बॉलीवुड में नब्बे के दशक के दौर को मधुर और भावनात्मक धुनों के स्वर्णिम काल के तौर पर याद किया जाता है। उस दौर के कई ऐसे नगमे हैं जो वक्त बीतने के साथ और भी ज्यादा लोकप्रिय होते चले गए। ऐसा ही एक बेहद भावुक गीत साल 1998 में रिलीज हुई फिल्म नसीब का 'शिकवा नहीं किसी से' है। गोविंदा और ममता कुलकर्णी पर फिल्माया गया यह दर्दभरा तराना आज करीब 28 साल बाद भी संगीत के शौकीनों की प्लेलिस्ट में खास मुकाम रखता है। जब भी टूटे दिलों और जुदाई की बात होती है, इस गाने की उदास धुन हर किसी को भावुक कर देती है।
कुमार सानू की आवाज और नदीम-श्रवण की यादगार धुन
इस अमर गीत की रचना में भारतीय संगीत जगत के दिग्गज फनकारों का संगम देखने को मिला था। जाने-माने पार्श्व गायक कुमार सानू ने इसे अपनी दर्दभरी और रूहानी आवाज में पिरोया, जिसने हर सुनने वाले के दिल को गहराई से छू लिया। वहीं, उस दौर की सबसे कामयाब संगीतकार जोड़ी नदीम-श्रवण ने इस गाने की बेहद मार्मिक धुन तैयार की थी। इसके भावुक और मार्मिक बोल मशहूर गीतकार समीर ने लिखे थे। पर्दे पर इस गीत के दौरान अभिनेता गोविंदा अपने टूटे हुए दिल की दास्तान और बेबसी को बेहद संजीदा अंदाज में बयां करते नजर आते हैं, जो किसी भी दर्शक को रुलाने के लिए काफी है।
गोविंदा, ममता कुलकर्णी और सितारों से सजी स्टारकास्ट
फिल्म नसीब में मुख्य भूमिकाओं के लिए गोविंदा और ममता कुलकर्णी की जोड़ी को चुना गया था। पर्दे पर दोनों की केमिस्ट्री को लोगों ने काफी पसंद किया था। मुख्य कलाकारों के अलावा फिल्म में अपने दौर के कई बेहतरीन चरित्र अभिनेताओं की लंबी कतार मौजूद थी। इसमें कादर खान, शक्ति कपूर, सईद जाफरी, राहुल रॉय और अजीत वाछानी जैसे मंझे हुए कलाकारों ने अहम किरदार निभाए थे। मजबूत अदाकारों की मौजूदगी ने फिल्म के भावनात्मक दृश्यों को काफी वजनदार बना दिया था।
इश्क, जुदाई और किस्मत के टकराव की कहानी
फिल्म की मुख्य कहानी कृष्ण प्रसाद और पूजा के सच्चे प्यार और उनकी तकदीर के इर्द-गिर्द बुनी गई थी। दोनों एक-दूसरे से गहरा लगाव रखते हैं, लेकिन हालात उनकी मोहब्बत के आड़े आ जाते हैं। पूजा के पिता उसकी मर्जी के खिलाफ उसका रिश्ता कहीं और तय कर देते हैं, जिसके चलते पूजा को अपने प्यार का त्याग करने पर विवश होना पड़ता है। दूसरी तरफ, कृष्ण को यह गलतफहमी हो जाती है कि पूजा ने उसके साथ बेवफाई की है। इसी गहरे दर्द, गलतफहमी और किस्मत के आगे बेबसी की पृष्ठभूमि में यह गीत बजता है, जहां प्रेमी बिना किसी नाराजगी या शिकायत के अपनी बदकिस्मती को कबूल करता है।
टिकट खिड़की पर पिटी फिल्म, पर अमर हो गया संगीत
कीर्ति कुमार के निर्देशन में तैयार हुई यह फिल्म सिनेमाघरों में दर्शकों को उस तरह आकर्षित नहीं कर पाई, जैसी निर्माताओं को उम्मीद थी। बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों के अनुसार, इस फिल्म को करीब 2.75 करोड़ रुपये के बजट में बनाया गया था। दुनियाभर के सिनेमाघरों में यह फिल्म केवल 2.63 करोड़ रुपये का कारोबार ही कर सकी और बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह फ्लॉप साबित हुई। हालांकि, इसके विपरीत फिल्म का संगीत चार्टबस्टर रहा और उस वक्त इसके ऑडियो कैसेट्स की बाजार में रिकॉर्डतोड़ बिक्री हुई थी। नतीजतन, फिल्म भले ही कारोबारी लिहाज से न चल सकी हो, लेकिन इसका यह दर्दभरा गीत सदाबहार बनकर अमर हो गया।



















