वर्ष 1990 में सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई फिल्म आशिकी ने भारतीय हिंदी सिनेमा जगत में सफलता की एक नई मिसाल पेश की थी। राहुल रॉय, अनु अग्रवाल और दीपक तिजोरी जैसे नए और साधारण कलाकारों के साथ बनाई गई इस फिल्म ने रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर अभूतपूर्व सफलता अर्जित की और एक हिस्टोरिकल ब्लॉकबस्टर साबित हुई। जाने-माने निर्देशक महेश भट्ट के कुशल निर्देशन और टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार के निर्माण में बनी यह फिल्म केवल एक व्यावसायिक रूप से सफल सिनेमा नहीं रही, बल्कि इसने पूरे 90 के दशक में संगीतमय रोमांटिक फिल्मों के एक सुनहरे दौर का आगाज किया। इस फिल्म में किसी स्थापित सुपरस्टार की मौजूदगी नहीं थी, लेकिन इसके बावजूद दो नए कलाकारों ने अपनी सादगी और बेहतरीन अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया और वे रातों-रात बड़े स्टार बन गए। फिल्म के दृश्य और रीमा लागू जैसे कलाकारों की अभिनय क्षमता ने भी इस सिनेमाई अनुभव को यादगार बना दिया।
हिंदी सिनेमा में संगीतमय प्रेम कहानियों की नई शुरुआत
आशिकी की इस अभूतपूर्व और ऐतिहासिक सफलता के केंद्र में इसका सुरीला तथा कर्णप्रिय संगीत था। फिल्म के मधुर गानों की ताकत के बल पर ही यह सिनेमा पूरे देश के कोने-कोने में जबरदस्त लोकप्रियता हासिल करने में पूरी तरह कामयाब रहा। इस कालजयी साउंडट्रैक को तैयार करने का पूरा श्रेय संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण को जाता है। नदीम सैफी और श्रवण राठौड़ की इस प्रतिभाशाली जोड़ी ने टी-सीरीज के लिए ऐसे तरानों की रचना की, जिन्होंने भारतीय संगीत जगत में तहलका मचा दिया। इस एल्बम की विशाल सफलता ने नदीम-श्रवण को बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय और मांग वाले संगीतकारों की सूची में शीर्ष पर ला खड़ा किया।
फिल्म से पहले गानों की रिकॉर्डिंग का अनूठा प्रयोग
इस फिल्म के निर्माण की कहानी बेहद रोचक और अनूठी है, क्योंकि आशिकी के गाने फिल्म की कहानी लिखे जाने से पहले ही बनकर तैयार हो चुके थे। संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण ने प्रसिद्ध गीतकार समीर अंजान और पार्श्वगायक कुमार सानू के साथ मिलकर कुछ बेहद खूबसूरत गानों की रिकॉर्डिंग कर ली थी। जब ये तैयार तरानें निर्देशक महेश भट्ट ने सुने, तो वे संगीत की मिठास और भावुकता से इतने गहराई से प्रभावित हुए कि उन्होंने तुरंत इन गानों के इर्द-गिर्द एक पूरी फिल्म की कहानी रचने का मन बना लिया। इस प्रकार गानों की धुन पर आधारित पटकथा से आशिकी जैसी अमर फिल्म का जन्म हुआ।
गीतकारों और गायकों का शानदार तालमेल
फिल्म आशिकी के म्यूजिकल एल्बम में कुल 12 गाने शामिल थे, जिन्हें 26 1989 को श्रोताओं के सामने प्रस्तुत किया गया था। इन गानों के बोल समीर अंजान, रानी मलिक और मदन पाल जैसे दिग्गजों ने लिखे थे। एल्बम के 12 गानों में से नौ गानों की रचना समीर अंजान ने की थी, जबकि एक गाना मदन पाल ने और एक गाना रानी मलिक ने लिखा था। गायकी के मोर्चे पर पार्श्वगायक कुमार सानू ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 9 गानों में अपनी सुरीली आवाज दी। वहीं बाकी बचे गानों को मशहूर गायिका अनुराधा पौडवाल और उदित नारायण ने स्वरबद्ध किया। इस एल्बम के नजर के सामने जिगर के पास, धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना, मैं दुनिया भुला दूंगा, तू मेरी जिंदगी है, दिल का आलम और अब तेरे बिन जी लेंगे हम जैसे गाने आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करते हैं।
अनुराधा पौडवाल की टी-सीरीज में एंट्री और नदीम-श्रवण का दौर
यह संगीतमय सफर गायिका अनुराधा पौडवाल के करियर के लिए भी एक मील का पत्थर साबित हुआ। टी-सीरीज के सर्वेसर्वा गुलशन कुमार से अनुराधा पौडवाल का परिचय संगीतकार नदीम-श्रवण ने ही कराया था। इस शुरुआत के बाद अनुराधा पौडवाल लंबे समय तक टी-सीरीज के लिए समर्पित होकर काम करती रहीं। गायक, गीतकार और संगीतकार की इस दूरदर्शी टीम ने मिलकर ऐसा संगीत रचा जिसने 90 के दशक में बॉलीवुड फिल्मों का चेहरा ही बदल दिया। इसके बाद के सालों में दिल, साजन, फूल और कांटे तथा दीवाना जैसी कई चर्चित फिल्मों में संगीतमय रोमांटिक जॉनर की यही लहर देखने को मिली।
अद्भुत एल्बम बिक्री और टी-सीरीज की रिकॉर्ड कमाई
आशिकी का साउंडट्रैक रिलीज होते ही भारतीय संगीत बाजार में बिक्री के नए कीर्तिमान स्थापित करने लगा। 2 करोड़ से अधिक यूनिट्स की बिक्री के साथ यह बॉलीवुड इतिहास का सबसे ज्यादा बिकने वाला संगीत एल्बम बन गया। इस भारी-भरकम एल्बम बिक्री ने टी-सीरीज को देश के नंबर एक संगीत लेबल के रूप में मजबूती से स्थापित कर दिया। इस ऐतिहासिक व्यावसायिक सफलता ने कंपनी के वित्तीय आंकड़ों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। टी-सीरीज की वार्षिक आय जो वर्ष 1985 में 20 करोड़ रुपये थी, वह आशिकी की अपार सफलता के बाद वर्ष 1991 में बढ़कर 200 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसके बाद वर्ष 1997 तक कंपनी की सालाना आय 500 करोड़ रुपये के विशाल आंकड़े को छू गई।



















