हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर के रोमांटिक नगमों की जब भी चर्चा होती है, तो सत्तर के दशक का क्लासिक ट्रैक 'वादा कर ले साजना, तेरे बिन मैं ना रहूं' लोगों के जेहन में बरबस तैर जाता है। मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर की मखमली गायकी से सजा यह गीत उम्रभर साथ निभाने और एक-दूसरे के प्रति समर्पण की सच्ची भावना को खूबसूरती से व्यक्त करता है। पर्दे पर विनोद खन्ना और सिमी गरेवाल की सहज जोड़ी के साथ संगीत की ऐसी जुगलबंदी रची गई थी जिसने इस धुन को सदाबहार बना दिया।
साल 1974 में आई प्रकाश मेहरा की मनोरंजक पेशकश
यह लोकप्रिय रोमांटिक गीत 30 अगस्त 1974 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई फिल्म 'हाथ की सफाई' का हिस्सा था। मशहूर फिल्मकार प्रकाश मेहरा ने इसका निर्देशन किया था। फिल्म में उस दौर की दिग्गज स्टारकास्ट मौजूद थी, जिसमें विनोद खन्ना, रणधीर कपूर, हेमा मालिनी और सिमी गरेवाल ने प्रमुख किरदार निभाए थे।
इस फिल्म की मूल पटकथा दो बिछड़े हुए सगे भाइयों की भावनात्मक दास्तान के इर्द-गिर्द बुनी गई थी। कहानी में दिखाया गया था कि बचपन के दिनों में दोनों भाई एक-दूसरे से जुदा हो जाते हैं। बड़े होने पर नियति उन्हें अलग-अलग रास्तों पर ले जाती है, जहां एक भाई संगठित अपराध के दलदल में धंस जाता है, वहीं दूसरा अपनी गुजर-बसर के लिए छोटी-मोटी जेबकतरी करने लगता है। जीवन के उतार-चढ़ाव और अप्रत्याशित हालात आखिरकार दोनों भाइयों को फिर से एक मोड़ पर आमने-सामने खड़ा कर देते हैं।
गुलशन बावरा के बोल और कल्याणजी-आनंदजी की मधुर धुन
गीत 'वादा कर ले साजना' को अमर बनाने में इसके गीतकार और संगीतकारों की अहम भूमिका रही। कल्याणजी-आनंदजी की विख्यात संगीतकार जोड़ी ने इस गीत के लिए बेहद कर्णप्रिय और सादा धुन तैयार की थी। वहीं इसके भावपूर्ण बोल गीतकार गुलशन बावरा की कलम से निकले थे।
इस रचना की सबसे बड़ी ताकत इसकी सादगी और उपमाओं की गहराई है। गीत में प्रेमी जोड़े के बीच कभी अलग न होने का दृढ़ संकल्प पिरोया गया है। गीतों की पंक्तियों में प्रेम की तुलना कहीं दिल की धड़कन से की गई है, तो कहीं दोनों के अनूठे बंधन को साहिल और सागर की लहरों जैसा अटूट बताया गया है। लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के सुरों ने इन उपमाओं में ऐसी जान फूंकी कि रिलीज होने के कई दशक बीत जाने के बावजूद यह नगमा आज भी प्रेमियों की शीर्ष पसंद बना हुआ है।
विनोद खन्ना को मिला फिल्मफेयर का प्रतिष्ठित सम्मान
फिल्म 'हाथ की सफाई' अभिनेता विनोद खन्ना के अभिनय सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई। कहानी में उन्होंने बड़े भाई शंकर कुमार की चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाई थी, जबकि रणधीर कपूर उनके छोटे भाई राजू के रूप में पर्दे पर नजर आए थे।
विनोद खन्ना के इस प्रभावशाली अभिनय को आलोचकों और उद्योग दोनों ने भरपूर सराहा। साल 1975 में आयोजित हुए 22वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में विनोद खन्ना को बेस्ट एक्टर इन सपोर्टिंग रोल के खिताब से नवाजा गया, जो फिल्मफेयर के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज है। इस फिल्म ने जहां विनोद खन्ना की बहुमुखी प्रतिभा को मान्यता दिलाई, वहीं 'वादा कर ले साजना' आज भी फिल्म की सबसे अमर और अमिट पहचान के तौर पर पांच दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी नई पीढ़ी के श्रोताओं को उतना ही मंत्रमुग्ध कर रहा है।



















