चिकित्सा के पेशे से जुड़ी पृष्ठभूमि वाले डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने अपनी पहली ही फीचर फिल्म 'हनुमान अंश' से भारतीय सिनेमा में धमाकेदार शुरुआत की है। ऐसे दौर में जब दर्शक मुख्य रूप से बड़े बजट की एक्शन फिल्मों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, इस सादगी से भरी आध्यात्मिक रचना ने व्यापार विश्लेषकों को चौंका दिया है। वर्ष 2026 में बेहद सीमित स्क्रीन्स पर प्रदर्शित हुई यह लघु-बजट फिल्म दर्शकों की निरंतर सराहना के बल पर इस साल की सबसे चर्चित और सफल फिल्मों में शुमार हो चुकी है।
500 करोड़ी फिल्मों के बीच सादगी की जीत
वर्तमान समय में थिएटर्स में 'टॉक्सिक' जैसी 500 करोड़ रुपये के विशाल बजट में तैयार हुई एक्शन फिल्मों का भारी दबदबा और प्रचार देखने को मिल रहा है। ऐसी स्थिति में बड़ी-बड़ी स्टारकास्ट और भारी भरकम विज्ञापन अभियानों वाली फिल्मों के साथ प्रतिस्पर्धा करना किसी नए निर्देशक के लिए बेहद कठिन माना जाता है। इसके बावजूद, 'हनुमान अंश' ने सिनेमाघरों में दर्शकों की भीड़ बनाए रखकर अपनी व्यावसायिक ताकत दिखाई है। किसी तड़क-भड़क के बिना केवल सशक्त विषयवस्तु पर भरोसा करते हुए इस प्रोजेक्ट ने थिएटर्स में अपनी टिकट बिक्री से यह साबित किया कि दर्शकों का प्यार पाने के लिए करोड़ों के बजट से अधिक कहानी की निष्ठा जरूरी है।
एमबीबीएस डिग्री से लेकर पर्वतीय पोस्टिंग तक का सफर
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर लखनऊ में पले-बढ़े डॉ. विशाल चतुर्वेदी का सिनेमा जगत में प्रवेश एक असाधारण घटना है। उन्होंने चिकित्सा विज्ञान का अध्ययन करते हुए वर्ष 2006 में गोरखपुर के मेडिकल संस्थान से एमबीबीएस की डिग्री सफलतापूर्वक प्राप्त की थी। स्नातक की डिग्री हासिल करने के तुरंत पश्चात, इसी 2006 वर्ष में उन्हें उत्तराखंड राज्य के हल्द्वानी इलाके में बतौर चिकित्सक अपनी पहली सरकारी तैनाती मिली। कुमाऊं क्षेत्र के इस शहर में हुई पहली पोस्टिंग ने उनके व्यक्तिगत जीवन और सोच में एक अभूतपूर्व परिवर्तन का आधार तैयार किया।
कैंची धाम और नीम करोली बाबा के विचारों की प्रेरणा
हल्द्वानी में अपने डॉक्टरी कार्य के दौरान, डॉ. विशाल को प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु नीम करोली बाबा के पवित्र स्थान 'कैंची धाम' के दर्शन करने का अवसर प्राप्त हुआ। उस पावन स्थल पर पहुंचकर वे नीम करोली बाबा की महान शिक्षाओं, नैतिक सिद्धांतों और लोक कल्याणकारी विचारों से अत्यधिक प्रभावित हुए। कैंची धाम परिसर के उस शांत वातावरण ने चिकित्सक के मन पर एक अमिट प्रभाव डाला, जिसके बाद उन्होंने डॉक्टरी सेवा प्रदान करने के साथ-साथ इन महान विचारों को कलात्मक रूप देने का संकल्प लिया।
दो दशकों के धैर्य और साधना के बाद बनी फिल्म
कैंची धाम में महसूस हुई उस आत्मिक अनुभूति को डॉ. विशाल ने एक विचार के रूप में लगभग 20 वर्षों तक अपने मन में संजो कर रखा। दो दशकों तक चले इस लंबे इंतजार, आत्ममंथन और रचनात्मक संघर्ष के बाद उनका यह सपना 'हनुमान अंश' के नाम से बड़े पर्दे पर अवतरित हुआ। अपनी इस पहली सिनेमाई प्रस्तुति में उन्होंने मानवीय संवेदनाओं, भक्ति, दया और आत्मिक मूल्यों को अत्यंत ही सहज एवं प्रभावकारी कथा में पिरोया है, जिसे दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं।
कंटेंट निर्माण से लेकर पाक कला तक बहुमुखी प्रतिभा
डॉ. विशाल चतुर्वेदी की पहचान केवल एक डॉक्टर या फिल्म निर्देशक तक सीमित नहीं है, बल्कि वे विविध रचनात्मक क्षेत्रों में दक्षता रखते हैं। पिछले 14 वर्षों की लंबी अवधि से वे डिजिटल कंटेंट निर्माण, शोध, पटकथा लेखन और पाक कला से जुड़े कार्यों में पूरी निष्ठा से लगे हुए हैं। उन्होंने 'द इंडियन किंग' तथा 'हॉली काउ होम प्रोडक्शंस' जैसी दो क्रिएटिव संस्थाओं की स्थापना की है। इन माध्यमों से उन्होंने अनेक बड़े व्यावसायिक ब्रांड्स और मीडिया प्रोजेक्ट्स के लिए उपयोगी एवं गुणात्मक सामग्री तैयार की है।
भारतीय खानपान की संस्कृति और 100 ओरिजिनल आईपी का लक्ष्य
मीडिया और सिनेमा के अतिरिक्त डॉ. विशाल की गहरी रुचि भारत के पारंपरिक घरेलू खानपान में भी है। एक कुशल शेफ के तौर पर उन्होंने 'घर का खाना' और उससे जुड़ी प्राचीन भारतीय पाक परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास किया है। उनका दृढ़ विश्वास है कि एक अच्छी कहानी का उद्देश्य केवल क्षणिक मनोरंजन करना नहीं होता, बल्कि वह समाज की सोच में स्थाई सकारात्मक बदलाव लाती है। भविष्य में अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए भारतीय मूल्यों पर आधारित प्रोजेक्ट्स बनाने के इच्छुक डॉ. विशाल का लक्ष्य अपने जीवन में 100 ओरिजिनल इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज (IPs) का निर्माण करना है। 'हनुमान अंश' की बॉक्स ऑफिस सफलता ने यह स्थापित कर दिया है कि यदि दृष्टिकोण स्पष्ट हो तो एक चिकित्सक भी दुनिया का बेहतरीन कथाकार बन सकता है।


















