मराठी क्विज रियलिटी शो 'कौन होणार करोड़पति' के मंच पर बतौर मेहमान पहुंचीं हिंदी सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री माधुरी दीक्षित ने फिल्म इंडस्ट्री में आलोचना और ट्रोलिंग के बदलते स्वरूप पर खुलकर बातचीत की। इस विशेष एपिसोड में उनके साथ टेलीविजन हस्ती शिव ठाकरे और डांसर गौतमी पाटिल भी अतिथि के रूप में मौजूद थे। इस दौरान 1990 के दशक में अपने चरम स्टारडम के दौर को याद करते हुए माधुरी दीक्षित ने तुलना की कि उस दौर की समीक्षाएं और आज के डिजिटल युग की ट्रोलिंग एक-दूसरे से किस तरह पूरी तरह भिन्न हैं।
स्टारडम और जमीन से जुड़े रहने पर सवाल
कार्यक्रम के दौरान शिव ठाकरे ने माधुरी दीक्षित से एक अहम सवाल पूछा। शिव ठाकरे का कहना था कि आज के समय में बहुत से लोगों के लिए थोड़ी सी शोहरत संभालना भी मुश्किल हो जाता है, ऐसे में माधुरी दीक्षित इतने लंबे समय तक शीर्ष स्तर की लोकप्रिय स्टार रहने के बाद भी हमेशा जमीन से कैसे जुड़ी रहीं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि अभिनेत्री ने वर्षों तक खुद को नकारात्मक टिप्पणियों और ट्रोलिंग के दुष्प्रभावों से कैसे सुरक्षित रखा।
काम के प्रति समर्पण और आलोचना से निपटने का नजरिया
शिव ठाकरे के सवाल पर अपनी बात रखते हुए माधुरी दीक्षित ने स्पष्ट किया कि काम के प्रति गहरा लगाव ही उनका सबसे बड़ा सुरक्षा कवच रहा। उन्होंने बताया कि जब इंसान अपने काम को पूरी निष्ठा से करता है, तो बाहरी नकारात्मकता असर नहीं डाल पाती। उन्होंने समझाया कि उनके शुरुआती दिनों में फिल्म पत्रिकाएं कलाकारों के बारे में टिप्पणियां और आलोचनाएं प्रकाशित किया करती थीं। हालांकि, उन पत्रिकाओं की बातें आज के सोशल मीडिया जैसी कतई नहीं थीं, जहां असीमित ट्रोलिंग होती है और लोग किसी एक मुद्दे को लेकर लगातार दोहराव के साथ हमले करते रहते हैं।
माधुरी दीक्षित ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जो भी काम किया जाए, उससे सच्चा प्यार होना जरूरी है और इंसान की नीयत साफ होनी चाहिए, क्योंकि इसके बाद बाकी चीजें कोई मायने नहीं रखतीं। इसी दृष्टिकोण की वजह से उन्होंने अपने पूरे सफर में नकारात्मक बातों को कभी खुद पर हावी नहीं होने दिया।
चार दशकों से अधिक का शानदार फिल्मी सफर
माधुरी दीक्षित के अभिनय करियर की शुरुआत साल 1984 में आई फिल्म 'अबोध' से हुई थी। अपनी स्वाभाविक अदाकारी और बेमिसाल नृत्य प्रतिभा के दम पर उन्होंने आगे चलकर बॉलीवुड की सबसे पसंदीदा अभिनेत्रियों में अपनी जगह बनाई। उनके पांच दशक लंबे करियर में कई ऐसी फिल्में शामिल हैं जिन्होंने बॉक्स ऑफिस और दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी। इनमें 'तेजाब', 'राम लखन', 'दिल', 'साजन', 'बेटा', 'हम आपके हैं कौन..!', 'मृत्युदंड', 'दिल तो पागल है' और 'देवदास' जैसी ब्लॉकबस्टर व चर्चित फिल्में प्रमुख रूप से शामिल हैं।



















