भारतीय सिनेमा के जाने-माने अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद मुंबई स्थित एक कला अकादमी में विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। इस स्मृति सभा को 'संगीतले नाना' नाम दिया गया, जिसमें कला, सिनेमा और प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़ी कई नामी हस्तियों ने पहुंचकर दिवंगत कलाकार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उपस्थित लोगों ने भारतीय सिनेमा और रंगमंच में उनके अद्वितीय अभिनय सफर और सामाजिक योगदान को याद करते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रार्थना सभा में शामिल हुईं प्रमुख हस्तियां
इस शोक सभा में लोकप्रिय टेलीविजन धारावाहिक सीआईडी से घर-घर में पहचान बनाने वाले अभिनेता शिवाजी साटम उपस्थित हुए। उनके अलावा मराठी सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री वर्षा उसगांवकर हाथ जोड़कर प्रार्थना सभा में प्रवेश करती नजर आईं। जाने-माने फिल्म निर्देशक मेहुल कुमार और 'विकराल और गबराल' फेम अभिनेता केके गोस्वामी भी दिवंगत अभिनेता को नमन करने पहुंचे। इस सभा में प्रशासनिक गलियारे से आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे भी शामिल हुए और उन्होंने अभिनेता की स्मृतियों को नमन किया।
महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से हुआ आयोजन
मुंबई में आयोजित यह विशेष प्रार्थना सभा महाराष्ट्र सरकार, पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट तथा टूरिज्म एंड कल्चरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के संयुक्त सहयोग से आयोजित की गई थी। इस औपचारिक सभा के जरिए राज्य स्तर पर भी अभिनेता की कला और योगदान को विशेष सम्मान दिया गया। कार्यक्रम के दौरान मौजूद सभी लोगों ने उनके साथ बिताए पलों और उनके प्रतिष्ठित संवादों की गहरी छाप का उल्लेख किया।
गोवा में ली थी अंतिम सांस
नाना पाटेकर का निधन 8 अक्टूबर की सुबह गोवा में 75 वर्ष की उम्र में हुआ था। वह अपने आवास पर अचेत अवस्था में पाए गए थे, जिसके तुरंत बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। वहां मौजूद चिकित्सकों ने उन्हें बचाने के भरसक प्रयास किए, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उनके अकस्मात चले जाने की सूचना से पूरे कला जगत में गहरा शोक फैल गया था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अंतिम संस्कार
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधिकारिक विवरण के अनुसार, अभिनेता की मृत्यु का कारण हार्ट अटैक था। जांच में सामने आया कि उनकी 'लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी' में खून का थक्का जम गया था, जिससे हृदय के एक महत्वपूर्ण हिस्से तक रक्त का संचार अवरुद्ध हो गया था। रिपोर्ट में इसे पूरी तरह स्वाभाविक मृत्यु बताया गया है। बाद में पुणे के पास स्थित उनके फार्महाउस पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न किया गया था।



















