मुंबई के उपनगरीय इलाके जुहू में स्थित बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन और अभिनेत्री काजोल का एक आलीशान बंगला इन दिनों स्थानीय विवाद के केंद्र में आ गया है। इस आवासीय प्रॉपर्टी को किराए पर दिए जाने के बाद जब वहां एक कमर्शियल सलून और स्पा की स्थापना के लिए निर्माण कार्य शुरू कराया गया, तो आसपास रहने वाले लोगों ने खुलकर अपनी नाराजगी जताई। पड़ोसियों और स्थानीय आवासीय संस्था की तरफ से दर्ज कराई गई आधिकारिक आपत्ति के बाद बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने मामले का संज्ञान लिया और इस पूरे प्रोजेक्ट की कानूनी वैधता की पड़ताल शुरू कर दी है।
हाउसिंग सोसाइटी की शिकायत और नगर निगम की पहली जांच
यह पूरा विवाद जेपीवीडी स्कीम के तहत एन एस रोड नंबर 11 पर स्थित प्लॉट एस-10 के बंगले से जुड़ा है, जो तकरीबन 7,802 वर्ग फीट क्षेत्र में फैला हुआ है। जैसे ही इस रिहायशी परिसर के भीतर नवीनीकरण और निर्माण संबंधी गतिविधियां तेज हुईं, कपोल को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी ने फौरन इसकी सूचना नगर निगम को दी। शिकायत दर्ज होते ही बीएमसी के के-वेस्ट वार्ड की प्रशासनिक टीम मौके पर मुआयना करने पहुंची। निगम के आधिकारिक दस्तावेजों की शुरुआती पड़ताल में इस आवासीय संपत्ति को व्यावसायिक उद्देश्य से संचालित करने की कोई मंजूरी दर्ज नहीं पाई गई।
स्थानीय कॉर्पोरेटर सुधा सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि यह मामला सीधे तौर पर के-वेस्ट वार्ड के बिल्डिंग एंड फैक्टरी डिपार्टमेंट के अधिकार क्षेत्र में आता है। सिंह के अनुसार, प्राथमिक दस्तावेजों और रिकॉर्ड को देखने पर यही सामने आया है कि इस एस-10 परिसर में किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि चलाने की पूर्व अनुमति प्रदान नहीं की गई थी। इसी आधार पर प्रशासन ने आगे की जांच प्रक्रिया तेज कर दी।
दस्तावेज जमा न होने पर बीएमसी ने थमाया काम रोकने का नोटिस
प्रशासनिक अधिकारियों ने मुआयना करने के उपरांत बंगले के स्वामियों को निर्धारित समयावधि के भीतर संबंधित स्वीकृतियों और मंजूरी से जुड़े औपचारिक कागजात पेश करने का निर्देश दिया था। तय मियाद बीत जाने के बाद भी जब अपेक्षित दस्तावेज जमा नहीं किए जा सके, तब बीएमसी ने सख्त रुख अपनाते हुए तुरंत प्रभाव से निर्माण कार्य रोकने का नोटिस थमा दिया। इस नोटिस के मिलने के बाद फिलहाल वहां चल रही सभी निर्माण गतिविधियों को बंद करवा दिया गया है।
इधर नगर निगम की इस कार्रवाई के बीच देवगन परिवार की तरफ से भी कानूनी प्रक्रिया को पूरा करने की दिशा में कदम उठाया गया है। परिवार ने बीएमसी के नोटिस का सिलसिलेवार जवाब तैयार करने और संबंधित अनुमतियों के जरूरी दस्तावेज आधिकारिक तौर पर पेश करने के लिए चार हफ्ते की मोहलत की मांग की है। अब इस मामले की अगली दिशा मालिकों द्वारा जमा कराए जाने वाले कागजातों की वैधता पर टिकी होगी।
रिहायशी इलाके में सलून और स्पा खुलने से पड़ोसियों को क्यों है परेशानी?
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें प्रॉपर्टी को किराए पर दिए जाने से कोई ऐतराज नहीं है, बल्कि उनकी चिंता का मुख्य कारण वहां एक कमर्शियल सलून और स्पा का संचालन शुरू होना है। जुहू का यह हिस्सा लंबे समय से एक बेहद शांत और सुरक्षित रिहायशी इलाका रहा है। ऐसे में वहां किसी कमर्शियल प्रतिष्ठान के आने से कॉलोनी का वातावरण पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
निवासियों ने अपनी आपत्तियों में स्पष्ट किया है कि स्पा और सलून शुरू होने से बाहरी ग्राहकों की आवाजाही अनियंत्रित रूप से बढ़ जाएगी। इलाके की आंतरिक सड़कें अपेक्षाकृत संकरी हैं, जिससे गाड़ियों की पार्किंग की गंभीर समस्या खड़ी होगी। इसके अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था में खलल पड़ने और दिनभर गाड़ियों व लोगों के आने-जाने से होने वाले शोर-शराबे को लेकर भी स्थानीय लोग खासे चिंतित हैं। उनका मानना है कि रिहायशी नियमों का उल्लंघन कर शुरू होने वाला कोई भी व्यावसायिक काम पड़ोस के सुकून को खत्म कर देगा।
प्रोजेक्ट की वैधताओं पर देवगन परिवार का पक्ष
दूसरी तरफ इस विवाद को लेकर देवगन परिवार के स्तर पर स्थिति को सामान्य और कानूनी रूप से सही बताया जा रहा है। हालांकि देवगन ग्रुप की चीफ लीगल एंड कम्प्लायंस ऑफिसर रुचि कनौजिया से इस पूरे मामले पर सीधा संपर्क नहीं स्थापित हो सका, लेकिन अभिनेता से जुड़े नजदीकी सूत्रों का दावा है कि इस योजना में नियमों की अनदेखी नहीं की गई है।
सूत्र का कहना है कि बंगले के प्रस्तावित उपयोग को लेकर संबंधित सरकारी विभागों से आवश्यक मंजूरी और क्लीयरेंस पहले ही कानूनी तौर पर प्राप्त कर ली गई थी। उनके अनुसार सभी मंजूरियां तय प्रक्रिया के तहत ली गई हैं और वे इसे संबंधित मंच पर स्पष्ट कर देंगे। बहरहाल, बीएमसी के हस्तक्षेप के बाद निर्माण कार्य पूरी तरह रुका हुआ है और अब सबकी नजरें नगर निगम के अंतिम कानूनी फैसले पर लगी हुई हैं।

















