अभिनय की दुनिया में अपनी खास पहचान बनाने वाले कलाकार क्रांति प्रकाश झा ने हाल ही में अपने शुरुआती दौर के मुश्किल दिनों को याद किया है। उनका मानना है कि एक कलाकार के सफर में असफलता और नापसंद किया जाना बहुत आम बात है, लेकिन इनसे घबराने के बजाय इनसे सीख लेकर खुद को मजबूत बनाना ही सबसे जरूरी कदम होता है।
मुंबई की लोकल ट्रेन और ऑडिशन का संघर्ष
अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों को ताजा करते हुए क्रांति प्रकाश झा ने बताया कि मुंबई जैसे शहर में टिके रहने के लिए उन्हें किस हद तक मेहनत करनी पड़ी थी। काम की तलाश में उन्हें रोजाना गोरेगांव से लोकल ट्रेन पकड़कर महालक्ष्मी तक का सफर तय करना पड़ता था। उस समय ट्रेनों में इतनी अधिक भीड़ हुआ करती थी कि ऑडिशन की जगह पर पहुंचते-प पहुंचते उनके कपड़े पूरी तरह खराब हो जाते थे।
इस समस्या से निपटने के लिए वे अपने साथ हमेशा कपड़ों की तीन अतिरिक्त जोड़ियां लेकर चलते थे। प्रसिद्ध स्टूडियो तक पहुंचने के बाद वे खुद को संभालते, अपने कपड़े बदलते और फिर पूरी तैयारी के साथ ऑडिशन के लिए जाते थे। उनके मुताबिक यह प्रक्रिया आसान नहीं थी और हर कोने से नापसंद किए जाने का सामना करना पड़ता था, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया ने उन्हें अंदर से बहुत मजबूत बना दिया।
एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी के बाद भी खाली हाथ
फिल्म ‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ में अपने बेहतरीन काम से लोगों के बीच पहचान बनाने वाले इस अभिनेता ने साझा किया कि एक बड़ी सफलता मिलने के बावजूद उनकी मुश्किलें रातों-रात खत्म नहीं हुई थीं। उस चर्चित फिल्म के बाद भी उनके पास करीब दो साल तक कोई नया काम नहीं आया था।
सड़कों और कार्यक्रमों में लोग उन्हें पहचानने जरूर लगे थे, लेकिन उनके हाथ में कोई नया प्रोजेक्ट नहीं था। उस दौर में कई बार उनके मन में यह सवाल उठता था कि आखिरकार उन्हें काम क्यों नहीं मिल रहा है और वे आर्थिक तंगी से क्यों जूझ रहे हैं। हालांकि ऐसे कठिन समय में भी उन्होंने खुद को कभी किसी बड़े स्टार की तरह नहीं समझा और अपने माता-पिता से मिले संस्कारों के दम पर जमीन से जुड़े रहे।
सफलता और विनम्रता का सफर
अपने पूरे सफर के दौरान उन्होंने कभी भी हार न मानने की ठानी और खुद पर भरोसा बनाए रखा। आज ‘रक्तांचल 3’ की शानदार सफलता के बाद वे मनोरंजन जगत और OTT के लोकप्रिय चेहरों में गिने जाते हैं। पैसों की तंगी, काम के लिए लंबा इंतजार, अनगिनत रिजेक्शन और आखिरकार विजय सिंह जैसे दमदार किरदारों को पर्दे पर जीवंत करने तक का उनका पूरा सफर इस बात का साफ प्रमाण है कि कड़ी मेहनत, अटूट धैर्य और विनम्रता ही इंसान को उसकी सही मंजिल तक पहुंचाती है।



















