमुख कारण हैं जिनकी वजह से लोग अपनी योग्यता खो बैठते हैं। यह समस्या उन लोगों के साथ सबसे ज्यादा होती है जो कमर्शियल तौर पर रोजाना विमान नहीं उड़ाते। गुल पनाग ने स्वीकार किया कि अब वह न केवल पहली बार लाइसेंस पाने की मेहनत को समझती हैं, बल्कि यह भी भली-भांति जानती हैं कि उस मुकाम को बरकरार रखने के लिए लगातार अनुशासन और प्रयास की जरूरत होती है।
एक छात्रा से एक मंझी हुई पायलट तक का सफर
दौरे की यादों को साझा करते हुए अभिनेत्री ने कहा कि इस बार लाइसेंस रिन्यू कराने के लिए उसी जगह लौटना उनके लिए एक बिल्कुल नया और अनूठा अनुभव था। वर्षों पहले जब वह वहां गई थीं, तब वह एक घबराई हुई छात्रा थीं जो हर नियम और प्रक्रिया सीखने की कोशिश कर रही थीं। इस बार जब उन्होंने उसी परिसर में कदम रखा, तो वह एक प्रामाणिक और लाइसेंस प्राप्त पायलट के रूप में खड़ी थीं। अपने इस कठिन और अनुशासित सफर को याद करते हुए गुल पनाग ने कहा कि इस बार उन्होंने पहली बार बिना किसी संकोच के खुद की पीठ थपथपाई और अपनी इस मेहनत पर गर्व महसूस किया।


















