सिनेमा की दुनिया दर्शकों को अक्सर एक ऐसे दौर में ले जाती है, जिसका अहसास परदे पर बेहद सजीव और ऐतिहासिक लगता है। जब दर्शक थियेटर में विशाल दुर्ग, सदियों की छाप लिए मंदिर और पुरानी पत्थर की झोपड़ियां देखते हैं, तो यह सोचना भी मुश्किल होता है कि सामने नजर आ रहा दृश्य असल में हकीकत नहीं बल्कि इंसानी कल्पना की एक बनावट है। हाल ही में तेलुगु फिल्म रणबली के निर्माण से जुड़ी कुछ खास जानकारियां और पर्दे के पीछे की तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्होंने यह साफ कर दिया है कि किस तरह कला निर्देशकों का हुनर कैमरे के सामने एक पूरी ऐतिहासिक दुनिया खड़ी कर देता है।
सीमेंट की बुनियाद पर पीओपी और लोहे का ढांचा
इस फिल्म में एक बेहद विशाल और प्राचीन मंदिर दिखाया गया है, जिसे कहानी के भीतर भद्रमल्लन्ना स्वामी के पवित्र तीर्थ स्थल के तौर पर पेश किया गया है। परदे पर यह ढांचा सैकड़ों साल पुराने किसी ठोस पत्थर के नक्काशीदार मंदिर जैसा आभास देता है। वास्तविकता यह है कि इस पूरे निर्माण को मजबूती देने के लिए सिर्फ इसके निचले बेसमेंट को ही असली सीमेंट और कंक्रीट से तैयार किया गया था। बेसमेंट से ऊपर की पूरी बनावट, मंदिर के भव्य और बारीक नक्काशी वाले खंभे, विशाल मूर्तियां और छतों के सजावटी हिस्से पूरी तरह प्लास्टर ऑफ पेरिस यानी पीओपी और लोहे के मजबूत ढांचों की मदद से तैयार किए गए हैं।
पत्थर जैसी दिखने वाली खोखली दीवारें
भव्य मंदिर के साथ ही पूरे परिसर में कई कच्ची और पक्की झोपड़ियों का एक विस्तृत गांव बसाया गया है। कैमरे से देखने पर दर्शकों को ऐसा लगता है जैसे इन ग्रामीण मकानों की दीवारें भारी-भरकम चट्टानों और अनगढ़े पत्थरों को जोड़कर बनाई गई हों। लेकिन पर्दे के पीछे की हकीकत यह है कि ये सारी दीवारें भीतर से बिल्कुल खोखली हैं। निर्माण दल ने इन्हें फाइबर और प्लास्टर ऑफ पेरिस के मिश्रण से डमी के रूप में ढाला है। इसके ऊपर पेंट और बनावट का ऐसा बारीक काम किया गया कि कैमरे की नजर में ये फाइबर के ढांचे ठोस और प्राचीन पत्थरों जैसे नजर आने लगे।
कला और तकनीक से गढ़ी गई काल्पनिक दुनिया
इस गांव के दृश्य को पूरी तरह जीवंत बनाने के लिए सेट पर कई अन्य कलात्मक तत्वों को शामिल किया गया। इनमें विशाल लकड़ी के रथ, पारंपरिक ग्रामीण कुआं, पहरेदारों के पुतले और कई जगह दैत्यों की भीमकाय आकृतियां रखी गई हैं। शूटिंग के दौरान माहौल को पूरी तरह स्वाभाविक बनाए रखने के लिए कुछ खास प्रॉप्स तो असली रखे गए, लेकिन ज्यादातर जटिल संरचनाओं को डमी और फाइबर की मदद से ही गढ़ा गया। यह पूरी व्यवस्था दिखाती है कि किस तरह रचनात्मक सोच, सटीक रंगाई और आर्ट डिजाइन के मेल से एक बंजर व खाली जमीन पर कई सदियों पुराना गांव तैयार किया जा सकता है।



















