पौराणिक गाथा पर आधारित बहुचर्चित सिनेमाई रूपांतरण 'रामायण' कल 5 नवंबर को दुनिया भर के सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है। निर्देशक नितेश तिवारी के मार्गदर्शन में तैयार इस विशाल प्रोजेक्ट की रिलीज से पहले 3 नवंबर को मुंबई में चुनिंदा दर्शकों के लिए एक विशेष स्क्रीनिंग रखी गई थी। इससे पूर्व संयुक्त राज्य अमेरिका के लॉस एंजिलेस शहर में आयोजित किए गए प्रीमियर के दौरान दर्शकों ने परियोजना को बेहद उत्साहजनक प्रतिक्रिया दी। फिल्म से जुड़े फिल्ममेकर्स नितेश तिवारी और नमित मल्होत्रा ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर संवाद करते हुए इसके भविष्य के विस्तार को लेकर भी संकेत दिए हैं। निर्माता नमित मल्होत्रा के अनुसार, फ्रेंचाइजी के तीसरे हिस्से पर अंतिम फैसला दर्शकों से मिलने वाले व्यापक रुझान के आधार पर किया जाएगा।
प्रभु राम के स्वरूप में ढलने के लिए भारतीय खिलाड़ी से मार्गदर्शन
पर्दे पर मर्यादा पुरुषोत्तम की गरिमा को सजीव करने के लिए मुख्य अभिनेता रणबीर कपूर ने अपने स्तर पर लंबी शारीरिक और मानसिक साधना की। अभिनेता ने अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों से बातचीत में खुलासा किया कि वास्तविक फिल्मांकन शुरू होने से वर्षों पूर्व ही उन्होंने अपने अभ्यास का सिलसिला आरंभ कर दिया था। इस विशाल चरित्र को निभाने की चुनौती को स्वीकारते हुए उन्होंने एक भारतीय ओलंपिक एथलीट के साथ लगभग डेढ़ वर्ष तक तीरंदाजी और सटीक शारीरिक संतुलन का कड़ा अभ्यास किया। धनुष बाण चलाने की सही मुद्रा सीखने के साथ ही उन्होंने मर्यादा, संयम और शालीनता के भावों को आत्मसात करने का प्रयास किया ताकि चरित्र की आंतरिक गहराई स्क्रीन पर स्वाभाविक नजर आ सके।
न्यूयॉर्क में कक्षाएं और हॉलीवुड मूवमेंट डायरेक्टर के साथ सत्र
रणबीर कपूर ने केवल भारत में ही अभ्यास नहीं किया, बल्कि अभिनय की सूक्ष्मताओं को निखारने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचकर भी कुछ विशेष कक्षाओं में हिस्सा लिया। इसके अतिरिक्त, हॉलीवुड के जाने-माने मूवमेंट और एक्शन डायरेक्टर टेरी नोटरी ने भी रणबीर के साथ व्यापक वर्कशॉप आयोजित कीं। टेरी नोटरी इससे पहले 'प्लैनेट ऑफ द एप्स' सीरीज, 'एक्स2' और 'सुपरमैन रिटर्न्स' जैसी वैश्विक फिल्मों में अपने कौशल का प्रदर्शन कर चुके हैं।
टेरी नोटरी के साथ हुए प्रशिक्षण सत्रों का प्राथमिक उद्देश्य मात्र लड़ाई के दृश्य सिखाना नहीं था, बल्कि शरीर की चाल-ढाल, प्राकृतिक गतिविधियों और श्वसन क्रिया में संतुलन स्थापित करना था। इन सत्रों में पेड़ों पर चढ़ने और सहजता से विचरण करने जैसी शारीरिक तकनीकों को भी शामिल किया गया। अपने इस अनुभव को साझा करते हुए अभिनेता ने कहा,
"टेरी नॉटरी ने हमारे साथ वर्कशॉप की थी जिसमें उन्होंने हमें सांस लेना सिखाया, चलना सिखाया, पेड़ पर चढ़ना सिखाया।"अभिनेता के अनुसार, हर नई भूमिका के साथ कुछ नया सीखने का अवसर मिलना किसी भी कलाकार के लिए सबसे सौभाग्यपूर्ण अनुभव होता है।
चरित्र की तकनीकी समझ और आंतरिक भाव का संतुलन
इस ऐतिहासिक किरदार को स्वीकार करते समय रणबीर कपूर के मन में एक प्रकार की हिचकिचाहट और संकोच भी मौजूद था। उनका मानना था कि भले ही एक अभिनेता के रूप में वे बाण संधान की हर तकनीक और बाहरी तौर-तरीके सीख सकते हैं, किंतु वे किसी पात्र की मौलिक आत्मा को कृत्रिम रूप से नहीं बदल सकते। उनका स्पष्ट मानना था कि सभी शारीरिक विधियों और तकनीकों के बाद भी अंततः पर्दे पर अभिनय की सच्चाई कलाकार के अपने अंतर्मन से ही प्रस्फुटित होती है, इसलिए उन्होंने बाहरी तकनीकी दक्षता के साथ-साथ आंतरिक समर्पण पर सर्वाधिक ध्यान केंद्रित किया।



















