हिंदी सिनेमा में अपनी लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को लोटपोट करने वाले अभिनेता राजपाल यादव ने अपनी ब्लॉकबस्टर कॉमेडीज को लेकर एक बेहद मनोरंजक पहलू साझा किया है। अक्सर बड़े पर्दे पर उनके निभाए किरदारों को मुश्किलों में घिरने और बुरी तरह पिटने के बाद ही राहत मिलती है, और अभिनेता इसी थप्पड़-मारपीट वाले फार्मूले को सिनेमाघरों में अपनी सफलता की बड़ी वजह मानते हैं।
टॉक शो में उठा थप्पड़ और बॉक्स ऑफिस का कनेक्शन
एक विशेष बातचीत के दौरान जब कार्यक्रम ‘फैमिली फुल हाउस विद रोहित शर्मा’ के मंच पर होस्ट रोहित शर्मा ने अभिनेता से संवाद किया, तो उन्होंने राजपाल के ऑनस्क्रीन किरदारों के इस अनोखे पैटर्न को रेखांकित किया। रोहित ने मजाकिया लहजे में पूछा, ‘क्या पिटाई आपका लकी चार्म है?’ उन्होंने ध्यान दिलाया कि चाहे बड़े सितारों की मौजूदगी वाली मल्टीस्टारर फिल्में हों या सिचुएशनल कॉमेडी, राजपाल के किरदारों की पिटाई लगभग हर जगह एक समान धागा बनकर उभरती है।
दर्शकों की हंसी और अभिनेता का हाजिरजवाब अंदाज
इस चुटीले सवाल पर तुरंत मुस्कुराते हुए राजपाल ने चुटकी ली, ‘हां, जिसमें हम पिटते थे, वो फिल्म हिट होती है।’ इस हाजिरजवाबी को सुनते ही स्टूडियो में मौजूद दर्शक ठहाके लगाने लगे और जोरदार तालियों से पूरे माहौल में उत्साह भर गया। पर्दे पर थप्पड़ खाने और असहाय नजर आने वाले उनके किरदारों ने वास्तव में दर्शकों को सबसे ज्यादा गुदगुदाया है।
गुल्लू से लेकर छोटा पंडित तक के यादगार सफर की झलक
राजपाल के करियर ग्राफ पर नजर डालें तो साल 2006 में आई प्रियदर्शन निर्देशित फिल्म ‘भागम भाग’ में उनका गुल्लू का किरदार आज भी लोगों के जेहन में ताजा है, जिसमें वे अक्षय कुमार और गोविंदा के साथ मजेदार उलझनों में फंसे थे। इसके ठीक अगले वर्ष 2007 में रिलीज हुई ‘भूल भुलैया’ में उनके निभाए लाल सिंदूर और धोती वाले ‘छोटा पंडित’ के रोल ने सिनेमाघरों में तहलका मचा दिया था।
इसके अतिरिक्त उन्होंने ‘हंगामा’, ‘वक्त: द रेस अगेंस्ट टाइम’, ‘चुप चुप के’, ‘ढोल’, ‘पार्टनर’, ‘दे दना दन’, ‘खट्टा मीठा’ और ‘फिर हेरा फेरी’ जैसी अनगिनत लोकप्रिय कॉमेडी फिल्मों में अपनी अनूठी शारीरिक भाव-भंगिमा और डायलॉग डिलीवरी से सिनेमाई इतिहास में एक खास मुकाम हासिल किया है।


















