सिनेमाघरों में 42 दिन से अधिक का समय बिताने के बाद भी फिल्म 'हनुमान अंश' की मजबूत पकड़ टिकट खिड़की पर लगातार बनी हुई है। नीम करोली बाबा के जीवन और शिक्षाओं पर केंद्रित इस सिनेमाई रचना ने बॉक्स ऑफिस पर 300 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई दर्ज की है। कहानी के साथ इस फिल्म के संगीतमय पक्ष ने दर्शकों के दिलों में विशेष जगह बनाई है। फिल्म का गीत 'पार्वती' एक बड़ा ब्लॉकबस्टर सिद्ध हुआ है, जिसे ग्वालियर जिले के करहिया गांव के मूल निवासी साधू तिवारी ने अपनी आवाज दी है।
रामलीला के मंच से विज्ञान के व्याख्याता तक का सफर
मध्य प्रदेश में ग्वालियर के निकट करहिया गांव में जन्मे साधू तिवारी की कलात्मक यात्रा अपने इलाके की मिट्टी से शुरू हुई थी। बचपन के दिनों में वे स्थानीय रामलीला मंचन में सक्रिय भाग लेते थे और पाठ किया करते थे। उनका मानना है कि किसी भी कलाकार की साधना उसके अपने परिवेश, मिट्टी और संस्कृति की जड़ों से पोषित होती है। बुनियादी शिक्षा के बाद उन्होंने संगीत की विधिवत तालीम हासिल की। इसके समानांतर उन्होंने विज्ञान विषय में अध्यापन करते हुए कॉलेज में केमिस्ट्री के लेक्चरर के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।
मुंबई में संघर्ष और बड़े पर्दे पर शुरुआती कदम
शिक्षा जगत में रहने के उपरांत वर्ष 2010 में वे अपने संगीत के सपनों को विस्तार देने मुंबई पहुंचे। वहां उन्होंने संगीत निर्देशक के रूप में अपने प्रयास जारी रखे और विभिन्न ट्रैक्स तैयार किए। बड़े पर्दे पर इससे पूर्व उन्होंने 'गुलाब गैंग' और 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' जैसी उल्लेखनीय फिल्मों में भी अपनी गायकी का हुनर दिखाया था। हालांकि देशव्यापी स्तर पर व्यापक पहचान और संगीत प्रेमियों का अटूट प्यार उन्हें 'हनुमान अंश' के लोकप्रिय गीत 'पार्वती' से ही प्राप्त हुआ।
शून्य से 300 करोड़ तक का अविश्वसनीय सफर
इस पूरी परियोजना की पृष्ठभूमि में निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की लंबी साधना रही है। वे विगत 8 वर्षों से एक यूट्यूब चैनल संचालित कर रहे थे, जिसके जरिए हनुमान चालीसा से जुड़े विशेष कार्यक्रम प्रसारित होते थे। वे नीम करोली बाबा पर एक संपूर्ण फिल्म बनाना चाहते थे, लेकिन लंबे समय तक उन्हें कोई फाइनेंसर नहीं मिल सका। बाद में संसाधन मिलने पर निर्माण कार्य तो पूरा हुआ, मगर शुरुआत बेहद चुनौतीपूर्ण रही। रिलीज के पहले दिन स्थिति ऐसी थी कि फिल्म को खाली थिएटर में अकेले देखना पड़ा। धीरे-धीरे दर्शकों का रुझान बदला और सकारात्मक चर्चा के बल पर फिल्म ने रफ्तार पकड़ ली।
आध्यात्मिक सिनेमा और युवाओं की नई रुचि
फिल्म की अपार व्यावसायिक सफलता आधुनिक दौर में एक विशेष सांस्कृतिक बदलाव को भी दर्शाती है। आज की युवा पीढ़ी जिसे जेन जी कहा जाता है, वह भी धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों की ओर गहराई से आकर्षित हो रही है। साधू तिवारी ने इस जुड़ाव के लिए युवाओं का आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बड़ी संख्या में रील्स बनाकर इस संगीत को घर-घर तक पहुंचाया। उनका विचार है कि समाज में हर स्तर पर विचारणीय, संतों के आदर्श चरित्रों पर आधारित और पारिवारिक फिल्मों का निरंतर निर्माण होना चाहिए।



















