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मराठी क्विज शो में माधुरी दीक्षित ने समझाई 90 के दशक और सोशल मीडिया के दौर की ट्रोलिंगमनोरंजन
4 नव॰ 2026, 6:08 pm (1 दिन पहले)· 1

मराठी क्विज शो में माधुरी दीक्षित ने समझाई 90 के दशक और सोशल मीडिया के दौर की ट्रोलिंग

मराठी शो 'कौन होणार करोड़पति' में पहुंचीं माधुरी दीक्षित ने बताया कि कैसे 90 के दशक की पत्रिकाओं की आलोचना आज के अनियंत्रित सोशल मीडिया से बिल्कुल अलग थी।

मराठी क्विज रियलिटी शो 'कौन होणार करोड़पति' के मंच पर बतौर मेहमान पहुंचीं हिंदी सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री माधुरी दीक्षित ने फिल्म इंडस्ट्री में आलोचना और ट्रोलिंग के बदलते स्वरूप पर खुलकर बातचीत की। इस विशेष एपिसोड में उनके साथ टेलीविजन हस्ती शिव ठाकरे और डांसर गौतमी पाटिल भी अतिथि के रूप में मौजूद थे। इस दौरान 1990 के दशक में अपने चरम स्टारडम के दौर को याद करते हुए माधुरी दीक्षित ने तुलना की कि उस दौर की समीक्षाएं और आज के डिजिटल युग की ट्रोलिंग एक-दूसरे से किस तरह पूरी तरह भिन्न हैं।

स्टारडम और जमीन से जुड़े रहने पर सवाल

कार्यक्रम के दौरान शिव ठाकरे ने माधुरी दीक्षित से एक अहम सवाल पूछा। शिव ठाकरे का कहना था कि आज के समय में बहुत से लोगों के लिए थोड़ी सी शोहरत संभालना भी मुश्किल हो जाता है, ऐसे में माधुरी दीक्षित इतने लंबे समय तक शीर्ष स्तर की लोकप्रिय स्टार रहने के बाद भी हमेशा जमीन से कैसे जुड़ी रहीं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि अभिनेत्री ने वर्षों तक खुद को नकारात्मक टिप्पणियों और ट्रोलिंग के दुष्प्रभावों से कैसे सुरक्षित रखा।

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काम के प्रति समर्पण और आलोचना से निपटने का नजरिया

शिव ठाकरे के सवाल पर अपनी बात रखते हुए माधुरी दीक्षित ने स्पष्ट किया कि काम के प्रति गहरा लगाव ही उनका सबसे बड़ा सुरक्षा कवच रहा। उन्होंने बताया कि जब इंसान अपने काम को पूरी निष्ठा से करता है, तो बाहरी नकारात्मकता असर नहीं डाल पाती। उन्होंने समझाया कि उनके शुरुआती दिनों में फिल्म पत्रिकाएं कलाकारों के बारे में टिप्पणियां और आलोचनाएं प्रकाशित किया करती थीं। हालांकि, उन पत्रिकाओं की बातें आज के सोशल मीडिया जैसी कतई नहीं थीं, जहां असीमित ट्रोलिंग होती है और लोग किसी एक मुद्दे को लेकर लगातार दोहराव के साथ हमले करते रहते हैं।

माधुरी दीक्षित ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जो भी काम किया जाए, उससे सच्चा प्यार होना जरूरी है और इंसान की नीयत साफ होनी चाहिए, क्योंकि इसके बाद बाकी चीजें कोई मायने नहीं रखतीं। इसी दृष्टिकोण की वजह से उन्होंने अपने पूरे सफर में नकारात्मक बातों को कभी खुद पर हावी नहीं होने दिया।

चार दशकों से अधिक का शानदार फिल्मी सफर

माधुरी दीक्षित के अभिनय करियर की शुरुआत साल 1984 में आई फिल्म 'अबोध' से हुई थी। अपनी स्वाभाविक अदाकारी और बेमिसाल नृत्य प्रतिभा के दम पर उन्होंने आगे चलकर बॉलीवुड की सबसे पसंदीदा अभिनेत्रियों में अपनी जगह बनाई। उनके पांच दशक लंबे करियर में कई ऐसी फिल्में शामिल हैं जिन्होंने बॉक्स ऑफिस और दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी। इनमें 'तेजाब', 'राम लखन', 'दिल', 'साजन', 'बेटा', 'हम आपके हैं कौन..!', 'मृत्युदंड', 'दिल तो पागल है' और 'देवदास' जैसी ब्लॉकबस्टर व चर्चित फिल्में प्रमुख रूप से शामिल हैं।

सवाल-जवाब

माधुरी दीक्षित हाल ही में किस शो में नजर आई थीं?
माधुरी दीक्षित मराठी रियलिटी क्विज शो 'कौन होणार करोड़पति' के एक स्पेशल एपिसोड में गेस्ट बनकर पहुंची थीं।
शो में माधुरी दीक्षित के साथ अन्य कौन से अतिथि मौजूद थे?
इस एपिसोड में उनके साथ टेलीविजन कलाकार शिव ठाकरे और नृत्यांगना गौतमी पाटिल भी बतौर गेस्ट उपस्थित थे।
माधुरी दीक्षित ने ट्रोलिंग से निपटने को लेकर क्या सलाह दी?
उन्होंने कहा कि अपने काम से प्यार करना चाहिए, नीयत साफ रखनी चाहिए और सोशल मीडिया की व्यर्थ नकारात्मक बातों पर बिल्कुल ध्यान नहीं देना चाहिए।
90 के दशक और आज की आलोचना में माधुरी दीक्षित ने क्या अंतर बताया?
उन्होंने बताया कि 90 के दशक में सिर्फ कुछ पत्रिकाएं कलाकारों पर टिप्पणी करती थीं, जबकि आज सोशल मीडिया पर लगातार और बहुत ज्यादा ट्रोलिंग होती है।
माधुरी दीक्षित ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत किस फिल्म से की थी?
माधुरी दीक्षित ने साल 1984 में रिलीज हुई फिल्म 'अबोध' से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी।
माधुरी दीक्षित की कुछ प्रमुख यादगार फिल्में कौन सी हैं?
उनकी प्रमुख फिल्मों में 'तेजाब', 'राम लखन', 'दिल', 'साजन', 'बेटा', 'हम आपके हैं कौन..!', 'मृत्युदंड', 'दिल तो पागल है' और 'देवदास' शामिल हैं।
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