हिंदी सिनेमा के प्रतिष्ठित अभिनेता और कॉमेडियन मुश्ताक खान का 24 सितंबर की शाम को मुंबई के नानावती अस्पताल में निधन हो गया। 65 वर्ष की उम्र में उनके दुनिया से चले जाने के बाद से न केवल बॉलीवुड जगत में बल्कि उनकी जन्मस्थली बैहर और पूरे बालाघाट जिले में भारी शोक की स्थिति बनी हुई है। बैहर के स्थानीय निवासी और उनके परिचित अपने इस लोकप्रिय कलाकार को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। अभिनय की दुनिया में रंगमंच से अपने सफर का आगाज करने वाले मुश्ताक खान ने राष्ट्रीय स्तर पर बालाघाट का गौरव बढ़ाया था। उनके इस असमय निधन से जिले ने अपना एक अमूल्य और चमकता हुआ सितारा हमेशा के लिए खो दिया है, जिससे उनके तमाम रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों में गहरा दुख है।
जमीन से जुड़े और बेहद सरल स्वभाव के धनी थे
मुश्ताक खान की रिश्तेदार सायमा नाज ने उनके सरल व्यक्तित्व को याद करते हुए बताया कि बैहर की माटी में जन्मे इस कलाकार ने अपनी मेहनत से बैहर को बॉलीवुड के नक्शे पर एक खास पहचान दिलाई थी। रिश्ते में उनके फूफा लगने वाले मुश्ताक खान के निधन से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। उनके लिए दुआ करते हुए उन्होंने कहा कि अल्लाह उन्हें जन्नत में उच्च स्थान अता करे। उन्होंने आगे साझा किया कि जब भी वह अपने गृह नगर आते थे, तो कभी भी किसी सेलिब्रिटी या बड़े स्टार की तरह बर्ताव नहीं करते थे।
सायमा नाज ने इस बात पर भी जोर दिया कि वह हमेशा एक आम इंसान की तरह लोगों से मिलते-जुलते थे और जमीन से जुड़े रहते थे। उनके भीतर कभी भी बॉलीवुड की बड़ी हस्ती होने का कोई अहंकार या घमंड देखने को नहीं मिला। वह हमेशा स्थानीय लोगों के साथ घुलमिलकर रहते थे और उनके इस अचानक चले जाने की खबर ने पूरे बैहर के माहौल को गमगीन कर दिया है।
बचपन के साथियों और स्थानीय लोगों ने दी प्रतिक्रिया
बैहर के ही रहने वाले सचिन झारिया ने अभिनेता को याद करते हुए कहा कि उनके साथ बचपन में खेलने-कूदने वाले सभी साथी गहरे सदमे में हैं। उनका स्थानीय लोगों के साथ एक खास लगाव था और जब भी वह बैहर आते थे, यहां होने वाले क्रिकेट टूर्नामेंट्स में हिस्सा लेते थे और हर किसी से गर्मजोशी से मिलते थे। वह कभी भी किसी फिल्मी हस्ती की तरह व्यवहार नहीं करते थे, बल्कि हर व्यक्ति से उनके संबंध बहुत मधुर और सामान्य इंसान वाले थे।
सचिन झारिया ने अंत में कहा कि यह पूरे बालाघाट जिले के लिए एक अपूरणीय क्षति है, क्योंकि उन्होंने बैहर जैसी छोटी जगह से निकलकर बॉलीवुड तक का लंबा सफर तय किया था और इस क्षेत्र का नाम रोशन किया था। गणेश विसर्जन का पर्व होने के कारण जिस श्रद्धांजलि कार्यक्रम की रूपरेखा बनाई गई थी, वह उस दिन संपन्न नहीं हो सकी, लेकिन अगले दिन सभी बैहरवासियों द्वारा उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए जाने की पूरी तैयारी है।



















